बेमौसम तेजस्वी तेलंगाना के सीएम से मिलने हैदराबाद क्यों गए

बेमौसम तेजस्वी तेलंगाना के सीएम से मिलने हैदराबाद क्यों गए

तेजस्वी यादव कल तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर से मिलने हैदराबाद पहुंचे। क्या वे भविष्य की किसी नई राजनीति की तलाश कर रहे हैं? रहस्यमय बनी यह दोस्ती।

कुमार अनिल

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कल तेलांगना के मुख्यमंत्री केसीआर से मिलने हैदराबाद पहुंचे। उनका मुख्यमंत्री ने जोरदार स्वागत किया। जोरदार इसलिए क्योंकि तेजस्वी के मिलने की तस्वीरें मुख्यमंत्री सचिवालय (तेलंगाना सीएमओ) सहित टीआरएस पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं ने ट्वीट किया। मुख्यमंत्री सचिवालय ने एक साथ कई तस्वीरें ट्वीट कीं।

फिलहाल देश की नजर यूपी सहित पांच राज्यों के चुनाव पर है। कहीं भी भाजपा के खिलाफ किसी तीसरे मोर्चे या यूपीए की कोई चर्चा नहीं है। ऐसे समय तेजस्वी यादव का राजद के प्रमुख नेताओं की टीम बनाकर हैदराबाद जाना और मुख्यमंत्री केसीआर से मिलना क्या देश में किसी नए समीकरण, नए मोर्चे के निर्माण की ओर इशारा करता है?

केसीआर के बारे में स्पष्ट है कि वे देश में कांग्रेस को छोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा के पक्षधर रहे हैं। यही लाइन ममता बनर्जी की रही है। सीपीएम भी इसी धारा की पैरोकार है। सीपीआई और सीपीएम के बड़े नेता भी हाल में केसीआर से मुलाकात कर चुके हैं। खुद केसीआर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्तालिन से मुलाकात कर चुके हैं।

राजद राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्ववाले यूपीए के साथ रहा है। तो क्या राजद अब यूपीए से अलग अपनी नई राह तलाश रहा है?

ऐसा सोचने का आधार यह है कि बिहार में राजद और कांग्रेस के रिश्ते में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही। उल्टे दोनों दलों में आरोप-प्रत्यारोप भी हुए हैं। रिश्तों में खटास पिछले दिनों उपचुनाव में सामने आया, जब सीटों को लेकर कांग्रेस और राजद में सहमति नहीं बन पाई। इसी समय राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्तचरण दास को भकचोन्हर कहा था, जिसके बाद दोनों दलों में विवाद तीखा हो गया था।

तब राजद का कहना था कि वह बिहार में सबसे बड़ा दल है, इसलिए उसे ही यूपीए की कमान मिलनी चाहिए। बिहार की विपक्षी राजनीति के केंद्र में राजद रहे। बाद में इस सवाल पर बात आगे नहीं बढ़ी।

उधर, कांग्रेस ने भी कह दिया है कि वह अगले लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तो क्या कांग्रेस भी बिहार में राजद से अलग होना चाहती है और इसका अंदेशा राजद को है? और इसीलिए राजद 2024 की तैयारी में नए विकल्पों की तलाश कर रहा है?

लगता है पांच राज्यों में चुनाव के बाद राष्ट्रीय राजनीति में बदलाव आएगा। तो क्या तेजस्वी उसी नए बदलाव की भूमिका तौयार कर रहे हैं?

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