अयोध्‍या पर फैसले का आडवाणी और बुखारी ने किया स्‍वागत

कई दशकों तक भारतीय राजनीति में छाये रहे अयोध्या विवाद में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का देशभर में लोगों ने स्वागत किया है और कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी सहित सभी राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन किया है और कहा कि इससे देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने में मदद मिलेगी और भारतीय लोकतंत्र मजबूत होगा।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के 1045 पृष्ठ के फैसले में विवादास्पद भूमि पर राम मंदिर बनाने और वैकल्पिक भूमि पर मस्जिद के निर्माण के बारे में दिए निर्णय का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, जमियत -ए-उलेमा हिंद तथा मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी फैसले का स्वागत किया है।

पूर्व उप प्रधानमंत्री, राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है और कहा है यह सपना सच होने जैसा है। श्री आडवाणी ने कहा कि देशवासियों के साथ-साथ वह भी अयोध्या मामले में अदालत के फैसले से प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ के अयोध्या मामले में दिये गये ऐतिहासिक फैसले का मैं भी देशवासियों के साथ हार्दिक स्वागत करता हूँ। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए एक सपने का सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने जनांदोलन में योगदान देने का अवसर दिया था जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बाद सबसे बड़ा आंदोलन था जिसे उच्चतम न्यायालय के फैसले से संभव बना दिया है।

दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि उन्होंने अयोध्या भूमि विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार कर लिया है और जहां तक इस निर्णय के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने की बात है तो वह इससे सहमत नहीं हैं।श्री बुखारी ने कहा कि देश में मुसलमान शांति चाहते हैं और उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि शीर्ष न्यायालय जो भी फैसला देगा, वे उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि हम न्यायालय के आदेश को स्वीकार करते हैं और वर्षों से चले आ रहे हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को अब समाप्त हो जाना चाहिए। उन्होंने फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने के सवाल पर कहा कि जहां तक समीक्षा याचिका दायर करने की बात है तो वह इससे सहमत नहीं हैं।

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