Anti-Incumbency से डरी BJP ने गुजरात में 99 में 38 के टिकट काटे

Anti-Incumbency से डरी BJP ने गुजरात में 99 में 38 के टिकट काटे

गुजरात में भाजपा की हालत कितनी पतली है, इसका अंदाजा इसी से लग रहा है कि उसने 99 में 38 विधायकों के टिकट काट दिए हैं। यह संख्या बढ़ेगी।

भाजपा गुजरात में Anti-Incumbency से डरी हुई है। गुरुवार को BJP ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 160 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। राज्य में कुल 182 सीटें हैं। इसका अर्थ है कि पार्टी अभी 22 प्रत्याशियों के नाम आगे घोषित करेगी। उसमें भी कई विधायकों के टिकट कटेंगे। टिकट कटने वाले विधायकों की संख्या 45 तक जा सकती है। भाजपा के कुल 99 विधायक हैं।

और तो और भाजपा ने अपने पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व उपमुख्यमंत्री के टिकट भी काट दिए हैं। भाजपा की हालत कितनी खराब है उसका उदाहरण है कि पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को बेटिकट कर दिया गया है। भाजपा ने कहा कि रुपाणी ने खुद ही पत्र लिखकर कहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी पत्र लिखकर चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। भाजपा के बड़े नेता भूपेंद्र सिंह ने भी पत्र लिखकर टिकट नहीं दिए जाने का आग्रह किया है। भाजपा शायद देश की पहली पार्टी है, जिसके बड़े नेता कह रहे हैं कि उन्हें टिकट नहीं दिया जाए। अगर भाजपा सच बोल रही है, तो इसका अर्थ है कि पत्र लिखनेवाले विधायकों को लगता है कि वे चुनाव नहीं जीत सकते। अगर भाजपा ने जबरन पत्र लिखवाया, तो भी साफ है कि उसे लगता है कि बड़े नेता पूर्व सीएम चुनाव जीतने में सक्षम नहीं हैं।

अब तक हिमाचल में भाजपा जबरदस्त Anti-Incumbency का सामना कर रही थी। मीडिया गुजरात को ऐसे दिखा रहा था, जैसे वहां भाजपा आसानी से चुनाव जीत रही है। लेकिन टिकट बंटवारे में जित तरह पुराने विधायकों के टिकट थोक में काटे जा रहे हैं, नेता चुनाव लड़ने से मना कर रहे हैं, उससे साफ है कि भाजपा की हालत हिमाचल जैसी ही खराब है।

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