बंगाल चुनाव में अनोखा प्रयोग, नो वोट टू बीजेपी के लग रहे नारे

बंगाल चुनाव में अनोखा प्रयोग, नो वोट टू बीजेपी के लग रहे नारे

बंगाल में एक ऐसा अभियान शुरू हुआ, जो आज तक देश के किसी चुनाव में देखने को नहीं मिला। सोशल मीडिया ही नहीं, सड़क पर भी नो वोट टू बीजेपी के नारे लग रहे हैं।

कुमार अनिल

किसी भी चुनाव में दो ही नारे लगते हैं-पहला, सब कहते हैं हमें वोट दें, और दूसरा हमारे विरोधी दल को वोट न दें। पिछले कुछ वर्षों में नोटा भी चर्चा में रहा है, पर बंगाल में देश का पहला ऐसा अभियान शुरू हुआ है, जो कह रहा है कि भाजपा को वोट नहीं देना, बाकी आपकी मर्जी, जिसे चाहे वोट दो। सोशल मीडिया पर भी #NoVoteToBJP ट्रेंड कर रहा है।

नो वोट टू बीजेपी अभियान की शुरुआत दिल्ली की सीमाओं पर सवा तीन महीने से आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने की है। पहले उन्हें देशविरोधी बताकर अपमानित किया गया, दमन किया गया, पर सब सहते हुए किसान आंदोलन करते रहे। आंदोलन के 100 दिन होने पर उन्होंने कहा कि वे बंगाल भी जाएंगे और लोगों को बताएंगे कि भाजपा किस प्रकार किसानों की विरोधी है।

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कल बंगाल में पंजाब और दूसरे प्रांतों के कई किसान नेताओं ने खुलकर कहा कि किसी को भी वोट दो, पर भाजपा को वोट मत दो। कल कोलकाता में बड़ी संख्या में लोगों ने नो वोट टू बीजेपी के बैनर के साथ सड़कों पर प्रदर्शन भी किया। अब तो वहां चर्चित किसान नेता राकेश टिकैत भी पहुंच रहे हैं। कल वे नंदीग्राम में भी सभा करेंगे और वहां भी नो वोट टू बीजेपी का नारा लगाएंगे।

नो वोट टू बीजेपी अभियान की शुुरुआत भले ही किसानों ने की, पर अब यह वहां सिविल सोसाइटी का नारा बन गया है। कल कोलकाता में नो वोट टू बीजेपी मार्च में शहर के बुद्धिजीवी, कुछ छोटे वाम दल और लोकतांत्रित अधिकारों के लिए काम करनेवाले संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल थे।

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इस नए अभियान ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। किसान नेता अगर इसी तरह बंगाल में घूम-घूमकर नो वोट टू बीजेपी का प्रचार करेंगे और तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करेंगे, अनाजों की एमएसपी पर कानून बनाने की मांग करेंगे, तो बंगाल का चुनाव परणाम भी प्रभावित होगा।

अब तक बंगाल में बंगाल को चाहिए बंगाल की बेटी और सोनार बांग्ला के बीच मुकाबला था, अब किसानों के मैदान में आने से चुनाव में नया रंग आ गया है। किसानों के कारण बंगाल के मतदाताओं का वह हिस्सा, जो किसी उहापोह में था कि किसे वोट दें, उसपर भी किसानों के इस अभियान का असर पड़ेगा।

देखना है कि नो वोट टू बीजेपी अभियान का भाजपा किस प्रकार काट करती है।

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