बेरोजगारों का अभियान अब जॉब से आगे बढ़ा, बना राजनीतिक

बेरोजगारों का अभियान अब जॉब से आगे बढ़ा, बना राजनीतिक

पिछले एक हफ्ते से चल रहा बेरोजगारों का अभियान अब एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। कल सोशल मीडिया में मोदी जवाब दो अभियान से भी एक कदम आगे बढ़े युवा।

कुमार अनिल

पहले मोदी जॉब दो, #modi_job_do फिर मोदी जवाब दो#modi_jawab_do के बाद आज ट्विटर पर नो जॉब, नो वोट #noजॉब_noवोट का अभियान बताता है कि देश में चल रहा बेरोजगार युवकों का अभियान तेजी से राजनीतिक अभियान में बदलता जा रहा है। इससे पहले देश ने देखा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुआ किसान आंदोलन आज उन पांच राज्यों में सीधे भाजपा को वोट न देने की अपील कर रहा है।

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जब भी किसी वर्ग के आंदोलन के प्रति सत्ता आंख मूंद लेती है, दमन का रास्ता अपनाती है, तो वह धीरे-धीरे राजनीतिक आंदोलन में रूपांतरित होने लगता है। बिहार में भी अन्य प्रांतों की तरह बेरोजगार युवकों का आंदोलन जारी है। शिक्षक अभ्यर्थियों के प्रति सरकार की उपेक्षा उसे विपक्ष के करीब ले गई है, क्योंकि वही उसकी आवाज का समर्थन कर रहा है।

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बेरोजगारों का अभियान यहां तक पहुंच गया है कि अब वे कह रहे हैं कि जॉब नहीं, तो वोट नहीं। यह वही वर्ग है, जिसका बड़ा हिस्सा भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री मोदी की सभाओं में आगे बढ़कर नारे लगाता था। अबतक सरकार की तरफ से किसी ने नहीं कहा है कि खाली पड़े पदों को कबतक भरा जाएगा। अभियान की खासियत यह है कि नो जॉ नो वोट सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में या केंद्र सरकार की भर्तियों के लिए इंतजार कर रहे युवा ही नहीं, बल्कि राजस्थान में भी जारी है, जहां कांग्रेस की सरकार है।

बिहार में बेरोजगारों के आंदोलन से जुड़े राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द रोजगार नहीं दिए, तो मंत्रियों से इस्तीफे के लिए अभियान शुरू होगा। बिहार के नैजवान बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे।

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