BHU गैंगरेप पर यूपी में कांग्रेस, सपा का हंगामा, BSP मौन

BHU गैंगरेप पर यूपी में कांग्रेस, सपा का हंगामा, BSP मौन

BHU गैंगरेप पर यूपी में कांग्रेस, सपा का हंगामा, BSP मौन। तीनों आरोपियों के भाजपाई होने पर हंगामा। कांग्रेस, सपा ने बनाया बड़ा मुद्दा।

बनारस हिंदू विवि में छात्रा से गैंगरेप के आरोपी पकड़े गए हैं। तीनों भाजपा से जुड़े हैं। तीनों की तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सोशल मीडिया में वायरल हैं। कांग्रेस तथा सपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। लेकिन आश्चर्य है कि इतने हंगामे के बावजूद बसपा चुप है। बसपा प्रमुख मायावती, उनके उत्तराधिकारी आकाश आनंद के टिविटर हैंडल पर इस संबंध में कोई ट्वीट नहीं किया गया है। बसपा की चुप्पी हैरान करने वाली है।

बसपा के बारे में कहा जाता है कि वह भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रखती है, लेकिन भाजपा के तान-तीन नेता जब गैंगरेप में आरोपी हैं, तब चुप्पी समान दूरी पर सवाल खड़ा करती है।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता तो बनास गैंगरेप के खिलाफ सड़क पर उतर गए। कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और पूरी भाजपा को घेर रहे हैं। कांग्रेस के कई राष्ट्रीय प्रवक्ता लगातार इस मामले में मुखर हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मंगलवार को बनारस स्थित प्रधानमंत्री के कार्यालय का घेराव होगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद आगे आ कर बनारस गैंगरेप पर भाजपा को घेरा है। लेकिन उसी उत्तर प्रदेश में बसपा ने कोई मुखर आवाज नहीं उठाई है।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट पर अगर आप जाएं, तो वहां बनारस गैंगरेप के आरोपियों की तस्वीरें प्रधानमंत्री मोदी, जेपी नड्डा, स्मृति ईरानी, भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के साथ मिल जाएंगे। लेकिन बसपा प्रमुख मायावती अथवा आकाश आनंद ने ऐसी कोई तस्वीर शेयर नहीं की है। बिहार बसपा के प्रमुख अनिल कुमार भी बनारस गैंगरेप मामले में पूरी तरह चुप हैं।

सवाल है कि जो पार्टी सबसे ज्यादा संस्कृति और संकार की बात करती है, उसी के नेता गैंगरेप में शामिल रहे। जो पार्टी बेटी बचाओ का नारा देती है, उसी के नेता गैंगरेप के आरोपी हैं। इनकी पहचान हो जाने के बाद भी 60 दिन तक गिरफ्तारी नहीं हुई। सवाल है कि इनकी गिरफ्तारी किनके दबाव में नहीं हो रही थी। इस स्थिति में भी बसपा प्रमुख का चुप रहना सवाल खड़ा करता है।

स्थिति यह है कि पूरे उत्तर प्रदेश और देश में यह बड़ा मुद्दा बन गया है। अगर बसपा प्रमुख मायावती या आकाश आनंद चुप रहेंगे, तो इससे भले ही भाजपा का संकट थोड़ा कम होगा, लेकिन जनता के बीच बसपा की छवि कैसी बनेगी?

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