54 वर्षों से सुन रहे हैं, ‘ये आकाशवाणी पटना है’

तब न अखबार दूर दराज पहुंचते थे और न न्यूज चैनलों का वजूद था, कोने कोन में आकाशवाणी की खबरें तबभी गूंजती थी और अब भी जारी है. संजय कुमार से सुनिये समाचार की दिलचस्प कहानीradio

वर्ष 1959, तारीख28 दिसम्बर, स्थान आकाशवाणी पटना का मुख्य स्टूडियो और माइक के सामने बैठे रामरेणु गुप्त की नजर माइक के ठीक ऊपर, सामने लगी घड़ी व लाल रंग के बल्ब पर..ज्योंहि समय ठीक शाम के सात बजकर पांच मिनट हुए लाल बल्ब जल उठा और उन्होंने फिडर को आन करते हुए कहा- “ये आकाशवाणी पटना है अब आप रामरेणु गुप्त से प्रादेशिक समाचार सुनिये”.

तब पिछले 54 सालों से आज तक यह गूँज बिना रूके थके जारी है।

झारखंड बनने के बाद

हालांकि बिहार बंटवारे के पहले तक आकाशवाणी पटना से “ये आकाशवाणी का पटना, रांची, भागलपुर, दरभंगा केंद्र है” की गूंज सुनाई पड़ती थी।, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद यह गूंज बंद हो गई। अब ”ये आकाशवाणी का पटना केंद्र है”, सुनाई पड़ती है।

बिहार में इलेक्ट्रोनिक मीडिया के नाम पर शुरूआती दौर में केवल आकाशवाणी ही था। बिहार की जनता को सूचना देने, शिक्षित व मनोरंजन करने के उद्देष्य के मद्देनजर आकाशवाणी पटना केन्द्र का उद्घाटन 26 जनवरी 1948 को हुआ था। वहीं, दूरदर्शन का बिहार में विस्तार काफी बाद में हुआ। आज भले ही खबरिया चैनलों की बाढ़ आ गई हो, निजी रेडियो चैनल भी बिहार की जनता का मनोरंजन करने यहां की घरती पर कदम रख चुके है। इन सबके बावजूद आकाशवाणी की पहुंच जो वर्षो पूर्व थी, वह आज भी बरकरार है। कहते है जहां अखबार टी.वी. नहीं पहुंचता यानी, अंतिम कतार में खड़े सुदूर इलाकों की जनता तक आकाशवाणी पहुंचता है।

पटना के प्रादेशिक समाचार का अपना स्वर्णिम इतिहास रहा है। सीमित साधनों लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते लम्बा संघर्ष किया है। आज प्रादेशिक समाचार प्रसारण का 54 वर्ष ( 28 दिसम्बर, 2009 को ) पूरा हो गया है। जिस ईमानदारी के साथ गुरूदत्त विद्यालंकार, रामरेणु गुप्त व रवि रंजन सिन्हा ने आकाशवाणी समाचार से बिहार की जनता को जोड़ने का काम शुरू किया था, उसे पूरी ईमानदारी के साथ उनके बाद एकांश से जुड़े संपादकों एवं संवाददाताओं ने भी किया बल्कि आज भी कर रहे है। प्रादेशिक समाचार आकाशवाणी, पटना की जब शुरूआत हुई तब इसके प्रभारी के रूप में सहायक समाचार संपादक गुरूदत्त विद्यालंकार आए।

शुरूआती दौर में केवल शाम 7.05 पर पांच मिनट का समाचार बुलेटिन का प्रसारण होता था। बाद में समय बदल कर शाम 7.30 बजे कर दिया गया। साथ ही इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसके समय में बढोत्तरी कर दी गई पांच से दस मिनट का समाचार बुलेटिन कर दिया गया।

मीडिया के कोई और माध्यम के नहीं होने से रेडियो समाचार की अहमियत काफी बढ़ गई। दस मिनट के समाचार से काम नहीं बनता देख 10 अप्रैल 1978 से इसमें दोपहर 3.10 बजे हिन्दी में 5 मिनट का एक और बुलेटिन प्रसारित किया जाने लगा।

