Bigh Story:शाह से नीतीश ने की मुलाकात पर सीट शेयरिंग पर नहीं बढ़ी बात,CM को छोड़ने भी अमित नहीं आये बाहर

Bigh Story शाह से नीतीश ने की मुलाकात पर सीट शेयरिंग पर नहीं बढ़ी बात,CM को छोड़ने भी अमित शाह नहीं आये बाहर.
दिल्ली में जडीयू अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से सीट बंटवारे के मुद्दे पर मुलाकात की. यह मुलाकात 15-20 मिनट तक चली. लेकिन सीट शेयरिंग फार्मुला पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है.
उधर एबीपी न्यूज का कहना है कि दोनों के बीच में सीटों को लेकर सीधे बातचीत नहीं हुई लेकिन इतना तय हुआ कि नीतीश कुमार का सम्मान रखा जाएगा. हालांकि पहले से यह खबरें आ रही है ंकि नीतीश सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला के लिए दिल्ली गये हैं. नीतीश कुमार को चाहने वालों के लिए मायूस करने वाली बात यह है कि इस 15 मिनट की मुलाकात के बाद जब नीतीश कुमार बाहर आये तो उन्हें छोड़़ने के लिए अमित शाह बाहर नहीं आये. बल्कि भूपेंद्र यादव ने उन्हें बाहर तक छोड़ा.
हालांकि कुछ मीडिया खबरों में कहा जा रहा है कि दुर्गा पूजा के पहले सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया जायेगा और इसके लिए नीतीश कुमार का सम्मान रखा जायेगा. उधर नीतीश कुमार पहले भी कह चुके हैं कि जदयू सम्मानजनक सीटों पर लड़ेगा. याद रखने की बात है कि पिछले दिनों अमित शाह पटना आये थे तो जदयू की तरफ से कहा गया था कि एक महीने के अंदर सीट बंटवारे के फार्मुला घोषित कर दिया जायेगा. लेकिन तब से एक महीना से अधिक हो चुका है फिर भी अभी तक घोषणा नहीं हुई. लेकिन अब इसे दुर्गापूजा तक के लिए टाले जाने का मतलब साफ है कि एनडीए में सीट शेयरिंग मामला पेचीदा हो चुका है. लेकिन एनडीए का कोई घटक दल इस पर खुल कर नहीं बोल रहा है.
उधर एनडीए के एक अन्य घटक दल आरएलएसपी को ले कर है जिसेक बारे में भाजपा नेताओं पर छोड़ा जा रहा है कि उसे कितनी सीटें दी जायें. उधर आरएलएसपी के नेता उपेंद्र कुशवाहा कह चुके हैं कि उनकी सीटें घटनी नहीं चाहिए.
 
उधर सूत्रों के मुताबिक सीटों की डील में कौन पार्टी किस लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े, इस हिसाब-किताब में जेडीयू में नए-नए आए  प्रशांत किशोर भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि प्रशंत किशोर और अमित शाह के बीच के संबंध 2014 के बाद अच्छे नहीं हैं. फिर भी सीटों को लेकर सम्मानजनक बंटवारा दशहरे से पहले होने की उम्मीद जताई जा रही है.
 
 
दर असल लोकसभा की 40 सीटें हैं, फिलहाल बीजेपी के 22 सांसद हैं, जबकि उनकी सहयोगी पार्टी एलजेपी के 6 सांसद हैं. 3 सांसद आरएलएसपी के हैं. इस तरह कुल सांसदों की संख्या पहुंचती है 31.  इसके अलावा दो सांसद जेडीयू के पास है. इस तरह मौजूदा एनडीए के पास 33 सांसद हैं. और यही बड़ी संख्या सीटों के बंटावारे में मुश्किल पैदा कर रही है.
 
 

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