महादलित विकास मिशन घोटाला में पूर्व IAS समेत नपे दस अधिकारी, केस दर्ज 

बिहार में अब एक और घोटाला सामने आया है. नया घोटाला महादलित विकास मिशन में हुआ है. ट्रेनिंग और सुविधाएं देने के नाम पर हुए स्कैम में निगरानी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विभाग के दो आईएएस, दो पूर्व आईएएस समेत 10 पर केस दर्ज किया है.

नौकरशाही डेस्‍क

मिली सूचना के अनुसार, आइएएस रवि मनु भाई परमार (मिशन के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी व मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के वर्तमान उपाध्यक्ष),  निलंबित आइएएस एसएम राजू (बिहार महादलित विकास मिशन के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी) , सेवानिवृत आइएएस केपी रमैया (मिशन के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी एवं बिहार भूमि न्याय अधिकरण, पटना के वर्तमान सदस्य),  सेवानिवृत आइएएस रामाशीष पासवान (मिशन के तत्कालीन निदेशक),  प्रभात कुमार (मिशन के तत्कालीन निदेशक सेवानिवृत बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी), देवजानी कर (मिशन की राज्य परियोजना पदाधिकारी), उमेश मांझी (मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक), शरत कुमार झा (कोलकाता आधारित साल्ट लेक सिटी स्थित इंडस इंटेगरेटेड इंफॉरमेशन मैनेजमेंट लिमिटेड के निदेशक) , सौरभ बसु (न्यू देहली आधारित श्रीराम न्यू होरिजन कंपनी के उपाध्यक्ष) और जयदीप कर (पटना बेलीरोड के जगत अमरावती अपार्टमेंट के निवासी) इस मामले में आइपीसी की धारा 406, 409, 420, 467, 468, 471, 477ए और 120बी तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत केस दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि महादलितों के उत्थान के लिए 2007 में बिहार सरकार ने महादलित विकास मिशन का गठन किया था, जो साल 2010 से कार्य करने लगा था. महादलित विकास मिशन को सफल बनाने के लिए बिहार सरकार ने करोड़ों रुपये आवंटित किए थे. प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले महादलित अभ्यर्थियों को सुविधाएं और साधन देने के लिए श्रीराम न्यू होरिजन और आइआइआइएम कंपनी को टेंडर दिया गया. आइआइआइएम का पटना के बोरिंग रोड स्थित कल्पना मार्केट में शाखा कार्यालय है. निगरानी के अनुसार आरोपितों ने मिलकर एक षड्यंत्र के तहत प्रशिक्षण लेने वालों का गलत आंकड़ा और खर्च दिखा 2010 से 2016 के बीच मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए.

 

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