उर्दू बुलेटिन की शुरूआत

उर्दू भाषी जनता के लिए 16 अप्रैल1989 से दोपहर 3.15 बजे 5 मिनट की अवधि का उर्दू समाचार बुलेटिन ‘‘इलाकाई खबरें’’ के शुरू होने से बिहार के उर्दू भाषी श्रोता इससे जुड़े।
बिहार, जहां विभिन्न भाषाओं को बोलने वालों की संख्या काफी तादाद में है, ऐसे में उर्दू समाचार की मांग बलवती हुई और उर्दू भाषी आबादी को देखते हुए 16 अप्रैल 1989 से दोपहर में ही 3.15 पर, पांच मिनट पर उर्दू समाचार बुलेटिन ‘इलाकाई खबरें’ प्रसारित की जाने लगी। हिन्दी के बाद उर्दू और उर्दू के बाद उत्तर बिहार में बोली जाने वाली मैथिली भाषा में भी समाचार बुलेटिन की शुरूआत की गई।

मैथिली

इसी तरह वर्ष 1993 में 2 अक्टूबर से सप्ताह में तीन बार मैथिली में ‘‘संवाद’’ समाचार बुलेटिन तैयार किया जाने लगा, जिसका प्रसारण मैथिली भाषियों के लिए आकाशवाणी के दरभंगा केन्द्र से किया जाता है। 16 अगस्त 2003 से मैथिली में समाचार ‘‘संवाद’’ रोजाना संध्या 6.15 बजे प्रसारित होने लगा। वहीं वर्ष 1992 से ही सप्ताह में एक बार हर शनिवार को रात्रि 8.00 बजे समसामयिक विषयों पर आधारित समीक्षात्मक वार्ता कार्यक्रम ‘सामयिक चर्चा’ का प्रसारण होने लगा। ‘सामयिक चर्चा के दौरान बिहार के समसामयिक विषयों पर पत्रकारों तथा विशेषज्ञों से आलेख लिखवाया जाता रहा है।

समीक्षात्मक वार्ता

आकाशवाणी पटना के समाचार एकांश से विधान मंडल की समीक्षात्मक वार्ता, रात्रि 8.20 बजे से विधान मंडल सत्र के दौरान प्रसारित किया जाता है। विधान मंडल की समीक्षा, विधान सभा एवं विधान परिषद् में दैनिक समाचार पत्रों के वरिष्ठ पत्रकारों से लिखवाई जाती है।

समसामयिक विषयों पर आधारित ‘सामयिक चर्चा और विधान मंडल सत्र के दौरान समीक्षा को श्रोता बडे़ ही चाव से सुनते हैं। प्रादेशिक समाचार की तरह ही इसके श्रोताओं की अच्छी खासी संख्या है। वर्ष 2006 से दो मिनट का प्रमुख समाचारों का बुलेटिन प्रसारण सुबह 10.30, 11.30 और संध्या 6.30 बजे ‘‘एफ एम चैनल’’ पर किया जाने लगा। आकाशवाणी, पटना से प्रसारित होने वाले प्रमुख समाचार बुलेटिनों में सुबह 8.30 बजे 10 मिनट का समाचार बुलेटिन भी शुमार है। प्रादेशिक समाचार अपनी सहजता व तेवर को लेकर दिनों-दिन लोकप्रिय होता जा रहा था।

मैथिली भाषा में ‘संवाद’ नाम से समाचार बुलेटिन का प्रसारण 2 अक्टूबर 1993 से सप्ताह में तीन बार मैथिली भाषियों के लिए शुरू किया गया। प्रादेशिक समाचार एकांश, पटना द्वारा मैथिली में समाचार बुलेटिन तैयार कर इसका प्रसारण दरभंगा केन्द्र से किया जाने लगा। आज यह रोज नियमित रूप से प्रसारित किया जाता है। आकाशवाणी, पटना का समाचार कक्ष आज अत्याधुनिक संचार उपकरणों से लैस हो चुका है। वर्ष 2008 से यह पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत हो चुका है।

लेखक आकाशवाणी पटना में समाचार सम्पादक हैं

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