‘2 % आबादी के समाज ने दिग्गजों को बर्तन धोने, झाडू लगाने पर मजबूर कर दिया पर 16 % मुस्लिम की हालत फुटबाल जैसी’

जनता दल राष्ट्रवादी के संयोजक अशफाक रहमान ने मुसलमानों को झकझोड़ते हुए कहा है कि दो  प्रतिशत आबादी वाले समाज ने  अपनी आस्था की ताकत से दिग्गज नेताओं को जमीन पर बैठने, बर्तन धोेने व झाडू लगाने पर मजबूर कर दिया लेकिन मुसलमान खुद ऐसी सियासी ताकतों के आगे फुटबाल बने हुए हैं.ashfaque.rahman

 

अशफाक रहमान ने कहा कि देश में 25 करोड़ मुसलमान हैं जबकि बिहार में उनकी आबादी 16 प्रतिशत से ज्यादा है लेकिन उनकी सियासी हैसियत का कोई वजन नहीं है. अशफाक रहमान ने कहा कि मुसलमानों की हैसियत उस फुटबॉल की तरह है जिसे इधर से ठोकर मारा तो उधर और उधर से ठोकर मारा तो इधर चला आता है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की यह हालत इसलिए है कि उनकी सियासत का अपना कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं है. इसलिए ऐसे समाज की कोई मंजिल भी नहीं हो सकती इसी लिए वे मात्र मुहरा बन कर रह गये हैं. ऐसी स्थिति के लिए मुस्लिम सियासी, समाजी व मजहबी रहनुमाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए अशफाक रहमान ने कहा कि उन्हें ऐसी हालत पर न कोई बेचैनी है और न ही कोई परेशानी.

अशफाक रहमान ने कहा कि मुसलमानों का समाज वही समाज है जिसकी स्थिति के बारे में सचर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनकी हालत दलितों से भी बुरी है. उन्होंने कहा कि ऐसी हालत के बावजूद मुस्लिम नेतृत्व के कान पर कभी जू तक नहीं रेंगती और मुसलमानों की इस खस्ताहाली के जिम्मेादर दर असल मुस्लम नेतृत्व है.

अपनी सियासत, अपनी कयादत की जरूरत

अशफाक रहमान ने कहा कि देश के कई राज्यों समेत बिहार में अपना नेतृत्व व अपनी राजनीति की शुरुआत अब हुई है और इसी तरह से भविष्य के रास्ते निकलेंगे. हालांकि कुछ लोग ऐसी कोशिशों का समर्थन करने के बजाये टांगखिचाई में लगे हैं. यह हालत सिर्फ मुस्लिम समाज के नेताओं में है. अशफाक रहमान ने कहा कि पिछले दिनों दो प्रतिशत आबादी वाले कौम ने बड़े-बड़े दिग्गजों को अपनी आस्था के अनुकूल  झुका कर रख दिया. यहां तक कि कई बड़े नेता बर्तन धोते हुए देखे गये तो कई नेता झाडू लगाने पर मजूबर हुए. अशफाक रहमान ने सवाल करते हुए पूछा कि क्या आपने मुसलमानों के किसी धार्मिक आयोजन में किसी नेता को झाडू लगाते या बर्तन धोते हुए देखा है? अशफाक रहमान ने कहा कि जब खुद मुसलमान  राजनीतिक नेताओं के आगे हाथ जोड़े खड़े हैं तो उन्हें क्या जरूरत है कि वे मुसलमानों के प्रति इतने संवेदनशील हों. उन्होंने कहा कि हमारे मजहबी संगठन और मजहबी रहनुमा जब खुद  दरबारी सियासत में लगे हैं तो किसी अन्य नेता को क्या जरूरत पड़ी है कि वे मुसलमानों का हाल पूछें.

 

अशफाक रहमान ने कहा कि जब तक मुसलमान आपसी एकता को मजबूत नहीं करते उनकी यह हालत बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि हम ( मुसलमानों) ने  अपनी नैतिक शिक्षा को भुला दिया है. जब तक हम अपनी नैतिकता को मजबूत नहीं करते तब तक हमारी यह हालत रहेगी.

 

 

 

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