अमित शाह बोले 1947 के पहले भी था लोकतंत्र, उठे ये सवाल

अमित शाह बोले 1947 के पहले भी था लोकतंत्र, उठे ये सवाल

आजादी के अमृत महोत्सव से नेहरू का फोटो गायब करने के बाद अब अमित शाह ने कहा-1950 और 1947 के पहले भी था लोकतंत्र। शाह ने ऐसा क्यों कहा और क्या उठे सवाल?

हाल में भारत सरकार के शोध संस्थान भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी पोस्टर से नेहरू को गायब कर दिया। उस पर अभी चर्चा चल ही रही है कि आज देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 1950 में संविधान लागू करने तथा 1947 में आजादी मिलने के पहले भी भारत में लोकतंत्र था। उनके ऐसा कहते ही लोगों ने सवालों की बौछार कर दी है। पूछा जा रहा है कि अगर 1947 से पहले भी लोकतंत्र था, तो गांधी, भगत सिंह क्यों जेल गए, क्यों फांसी पर चढ़े? 1950 में संविधान लागू करने से पहले भी लोकतंत्र था तो देश ने दो साल 11 महीने में संविधान क्यों बनया?

गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद अनेक सवाल उठ रहे हैं। क्या वे अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए चले लंबे संघर्ष का महत्व कम करना चाहते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में आरएसएस शामिल नहीं था? आइए, पहले अमित शाह का पूरा बयान देखें, फिर सवालों की चर्चा करेंगे।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार अमित शाह ने कहा कि लोकतंत्र हमारे देश की प्रकृति में है। अगर कोई कहता है कि 1947 में अंग्रेजों के जाने और 1950 में संविधान लागू करने के बाद ही देश में लोकतंत्र आयास, तो वह गलत है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भी गांवों में पंच परमेश्वर थे। हजारों साल पहले द्वारिका में यादव गणतंत्र था, बिहार में था। इसीलिए लोतकंत्र देश की प्रकृति में रहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान का फोटो लगाते हुए सिर्फ एक शब्द कहा-ridiculous (हास्यास्पद)।

कांग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक गौरव पांधी ने कहा-सावरकर ने ब्रिटिश हुकूमत के आगे माफी मांगने का लिबर्टी ली। फिर अंग्रेजों से पेंशन पाते रहे। इसीलिए भाजपा और आरएसएस के दिमाग में यह स्थापित है कि आजादी और लोकतंत्र 1947 के पहले भी था। उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि भगत सिंह सहित लाखों लोगों ने क्यों कुरबानी दी! क्यों फांसी पर चढ़ गए, ये भाजपावाले समझ ही नहीं सकते। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा आप कभी आजादी के आंदोलन को समझ नहीं पाएंगे, क्योंकि तब आप अंग्रजों की मुखबरी कर रहे थे। वो आदत आज भी बनी हुई है।

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने कहा- तो अमित शाह के कहने का मतलब है कि अंग्रेजी हुकूमत लोकतांत्रित थी!

ज्ञानेंद्र कुमार झा ने कहा-कोई तड़ीपार को बताए कि पंच परमेश्वर को लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत नहीं चुना जाता था। लोकतंत्र को स्थापित करने में, संविधान को बनाने में जिनका कोई योगदान नहीं वो ज्ञान दे रहा है।

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विनोद वर्मा ने कहा-1947 से पहले देश में 562 रियासतें थीं, जिन्हें नेहरू और पटेल ने भारत के साथ जोड़ा। क्या वे सभी लोकतांत्रित थे ?

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