बदल गया देश, बिना रोजगार के जीना सीख गए 45 करोड़ युवा

बदल गया देश, बिना रोजगार के जीना सीख गए 45 करोड़ युवा

महंगाई से प्यार करते-करते देश ने बेरोजगारी से भी प्यार करना सीख लिया। 45 करोड़ बेरोजगार युवाओं ने अब नौकरी मांगना ही छोड़ दिया। यह नया भारत है।

कुमार अनिल

देश तेजी से बदल रहा है। महंगाई के साथ देश ने जीना सीख लिया है। अब नई खबर यह है कि देश के नौजवानों ने भी बेरोजगारी के साथ जीना सीख लिया है। यह तर्क कितनी बार दिया गया कि सरकार सबको नौकरी नहीं दे सकती। किस नेता ने यह कहा, यह बात बेमानी है। अब तो महंगाई के समर्थकों की तरह बेरोजगारी के समर्थक भी हो गए हैं। पहले तो कहते हैं कि कोई बेरोजगार नहीं है। आंकड़े झूठे हैं। अगर बेरोजगारी का समर्थक थोड़ा कमजोर है, तो कहेगा कि जिसमें टैलेंट है, उसको काम मिल जाता है, जो करना ही नहीं चाहता, वही बेरोजगार है।

आज एक खबर को राहुल गांधी ने शेयर किया। खबर है कि पांच साल में 2.1 करोड़ रोजगार कम हो गए। 45 करोड़ युवाओं ने तो रोजगार मांगना ही छोड़ दिया। इसीलिए यह खबर भले ही राहुल गांधी के लिए बड़ी हो, चिंताजनक हो, पर युवाओं के लिए यह चिंता की बात नहीं। अगर चिंता की बात रहती तो कहीं से प्रदर्शन की खबर आती। धूप से बचना हो, तो मोबाइल पर ट्रेंड करा सकते थे, लेकिन वह भी नहीं है।

अब अकल्पनीय बातें साकार हो रही हैं। जैसे महंगाई के खिलाफ देश में उबाल की बात अब इतिहासकारों का विषय बन गई है, उसी तरह बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं के उफान की बात भी इतिहासकारों के जिम्मे हो गई है। 5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस है। उस दिन भी इतिहासकार ही याद करेंगे कि कभी जेपी के नेतृत्व में युवाओं ने बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन किया था।

देश कितना बदल गया है इसका एक प्रमाण राहुल गांधी के ट्विट के जवाब को देखकर भी समझा जा सकता है। अधिकतर ने राहुल को गरिया ही है।

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