एएन सिन्हा इंस्टिच्यूट में निदेशक नियुक्ति-क्या धोखाधड़ी की है तैयारी

एएन सिन्हा इंस्टिच्यूट में निदेशक नियुक्ति- दाला में काला तो नहीं

एएन सिन्हा इंस्टिच्यूट में निदेशक नियुक्ति-क्या धोखाधड़ी की है तैयारी

पटना के एएन सिन्हा इंस्टिच्यूट में दस दिसम्बर को निदेशक नियुक्ति के लिए स्क्रिनिंग कमेटी की बैठक है. इससे पहले दो बार नियुक्ति प्रक्रिया रद्द की जा चुकी है.

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ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या किसी चहेते को पद पर बिठाने के लिए इस से पहले नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम समय में दो बार रद्द कर दी गयी?

गौरतलब है कि बिहार के प्रतिष्ठित AN Singha Institute of Social Studies में 2018 से स्थाई निदेशक का पद खाली है. इससे पहले नियुक्ति की प्रक्रिया 19 जुलाई 2021 को अचानक रद्द करने की घोषणा कर दी गयी. इस नोटिफिकेशन में बताया गया कि हिंदुस्तान अखबार में एक अगस्त 2020 को निदेशक पद की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक 5 जुलाई 2021 को हुई जिसमें इस विज्ञापन को रद्द करने का फैसला लिया गया. यह फैसला नियुक्ति नियम में बदलाव के मद्देनजर लिया गया.

जब की नौकरशाही डॉट कॉम को पता चला है कि करीब एक साल से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में थी. और स्क्रिनिंग कमेटी ने अंतिम रूप से तीन नामों को चयन भी कर लिया था. इन तीन नामों में से इंस्टिच्यूट के चेयरमैन को किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगानी थी. लेकिन ऐन उससे पहले नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया.

ऐसे में सवाल उठता है कि नियुक्ति प्रक्रिया जब अंतिम चरण में थी तो अचानक नियुक्ति नियम में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी.

बता दें कि 24 अगस्त 2021 को इंस्टिच्यूट की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया. इसमें बताया गया है कि 5 जुलाई 2021 की बोर्ड ऑफ कंट्रोल की मीटिंग में इंस्टिच्यूट के निदेशक पद के लिए उम्र सीमा बढ़ा कर 70 वर्ष कर दी गयी है.

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि पहले से निदेशक पद के लिए 65 वर्ष उम्र सीमा थी. इस उम्र सीमा को बढ़ाने की जरूरत अचानक क्यों पड़ी? जबकि नियुक्ति प्रक्रिया जारी थी. क्या किसी चहेते को, जिसकी उम्र 65 वर्ष से ज्यादा हो, उसे पद पर बिठाने के लिए तो नियमों में परिवर्तन नहीं किया गया.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछली बार जो तीन नाम तय किये गये थे उनमें से एक महत्वपूर्ण नाम दलित वर्ग के एक अभ्यर्थी का था. यह याद रखने की बात है कि 1958 में एएन सिन्हा इंस्टिच्यूट ऑफ सोशल स्टडीज की स्थापना से ले कर अब तक किसी दलित या पिछड़े का चयन निदेशक पद पर नहीं हुआ है.

इस संबंध में नौकरशाही डॉट कॉम के पास अनेक दस्तावेजी सुबूत हैं. हमारी टीम इस पर काम कर रही है. हम जल्द ही इस मामले में कुछ और तथ्यों को उजागर करेंगे.

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लेकिन हैरत की बात यह है कि इससे पहले कम से कम दो बार नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम समय में रद्द कर दिया गया.

नौकरशाही डॉट कॉम को पटना का एएन सिंहा इंस्टिच्यूट में निदेशक पद पर नियुक्ति की फाइनल स्क्रिनिंग 10 दिसम्बर को होने वाली है. नौकरशाही डॉट कॉम को पता चला है कि इससे पहले फाइनल नियुक्ति को दो बार रद्द कर दिया गया है.

लेकिन इससे पहले कम से कम दो बार फाइनल नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है.

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