2013: रक्षा अनुसंधान में हम कहां थे, कहां आ गये !

2013 जाने को है ऐसे में आइए जानते हैं रक्षा अनुसंधान में भारत ने इस वर्ष क्या प्रगति की और अपनी सेना बीते एक वर्ष में अपनी आक्रमण क्षमता का कितना विस्तार किया है.agni

अग्नि-5 :- भारत ने 15 सितम्बेर को आईआरबीएम अग्नि-5 बैलेस्टिक मिसाइल का 5000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार कने वाला दूसरा सफल परीक्षण करके मिसाइल प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता को दोहराया। इस मिसाइल का डिजाइन डीआरडीओ द्वारा तैयार किया गया था और इसका ओडि़शा तट से दूर हिन्दम महासागर में व्ही्लर द्वीप से प्रक्षेपण किया गया था। यह मिसाइल 5000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्ये को सटीकता से भेदने में सफल रही।

हल्काय लड़ाकू विमान (एलसीए) अंतत:

हिन्दुस्तान ऐरोनोटिक्सस लिमिटेड (एचएएल) द्वारा डीआरडीओ के सहयोग से भारतीय वायुसेना के लिए शुरू की गई बहुप्रतीक्षित स्वसदेशी हल्काक लड़ाकू विमान (एलसीए) परियोजना अतंत: जल्दीक शुरू हो जाएगी। चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान एलसीए ‘तेजस’ का उद्देश्यि भारतीय वायुसेना की बहु-उपयोगी और कठिन आवश्य।कताओं को पूरा करना है और यह उसका अग्रणी बहु-उद्देशीय विमान होगा। डीआरडीओ की मुख्यी प्रयोगशाला एरोनोटिक्सह डेवेलपमेंट एजेंसी (एडीए), जिसका कार्य इस विमान का डिजाइन तथा निर्माण करना है, लड़ाकू विमान तैयार करने के अलावा अब भारतीय वायुसेना के लिए एलसीए पर प्रशिक्षण विमान और एलसीए नौसेना परीक्षण विमान विकसित करने में पूरी तरह जुटा हुआ है।

आईएनएस विक्रांत

भारत ने 12 अगस्तर को कोच्चि में अपने पहले स्वऔदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जलावतरण किया। इससे परियोजना का पहला चरण (आईएसी-1) पूरा हो गया। देश में ही डिजाइन किए गये और बनाये गये इस विमान वाहक के रैंप की क्षमता 37,500 टन है।

एटमिक रिएक्टिर ‘अरिहंत’

भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों ने सर्वाधिक अति आधुनिक परमाणु टेक्नो लॉजी में एक और सफलता प्राप्त की है। उन्होंकने अगस्त के शुरू में आईएनएस अरिहंत पर एक परमाणु रिएक्टमर सफलतापूर्वक सक्रिय किया है। अगली प्रमुख उपलब्धि तब होगी जब अरिहंत अपने परीक्षण शुरू करेगा। कार्यक्रम के अनुसार ये सितम्बलर 2014 में होने हैं। भारतीय नौसेना में शामिल होने से पहले इस परमाणु पनडुब्बी के व्यापक परीक्षण किए जाएंगे।

आईएनएस विक्रमादित्य :

आईएएनएस विक्रमादित्य

आईएएनएस विक्रमादित्य

भारत ने अंतत: 16 नवम्बजर को 44,500 टन भार के अपने दूसरे विमान वाहन वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्या को रूस में सेवरोदविन्क््षण में सेवमाश शिपयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस विमान वाहक के व्याापक आधुनिकीकरण के बाद रक्षा मंत्री श्री ए. के. एंटनी ने इसे नौसेना में शामिल किया। यह विमान वाहक पोत अपने पहले रूप एडमिरल गोर्शकोब में 30 लड़ाकू विमान/‍हेलिकॉप्टनरों को तैनात करा सकता है और 1600 नाविकों तथा अधिकारियों के साथ गहरे समुद्र में लगभग 45 दिन तक रह सकता है। यह विमान वाहक एयर सर्वेलेंस राडारो, एडवान्ड्ं ल इलेक्ट्रॉंनिक वारफेयर हथियारों से लैस है और यह 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक टोह बनाये रख सकता है। इसके विमानों में गहराई तक मार करने वाला घातक मिग-29के विमान, कामोफ-31, सी हैरियर और एएलएच ध्रुव हेलिकॉप्टलर शामिल हैं।

