बिहार में Owaisi ने खोला खाता, सन्न रह गयीं बड़ी पार्टियां, बदल सकता है समीकरण

बिहार में Owaisi ने खोला खाता, सन्न रह गयीं बड़ी पार्टियां, बदल सकता है समीकरण

किशनगंज में खाता खोल कर ओवैसी बदलने को तैयार हैं बिहार का सियासी समीकरण

उपचुनाव में  Owaisi की पार्टी  AIMIM ने अपना खाता खोल कर यह जता दिया है कि बिहार की सियासी समीकरण पर वह मजबूत प्रभाव डालने को तैयार हैं.

किशनगंज विधानसभा सीट से  Asaduddin Owaisi की पार्टी  AIMIM के उम्मीदवार कमरुल होदा Qamrul Hoda ने भाजपा की स्वीटी सिंह को हरा दिया है. यह सीट कांग्रेस के खाते में लगातार पिछले चार चुनावों से जा रही थी. लेकिन इस बार मोहम्मद जावेद लोकसभा में पहुंच गये तो उस सीट पर हुए चुनाव में उनकी मां चुनाव हार गयीं.

2019 लोकसभा चुनाव में ही AIMIM ने कांग्रेस उम्मीदवार को मजबूत चुनौती दी थी. तब एआईएमआईएम को यहां 2 लाख 95 हजार 29 वोट आए जो कुल वोट का 26.78 प्रतिशत था. जबकि, कांग्रेस को 3 लाख 67 हजार 17 वोट आया जो 33.32 प्रतिशत था. जहां तक जेडीयू  की बात है तो उको 3 लाख 32 हजार 551 वोट आया, जो कुल वोट का 30.19 फीसदी वोट मिले थे.

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लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी ओवैसी की पार्टी को कोचाधामन में लीड मिली थी. उनके उम्मीदवार को 6824, जेडीयू  को 38,721 और कांग्रेस को 36,984 वोट मिले थे. इसी तरह बहादुरगंज में भी  एआईएमआईएम को 67,625, जेडीयू को 52,486 और कांग्रेस को 44,492 वोट मिले थे.

AIMIM ने बिहार में जड़ें जमा कर सेक्युलर दलों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर दी है. बिहार में मुस्लिम वोट 18 प्रतिशत के करीब है. किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा आदि जिलों में करीब 20 ऐसी सीटें हैं जहां इसके उम्मीदवार राजद व कांग्रेस के लिए भारी चुनौती पेश कर सकती है.

अब अगले ही साल बिहार में विधानसभा चुनाव होना है. ओवैसी की पार्टी की इस जीत ने सेक्युलर दलों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे इस बात पर फैसला लें कि पूरे बिहार में वे ओवैसी की पार्टी को गठबंधन का हिस्सा बनायें. अगर ओवैसी गठबंधन का हिस्सा बन जाते हैं तो ऐसी स्थिति में मुस्लिम वोटों का विखराव रोका जा सकता है.

 

 

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