असम में 7 दिनों की रस्साकशी के बाद क्यों झुके मोदी, सरमा सीएम

असम में 7 दिनों की रस्साकशी के बाद क्यों झुके मोदी, सरमा सीएम

दो मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आ गए। सभी प्रदेशों के सीएम ने शपथ ले ली, पर असम में सात दिनों तक चली रस्साकशी। आखिर मोदी व संघ को क्यों झुकना पड़ा?

कुमार अनिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में सारी सत्ता है। उनके इशारे पर पूरी पार्टी चलती है, लेकिन अंदरखाने से आती खबरों के मुताबिक असम में हेमंत विस्व सरमा सब पर भारी पड़े। किसी की नहीं चलने दी। न प्रधानमंत्री की चली और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की। शायद आपने गौर किया हो कि प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री सरमा को बधाई दी और ठीक उसी समय जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा यानी सीटिंग सीएम को भी सांत्वना दी। प्रधानमंत्री ने सोनेवाल को सांत्लना देते हुए ट्विट किया- सोनेवाल जी ने पिछले पांच वर्षों में जनपक्षीय और विकासन्मुखी काम करते रहे। वे हमारे महत्वपूर्ण सहयोगी हैं।

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सरमा के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा के बाद कुछ मीडिया घराने और भाजपा समर्थक यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं कि सरमा ही प्रधानमंत्री के पसंद थे। यहां दो सवाल उठते हैं, पहला कि अगर सरमा पीएम की पसंद थे, तो नाम फाइनल करने में सात दिन क्यों लगा? क्या परेशानी थी, कौन सी गुत्थी सुलाझाई जा रही थी? फिर प्रधानमंत्री ने सोनेवाल को इसी समय सांत्वना क्यों दी। अगर उन्होंने पांच साल अच्छा काम किया, जैसा प्रधानमंत्री ने कहा, तो फिर उन्हें पद से हटाया क्यों गया?

किसी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनाव हो और परिणाम पक्ष में आने के बावजूद सीटिंग सीएम को कोई हटाता नहीं। लेकिन असम में ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वहां सरमा ने बाजी पलट दी। राजनीतिक हलकों में चर्चा यह है कि सरमा ने स्पष्ट कर दिया था कि उनके साथ 50 विधायक हैं, अगर उन्हें सीएम नहीं बनाया गया, तो समझ लीजिएगा। इस धमकी के सिर्फ तीन घंटे भर बाद ही सरमा के नाम का एलान हो गया।

सरमा पुराने कांग्रेसी रहे हैं। तरुण गोगोई सराकर में तीन बार कैबिनेट मिनिस्टर रहे। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ है। टिकट बंटवारे में भी उन्होंने अपने खास लोगों को टिकट दिलवाए। पूरे चुनाव प्रचार में सरमा ने कभी मास्क नहीं पहना। एक बार एक पत्रकार के पूछने पर उन्होंने कहा था कि मास्क जरूरी नहीं है। ब्यूटी पार्लर भी तो चलना चाहिए।

अब माना जा रहा है कि सरमा के मुख्यमंत्री बनने पर पूर्व मुख्यमंत्री सोनोवाल को केंद्र की राजनीति में समायोजित किया जाएगा। उधर, असम कांग्रेस ने सरमा के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें बधाई दी है।

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