असम, कश्मीर पर गरजनेवाले केजरीवाल जंतर-मंतर पर चुप क्यों

असम, कश्मीर पर गरजनेवाले केजरीवाल जंतर-मंतर पर चुप क्यों

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुस्लिमों के खिलाफ खुलेआम हिंसा भड़काने वाले नारे लगे, भाषण हुए, पर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक शब्द नहीं कहा। क्यों?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। तीन दिन पहले 8 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर खुलेआम मुस्लिमों के खिलाफ नारे लगे। हिंसा भड़कानेवाले नारे और भाषण दिए गए। वीडियो नायरल हुआ, जिसमें एक भाजपा नेता भी साफ दिख रहे हैं। दूसरे दिन पत्रकारों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को शांति का नारा लगाने से रोका गया। इतनी बड़ी घटना के बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुप रहे।

अरविंद केजरीवाल जेएनयू, जामिया और शाहीनबाग मामले पर भी चुप रहे थे। आखिर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने की कोशिशों के विरोध से क्यों डरते हैं केजरीवाल। आप समर्थक सोशल मीडिया पर कह रहे हैं कि दिल्ली पुलिस केजरीवाल के अधीन नहीं है। इस पर सोशल मीडिया में लोगों ने सवालों की बौछार कर दी। पूछा कि केजरीवाल कश्मीर में आतंकी हमले के बाद केंद्र से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं। असम में शरजील को तुरत गिरफ्तार करने की मांग गृहमंत्री से करते हैं, क्या कश्मीर और असम की पुलिस उनके अधीन है? सवाल दरअसल वैचारिक है।

सोशल मीडिया में लोगों ने उस रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं, जिसके तहत चुनाव में जो भाजपा को हराए, उसे वोट दें का नारा प्रचारित किया जाता है। इसी रणनीति के तहत लोगों ने केजरीवाल को वेट भी दिया था।

लेखक अशोक कुमार पांडेय ने ट्वीट किया-दिल्ली की किसी घटना पर अरविंद केजरीवाल नहीं बोलेंगे क्योंकि उनके पास दिल्ली की पुलिस नहीं है। कश्मीर पर सबसे पहले कूद के बोले थे तो क्या भारतीय सेना का चार्ज इनके पास था? बहाने न बनाइए, असल बात यह है कि आप मुसलमानों के साथ नहीं दिखना चाहते।

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पत्रकार प्रशांत टंडन ने कहा-‘बीजेपी के खिलाफ़ सबसे मजबूत को वोट दो’ रणनीति कितनी गलत है उसके ब्रांड अम्बेसडर हैं केजरीवाल। मज़े की बात है कि उत्तर प्रदेश में फिर ये नीति दोहराई जायेगी।

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