40 हजार पुलिसकर्मियों की नौकरी से बेदखली का परवाना जारी

50 वर्षवाले 40 हजार पुलिसकर्मियों की नौकरी पर लटकी तलवार

गृह विभाग के एक आदेश से विभिन्न जिलोॆं में कार्यरत 50 वर्ष से अधिक उम्रवाले 40 हजार पुलिसकर्मियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है।

कुमार अनिल

पिछले साल 23 जुलाई को बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक संकल्प जारी किया था, जिसमें ऐसे सरकारी सेवक जिनकी उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो गई है, उनकी दक्षता और आचार का मूल्यांकन करते हुए ऐसे कर्मियों को नौकरी से जबरन रिटायर करने का आदेश दिया गया था। अब गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने उसी संकल्प के आधार पर आदेश जारी करते हुए अलग-अलग समितियां भी बना दी हैं, जो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए सुझाव देगी।

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) के सम्मानित अध्यक्ष रामबली सिंह ने बताया कि पिछले साल जुलाई में आदेश पारित होने के बाद से ही सारे कर्मचारी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्विस रूल में एक नया शब्द जोड़ दिया गया है-निष्ठा। निष्ठा को किस प्रकार परिभाषित किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है।

रामबली सिंह ने कहा कि सरकार के इस आदेश से 40 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है।

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गृह विभाग ने अपने आदेश में अलग-अलग समूह के कर्मियों के लिए अलग-अलग समितियां बनाई हैं। समूह ‘क’ के सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की समीक्षा के लिए समिति में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (अध्यक्ष), सचिव गृह विभाग (सदस्य), विशेष सचिव, गृह विभाग (सदस्य), विभागीय मुख्य निगरानी पदाधिकारी (सदस्य)।

50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मियों की नौकरी पर खतरे को इस बात से भी समझा जा सकता है कि समिति हर छह महीने में सभी कर्मियों के कार्यकलाप की समीक्षा करेगी। अगर समिति ने माना कि किसी कर्मी की कार्यक्षमता या आचार ऐसा नहीं है कि उसे सेवा में बनाए रखना न्याय हो, तो उसे सेवानिवृत्त करने की अनुशंसा की जा सकती है। आदेश से इस बात की विस्तृत जानकारी नहीं मिलती है कि किसी कर्मी की कार्यक्षमता या उसके आचार का मूल्यांकन किन बातों के आधार पर किया जाएगा।

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