Advantage Literary Festival ने इंटरनेशनल ई मुशायरा का सफल आयोजन कर बनायी बड़ी पहचान

Advantage literary Festival के तहत दो दिनों के ई मुशायरे में मुनव्वर राणा, शबीना अदीब और अमेरिकी शायर फरहत शहजाद समेत अनेक शायरों ने लोगों के दिलों पर घंटों राज किया.

munawwar rana
munawwar rana समेत अनेक शायर होंगे शामिल

दो दिवसीय एडवांटेज इंटरनेशनल ई.मुशायरा 31 मई को एडवांटेज लिटरेरी फेस्टिवल और अदबी संगमए नई दिल्ली के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म जूम पर आयोजित हुआ। अंतर्राष्ट्रीय कविताओं के इस दूसरे दिन में ए मंसूर उस्मानी की अध्यक्षता में मुनव्वर राना,शारिक केफी,शबीना अदीब,एएम तराज़, सैयद सरोश आसिफ और अनस फैज़ी ने दर्शकों से वाह वाही लूटी.

एडवांटेज लिटरेरी फेस्टिवल और अदबी संगमए नई दिल्ली द्वारा आयोजितए दो दिवसीय कविता उत्सव ऐतिहासिक साबित हुआ।उस्ताद कवियों ने ज़ूम प्लेटफॉर्म पर पूरी दुनिया में उर्दू प्रशंसकों का दिल जीता। ज़ूम प्लेटफॉर्म पर आयोजित मुशायरे को न केवल दुनिया भर में देखा गया बल्कि शायरों को लाइव वह-वाही मिली.

एडवांटेज इंटरनेशनल ई.मुशायरा एडवांटेज सपोर्ट के अध्यक्ष और प्रसिद्ध सर्जन डॉ ए ए हई द्वारा स्वागत भाषण के साथ शुरू हुआ। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि हम सभी जानते हैं कि इस कोरोना के युग में दुनिया एक कठिन समय से गुजर रही है। इतने सारे माहिर कवि दूर.दूर से इस मंच पर एकत्र हुए हैं। उन्हों ने कोरों पर एक शेर कहा –

कोरोना यह नहीं समझे कि पस्त हैं हम । शिकस्ता होके भी नाक़ाबिल शिकस्त हैं हम ।

उन्हों ने कहा की उर्दू कविता का अजीमाबाद के साथ एक लंबा संबंध है। लखनऊए दिल्ली और हैदराबाद के साथ.साथ अजीमाबाद भी इस मामले में भारी रहा है। उन्होंने बिस्मल अज़ीमाबादीए शाद अज़ीमाबादीए अल्लामा जमील मज़ारी और डॉ। कलीम आज़िज़ की काव्य सेवाओं को उर्दू भाषा और साहित्य की एक बड़ी संपत्ति बताया।

संचालक अनस फ़ैज़ी ने अलग अंदाज़ में इस शानदार एडवांटेज इ मुशायरा की निज़ामत करते हुए सब से पहले अपना हास्य रचना प्रस्तुत किया जिससे श्रोता शुरू में प्रफुलित हुए.

फ़ैज़ी ने कुछ इस तरह कहा कि- हर तरफ डंका बजेगा बस तुम्हारे नाम का भीड़ में इन शायरो के खुद को आगे पाओगे रात बेगम कह रही थी चूम कर टकला मेरा देख लेना तुम भी अब पॉपुलर हो जाओगे

M Turaz

मुनव्वर राणा ने दो लाइनें इस तरह कहीं कि तुम इसकी लाशों को न देखो हिकारत से, ये शख्स पहले अमीरों के घर बनाता था।

जमाने से बचा लाये तो उसको मौत ने छीना। मोहब्बत इस तरह पहले कभी हारी नहीं होगी।

उन्होंने एक शेर पढ़ा-

न मैं कंघी, न चोटी बेचता हूं। मुझे इस शहर की सब लड़कियां आदाब करती है मैं बच्चों की कलाई पर बांधने वाली राखी बनाता हूं।

अबुधाबी के प्रसिद्ध शायर सैयद सरोष आसिफ ने कहा कि-

ऐसा भी हो सकता है। अम्बर भी नीला-नीला और दरिया भी नीला-नीला दिखता है। इन दोनों ने जहर पीया है, ऐसा भी हो सकता है।

उसके हाथ में गुब्बारे थे, फिर भी बच्चा गुमसुम था।

वो गुब्बारे बेच रहा हो ऐसा भी हो सकता है।

ये ही बच्चे इमामत भी करेंगे, जो मस्जिद में शरारत करते हैं।

उन्होंने कोरोना के चलते लाॅकडाउन में श्रमिकों की हालत पर खूब चर्चा की। उन्होंने कहा कि- कोई खुदा की तरफ है, कोई खुदी की तरफ/ नजर कोई नहीं आता आदमी की तरफ

बाॅलीवुड गीतकार, शायर ए.एम. तुराज ने कहा-

सीखने की कोशीश करता हूं। मेरे ख्याल से अपना गुमान ले जाओ,

शादिना अदीब ने कहा जहां हो प्यार वहां कोई गम नहीं होता। बिछड़ के दोनों को इस बात का यकीन हुआ कि दूर रहने से भी प्यार कम नहीं होता।

शरीक कैफी ने कहा-

घर अकेला हो तो गुनगुना सकता हूं। इशक में तू जान देने की जिद्द छोड़, रोज तुमको खुदकसही करना सिखा सकता हूं। तूम से बढ़कर दुनिया में मेरा कौन नजदीकी है, एक तुम्हीं तो हो जिसका दिल दुखा सकता हूं।

Anas faizi

प्रसिद्ध षायर मंसूर उस्मानी ने कहा-

कितने चेहरे थे उसके चेहरे पर, आईना तंग आकर टूट गया, कोई हंस के, हंसाते टूट गया। हर रोज नई तरह से गम टूट रहे हैं, इस जुल्म को लिखने में उनके भ्रम टूट रहे हैं।

मुशायरा की शुरुआत एडवांटेज सपोर्ट के अध्यक्ष डाॅ. ए.ए. हई के खैरमकदम क्र तक़रीर से हुआ। इस मौके पर एडवांटेज सपोर्ट के सचिव खुर्शीद अहमद ने कहा कि कोरोना को लेकर लाॅकडाउन के दौरान एडवांटेज लिटरेरी फेस्टिवल का चैथा एपिसोड सभागार में संभव नहीं था इसलिए हमने डिजिटल प्लेटफार्म जूम पर आयोजित करने का फैसला किया. हालानी शुरू में हमें कुछ संशय था लेकिन ज़ूम पर लोगों ने इस मुशायरे को जितना सराहा उस से हमारा हौसला काफी बाधा है.

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