सी-17 ग्लो बमास्टिर तृतीय

भारतीय वायुसेना की दीर्घकालिक सामरिक विमान उड़ान को बढ़ावा देने के सिलसिले में सी-17 ग्लोकबमास्टमर तृतीय को दिल्ली के पास हिडंन हवाई अड्डे पर 2 सितम्बरर को औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। सी-17 श्रेणी के चार विमान भारतीय वायुसेना को पहले ही सौंपे जा चुके हैं और पाँचवाँ विमान हवाई बेड़े में नवम्ब र में शामिल हो गया।

आईएनएस रजाली में पहुंचा बोइंग पी-81

भारतीय नौसेना के लिए तीन बोइ्ंग पी-81 विमानों में से पहला विमान 15 मई को अराकोनम स्थित आईएनएस रजाली में पहुंचा। बोइंग-737-800 (एनजी) विमान ढांचों पर आधारित पी-81 विमान समुद्री टोह, पनडुब्बी–रोधी कार्यों और इलेक्ट्रॉ निक इन्टेिलिजेंस कार्यों के लिए विभिन्नि सेन्सारों से लैस है। इस विमान पर उच्चब क्षमता के एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमैरीन हथियार लगे हैं जो इसकी मारक शक्ति को बढ़ाते हैं।

मिग-29के स्वॉन ड्रन

रक्षा मंत्री श्री ए. के. एंटनी ने गोआ स्थित आईएनएसए हन्साव में 11 मई, 2013 को पहले मिग-29के स्वॉ् ड्रन आईएनएएस 303 को शामिल किया। मिग-29के की गिनती आज इस उपमहाद्वीप के सर्वोत्तेम स्वॉह ड्रनों में की जाती है। यह दृष्टि की परिधि से दूर मार करने वाले मिसाइलों, गाइडिड एयरशिप मिसाइल, बम तथा रॉकेटों वाले उच्च किस्मर के एविऑनिक्सग से लैस है।

जीएसएटी-7 उपग्रह

भारतीय नौसेना के लिए समर्पित संचार उपग्रह जीएसएटी-7 उपग्रह को 30 अगस्तस को छोड़ा गया। इससे नौसेना की स्वलदेशी प्ले ट फार्म पर आधारित नेटवर्क केन्द्रित युद्धक क्षमता को बढ़ावा मिला। इस उपग्रह पर विभिन्नस आवर्ती बैंड के ट्रांसपोन्डरर लगे हैं और यह ध्व नि तथा संचार संबंधी आंकड़ों उपलब्धि कराएगा। इस प्रकार आईओआर पर कार्यरत नौसेना की इकाईयों और विभिन्नध कमान केन्द्रों के बीच समन्वपय स्थापपित करने में सहायता करेगा।

आई एन एस सरयू नौसेना

जहाज परियोजना के अग्रणी जहाज आईएनएस सरयू को 21 जनवरी को नौसेना ने अपने अधिकार में लिया। भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी तथा चौकसी रखे जाने की बढ़ती आवश्यनकता‍ओं को ध्याान में रखते हुए इस जहाज का कार्य ई ई ज़ेड चौकसी, लूट-पाट रोकथाम निगरानी, समुद्री बेड़ा सहयोग अभियान चलाना तथा अपतटीय सम्पीत्ति को तटीय सुरक्षा मुहैया कराने के साथ मूल्यबवान संपत्ति की सुरक्षा करना होगा।

आई एन एस त्रिखंद

रूस के कालीनीग्राद में 29 जून को ‘तलवार श्रेणी’ (तलवार श्रेणी रूस द्वारा भारत के लिए तैयार जहाजी पोत की श्रृंखला है) के अंतिम तीसरे जहाजी पोत आई एन एस त्रिखंड को नौसेना को सौंपा गया। इस जहाजी पोत में नवीनतम लड़ाकू उपकरण हैं जिनमें अत्यआधिक तीव्र ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्रा तंत्र, जमीन से वायु में मार करने वाला आधुनिक प्रक्षेपास्त्र , ए-190 मध्यजम मारक क्षमता वाली गन, 30-एम एम इलेक्ट्रो ऑप्टिकल उपकरण तंत्र, पनडुब्बीत हमला विरोधी उपकरण तथा आधुनिक विद्युतीय युद्ध तंत्र शामिल हैं। इसी श्रृंखला के आईएनएस तेग तथा आई एन एस तरकश को पिछले वर्ष नौसेना में शामिल किया गया था।

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