दलित संगठनों के बंद से परेशान केंद्र ने पासवान को थमाया मोर्चा, बंद समर्थकों पर पड़ गया उलटा असर

दलित संगठनों के देश्वापी बंद में उपजे आक्रोश पर महरहम लगाने के लिए मोदी सरकार ने रामबिलास पासवान से मीडिया में बात रखवाई है. लेकिन यह दाव  उलटा पड़ता दिख रहा है.  देश भर में बंद व्यापक सफल रहा और कई राज्यों में तो हिंसक व विस्फोटक स्थिति हो गयी. आठ लोगों के मारे जाने की भी खबरे हैं.

पासवान ने पीएम नरेंद्र मोदी को दलितों का सच्चा हितैषी बताया है जबकि कांग्रेस को असल दलित विरोधी करार दिया.

पासवान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी अत्याचार अधिनियम को कमजोर बनाने के खिलाफ रिव्यु पेटिशन दायर कर दिया है ऐसे में दलित संगठनों को अपना विरोध वापस ले लेना चाहिए. आज जब देश भर में दलित संगठन विपक्षी दलों के समर्थन से बंद में जुटे थे तभी रामविलास पासवान मीडिया से मुखातिब हुए. हालांकि उनकी इस पहल का कोई आसर नहीं हुआ और विरोध जारी रहा. कई जगह पर भारत बंद हिंसक भी हो गया जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत की खबर है.

पासवान ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में राजनीतिक रोटी सेक रही है जबकि बाबा साहब की तस्वीर उसने कभी संसद के सेंट्रल हॉल में नहीं लगाया. यह काम तब हो सका जब वीपी सिंह की सरकार केंद्र में आयी. उन्होंने कहा कि बाब साहब को भारत रत्न सम्मान भी कांग्रेस की सरकार ने नहीं दिया.

भले ही पासवान ने दलित संगठनों के बंद को बेमानी बता दिया हो लेकिन बंद का आह्वान करने वाले दलित संगठनों ने पटना में एनडीए में शामिल दिलत सांसदों को सामंतियों का दलाल कहते हुए खूब नारेबाजी की. खुद दो दिन पहले रामविलास पासवान को भी पटना के निकट दलित युवाओं ने काला झंडा दिखाया था. वे चौहरमल जयंती में शामिल होने फतुहा गये हुए थे लेकिन एससी एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नरमी किये जाने से नाराज दलितों ने रामविलास पासवान का जम कर विरोध किया था.

बंद का व्यापक असर पूरे देश में देखा जा रहा है. पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश से हिंसक प्रदर्शन की खबर है और मीडिया की खबरों में बताया गया है कि इस दौरान कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है.

 

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