2017 चुनाव का नया कर्णधार अक्षय यादव: मुलायम से अखिलेश तक जिन पर है भरोसा

2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की कोर ग्रूप का मोर्चा जिन चंद युवा हाथों में होगा उनमें से एक नाम अक्षय यादव का है.

अक्षय यादव: अलग-अलग रूप

अक्षय यादव: अलग-अलग रूप

 

अक्षय यादव नयी पीढ़ी की राजनीति की बारीकियों को बखूबी समझने और विरोधियों को पटखनी देने का चक्रव्यूह रचने वाला एक ऐसा उभरता नाम है जो पिछले दो वर्षों में टीम अखिलेश का भरोसेमंद सिपहसालार के रूप में सामने आया है.

अक्षय यादव राज्य भर में युवाओं के बीच पार्टी की साख को दिन-रात मजबूत बनाने में जुटे हैं.

सभी का विश्वास

अ क्षय ,मुलायम सिंह के भाई राम गोपाल यादव के पुत्र हैं लेकिन अक्षय यादव की यह खूबी ही है कि वह मुलायम परिवार के हर राजनीतिक व्यक्ति का पूरा भरोसा बनाये रखने में सफल रहे हैं. एक तरफ मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक स्नेह उनके साथ है तो दूसरी तरफ अखिलेश उनकी योग्यता के कायल हैं. इसी तरह पिता राम गोपाल अपने बेटे अक्षय की राजनीतिक समझ, संगठन क्षमता और सही समय में सटीक रणनीति बनाने के गुणों से गर्वान्वित रहते हैं तो दूसरी तरफ शिवपाल यादव का भी भरोसेमंद समझे जाते हैं.

जब मुलायम प्रभावित हुए

अपने परिवार के सदस्य के रूप में मुलायम सिंह यादव अक्षय को तो भलिभांति जानते थे, लेकिन उनकी सांगठनिक क्षमता के पहली बार मुलायम तब कायल हुए जब वह(मुलायम) 2007 में भरथाना से विधानसभा चुनाव लड़े थे. यह अक्षय ही थे जिन्होंने बिना किसी से जिम्मेदारी लिए युवाओं की टोली बना कर जनसम्पर्क अभियान में जुटे थे. मुलायम को इसकी जानकारी तब मिली जब वह चुनाव जीत गये और उन्हें बताया गया कि अक्षय ने कितनी मेहनत की है.

अक्षय के इसी समर्पण का नतीजा था कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 में जन्माष्ठमि के दिन अक्षय यादव को फिरोजाबाद का लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया.

 

संक्षिप्त परिचय

मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई राम गोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव अपने करीबियों में सीलू व अक्स नाम से पुकारे जाते हैं.अक्षय ने एमबीए की उपाधि ली है. अक्षय की पत्नी रीचा अहलूवालिया पेशे से होमियोपैथिक डाक्टर हैं.

सामाजिक कार्यों के अलावा अक्षय का सबसे दिलचस्प शगल फोटोग्राफी है. वह खेल प्रबंधन के बचपन से शौकीन रहे हैं. 2012 में उन्होंने मुलायम सिंह खेल समारोह की शुरुआत की थी. 25 अक्टूबर 1986 को जन्मे अक्षय ने 28 साल की उम्र में फिरोजाबाद से 2014 में लोकसभा चुनाव तब जीता था जब पूरे यूपी में भाजपा की लहर थी और बड़े-बड़े गैरभाजपा दलों के महारथियों के पांव उखड़ गये थे.

 

अक्षय की, युवाओं और आम जन में लोकप्रियता के प्रति समाजवादी पार्टी कितनी आश्वस्त रही है इस बात का सुबूत 2014 का लोकसभा चुनाव है जब भारतीय जनता पार्टी के चुनावी तूफान में गैर भाजपा दलों के अनेक दिग्गजों के पांव उखड़ गये लेकिन अक्षय ने संसदीय पॉलिटक्स में एंट्री मारते ही फिरोजबाब लोकसभा सीट से शानदार कामयाबी हासिल की.

एक तरफ कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी 2017 के आसन्न चुनाव के लिए ताल ठोक चुके हैं तो ऐसे में समाजवादी पार्टी भी अपनी व्यापक तैयारियों में जुट चुकी है.

रगों में राजनीति का लहू

जानकार बताते हैं कि इस चुनाव में टीम अखिलेश जिन चुनिंदा युवा कंधों पर सबसे ज्यादा विश्वास कर रही है उनमें से एक अक्षय यादव हैं. अक्षय यादव के बारे में माना जाता है कि उनकी रगों में राजनीति खून बन कर दौड़ती है. 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान एक साक्षात्कार में अक्षय ने कहा भी था कि राजनीति उनको संस्कार में मिली है और वह मात्र 14 वर्ष की उम्र से सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गये थे.

2017 का चुनाव अक्षय के लिए अपनी योग्यता प्रमाणित करने का एक सुनहरा अवसर भी है और एक गंभीर चुनौती भी. अवसर इस लिए कि पार्टी उन पर काफी भरोसा कर रही है और चुनौती इसलिए कि  पिछले पांच सालों की अखिलेश सरकार पर एंटी इंकम्बेसी फैक्टर से वह कैसे निपटते हैं. सच मानें तो अक्षय की अग्नि परीक्षा अब शुरू हो चुकी है.

 

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