मसलक की बुनियाद पर मुसलमानों में एकता कत्तई संभव नहीं: अशफाक रहमान

मसलक की बुनियाद पर मुसलमानों में एकता कत्तई संभव नहीं: अशफाक रहमान

 

जनता दल राष्ट्रवादी (JDR) ने मौजूदा हालात के पेशे नजर मुसलमानों की एकता पर जोर दिया है लेकिन मसलक की बुनियाद पर एकता को खारिज कर दिया है.

JDR के राष्ट्रीय कंवेनर अशफाक रहमान का साफ कहना है कि  इस्लाम में मसलक का कोई वजूद नहीं है.

उन्होंने साफ कहा कि इस्लाम में मसलक का ना तो कोई उल्लेख है और ना ही पैगम्बर साहब ने ही कोई ऐसी बात कही है. उन्होंने कहा कि जब दीन को  पैगम्बर ए इस्लाम ने मुकम्मल कर दिया तो मसलक की कल्पना भी अर्थहीन है.

अशफाक रहमान ने कहा कि मसलक दरअसल अपनी-अपनी दुकानदारी चमकाना है. उन्होंने कहा कि कुछ उलेमा यह कहते पाये जाते हैं कि अपने-अपने मसलक पर कायम रहते हुए मुसलमानों को एकता की पहल करने की बात बिल्कुल हजम नहीं होती.

मसलक से पड़ती है फूट

उन्होंने कहा कि मसलक को दरकिनार कर चार दिन के लिए सर जोड़ कर तो बैठा जा सकता है लेकिन पांचवें दिन फूट पड़ जायेगी. कोलकाता में हाल ही में यह बात प्रमाणित भी हो गयी है. वहां एक मसलक के उलेमा ने ऐसी ही एक पहल से खुद को अलग कर लिया है.

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इस तरह की हरकत से मायूसी हुई है. अशफाक रहमान ने सवाल उठाया है कि आपसी मतभिन्नता के बीच एकता कैसे संभव हो सकती है?

अशफाक रहमान ने कहा है कि वैचारिक विरोध के बावजूद एकता तो संभव है लेकिन मसलकी विरोध के साथ एकता की बुनियाद कभी मजबूत नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि जब दीन में मसलक का वजूद नहीं है तो एकता के लिए थोड़ी देर के लिए मसलक को अलग करने का सवाल कहां से आ गया. अशफाक रहमान ने कहा कि मसलक पर चलते हुए एकता की बात करना फरेब है. मतलब कि सबके दिलों में खोट है और एकता के पीछे कोई छिपा हुआ एजेंडा भी हो सकता है.

उन्होंने कहा कि दो चार दाढ़ी टोपी वाले एक साथ बैठ जायेंगे और लालू, ममता,नीतीश, राहुल या नरेंद्र मोदी की गोद में खुद बैठ जायेंगे और कौम को बेच डालेंगे. अशफाक रहमान ने याद दिलाया कि दीन बचाओ, देश बचाओ के दौरान क्या हुआ. ना दीन बच सका ना देश. तीन तलाक का सख्त कानून बन गया जोो शरिअत पर जोरदार हमला है.

बेबस हैं उलेमा

अशफाक रहमान ने कहा कि देश में भी अफरातफरी  फैली है इस पर भी उलेमा बेबस हैं. उन्होंने कहा कि  मसलकी बुनियाद पर की गयी एकता का यही हस्र होता है. दीन बचाओ देश बचाओ ऐतिहासिक रैली बुला कर जहां खुद अपनी लीडरशिप मजबूत करनी थी वहीं एक शागिर्द को  आगे करने या शागिर्द के आगे बढ़ जाने से पूरी कौम का स्वाभिमान दाव पर लग गया.

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अशफाक रहमान ने कहा कि हमारे उलेमा कभी  जमीनी नेतृत्व को उभरने या आगे नहीं होने देते. इसकी वजह यह है कि वे खुद मेहनत करने से कतराते हैं. ऐसे में कौम को मेहनत करने की शिक्षा कैसे दे सकते हैं.

अशफाक रहमा ने कहा कि आज तक कोई उलेमा चुनाव लड़ कर लोकसभा नहीं पहुंचा बल्कि चोर दरवाजे से राज्यसभा या विधान परिषद का सदस्य बनते हैं. अशफाक रहमान ने ऐसे उलेमा के बारे में कहा कि वे मजहब की आड़ में मजहब का तिजारत करने वाले लोग हैं.

अशफाक रहमान ने ऐसे उलेमा के बारे में कहा कि जो खुद सच्चाई की राह पर नहीं हैं वे कैसी कौम के लोगों को सच्चाई के रास्ते पर चलने की शिक्षा दे सकते हैं.

एक ही इमाम को मानते हैं फिर भी आपसी विरोध

अशफाक रहमान ने कहा कि भारत में दो मसलक के लोग एक ही इमाम अबू हनीफा को मानते हैं. जबकि बरैलवी और देवबंदी में इतने शिद्दत का विरोधाभास है. उन्होंने कहा कि इत्तेहाद इस्लाम की बुनियाद है. मसलक की बुनियाद पर इत्तेहाद गलत है. उन्होंने कहा कि इस्लामी इतिहास में मसलक की बुनियाद पर कोई भी इत्तेहाद की मिसाल नहीं मिलती.

 

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अशफाक रहमान ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह कितनी अजीब बात है कि हम अल्लाह को तो मानते हैं लेकिन अल्लाह की (बातों को) नहीं मानते. उसी तरह हम रसूल को तो मानते हैं पर रसूल की नहीं मानते. इसी तरह हम कुरान को तो जरूर मानते हैं लेकिन कुरान की नहीं मानते और ये सब मसलक में उलझने का परिणाम है. उन्होंने कहा कि हम मजहबी उलेमा को मानने लगे हैं तो फिर अल्लाह के नाम पर एकता कैसे संभव है.

 

 

 

 

 

 

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