तमिलनाडु के गवर्नर ने छुआ महिला पत्रकार का गाल तो मचा बवाल और फिर क्या हुआ?

तमिलनाडु के गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वॉयरल हो गयी है. इस तस्वीर में पुरोहित महिला पत्रकार का गाल सहला रहे हैं. नाराज पत्रकार ने खुद इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए कड़ी आपत्ति जताई है.

बनवारीलाल पुरोहित को पिछले साल ही राष्ट्रपति ने गवर्नर बनाया था

लक्ष्मी सुब्रमणियम  नामक महिला पत्रकार ने लिखा है- ये अव्‍यवहारिक रवैया है। किसी भी अंजान को उसकी सहमति के बिना छूना, खास तौर से महिला को, ये गलत है.

इस मामले में मचे बवाल के बाद गवर्नर ने माफी मांग ली है.राज्यपाल पुरोहित की तरफ से लक्ष्मी सुब्रमण्यम को यह लिखा गया- “मैने आपके गाल पर थपकी अपनी पोती की तरह समझकर दी। मैने पत्रकार के तौर पर आपके प्रदर्शन की सराहना के तौर पर ऐसा किया क्योंकि मैं खुद भी उसी पेशे के सदस्य के तौर पर 40 वर्षों तक रहा हूं।” हालांकि, पत्रकार ने ट्वीटर कर यह कहा कि राज्यपाल की तरफ से मांगी गई माफी को वह स्वीकार तो करती हैं लेकिन वह राज्यपाल पुरोहित की तर्कों से सहमत नहीं हैं.

राजभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंगलवार को महिला पत्रकार के गाल सहलाने के बाद मचे बवाल के एक दिन बाद राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने बुधवार को माफी मांग ली। गौरतलब है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने एक महिला पत्रकार के सवाल पर उसकी गाल थपथपा दी। महिला पत्रकार की मांग पर राज्यपाल की तरफ से यह माफी उस वक्त मांगी गई है जब लक्ष्मी सुब्रमण्यम ने एक तस्वीर को ट्वीट किया। इसमें राज्यपाल उसके गाल को सहलाते हुए देखे जा रहे थे। लक्ष्मी ने राज्यपाल के इस व्यवहार पर हैरानी जताई थी।

 

उधर, विपक्षी पार्टी द्रमुक ने घटना को संवैधानिक पद पर बैठे एक व्यक्ति का ‘अशोभनीय’ कृत्य करार दिया। यह घटना उस समय हुई जब 78 वर्षीय राज्यपाल राजभवन में भीड़ भाड़ वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल से जा रहे थे। राज्यपाल की ये फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

महिला पत्रकार के मुताबिक, इस घटना के बाद उसने कई बार अपना चेहरा धोया, लेकिन वो इस बात को भुला नहीं पा रही थी.

बनवारीलाल का पालिटकल करियर

गौरतलब है कि पुरोहित को अक्टुबर में ही गवर्नर बनाया गया है. इससे पहले पुरोहित भाजपा में रहे हैं. वह अनेक बार लोकसभा व विधान सभा के सदस्य के अलावा मंत्री भी रह चुके हैं. भाजपा ज्वाइन करने से पहले पुरोहित कांग्रेस में थे.

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