बिहार बंंद पिछले बंद से कैसे रहा अलग, जहानाबाद ने किया कमाल

बिहार बंद में लाखों कार्यकर्ता उतरे, सबसे खास रहा जहानाबाद

बिहार विधानसभा में विधायकों को बुरी तरह पीटे जाने के खिलाफ बिहार बंद का असर राजधानी पटना से लेकर प्रखंड स्तर तक दिखा। सबसे खास रहा जहानाबाद।

बिहार विधानसभा में पुलिस के प्रवेश. विधायकों की पुलिस द्वारा पिटाई, महिला विधायकों तक को अपमानित करने के खिलाफ आयोजित बिहार बंद का असर पूरे बिहार में दिखा। महागठबंधन में शामिल दलों राजद, कांग्रेस और वाम दलों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे।

बिहार बंद में जहानाबाद ने कुछ विशेष संदेश दिया है। अब तक मिली खबरों के अनुसार सिर्फ जहानाबाद ही ऐसा शहर है, जहां सुबह चार बजे ही बिहार बंद के लिए कार्यकर्ता सड़क पर उतर गए। सुबह चार बजे अंधेरा रहता है। बंद के लिए सड़क पर उतरे कार्यकर्ताओं की तस्वीरों में सड़क पर दूधिया रोशनी फैली है, जो बता रही है कि अभी सूर्योदय तो दूर, आकाश भी साफ नहीं हुआ है।

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आमतौर से किसी बंद में कार्यकर्ता सुबह आठ बजे सड़क पर उतरते हैं। कहीं-कहीं सात बजे भी। पंजाब और हरियाणा के किसान भी आज भारत बंद के लिए सड़क पर उतरे। उनकी तस्वीरें भी सुबह छह बजे से पहले की नहीं हैं। जहानाबाद ने कमाल कर दिया।

बंद के लिए सुबह चार बजे सड़क पर उतरने का क्या मतलब है। इसका मतलब है कि कार्यकर्ता बिहार विधानसभा में जो कुछ हुआ, उसे लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक मानते हैं। कार्यकर्ताओं को रातभर शायद नींद न आई हो। वे अति उद्वेलित हैं। एक बात और। कार्यकर्ताओं को जनता का व्यापक समर्थन भी मिला होगा, तभी वे सुबह चार बजे सड़क पर उतर आए।

विपक्ष के नेता तेजस्वी याजव ने बिहार बंद की घोषणा सिर्फ एक दिन पहले की। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सड़क पर उतरना असाधारण है। सत्ता पक्ष के लिए भी इसमें संदेश है, अगर वह पढ़ना चाहे। भले ही विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस बुलाई हो, लेकिन जनता मुख्यमंत्री से ही सवाल पूछेगी। विपक्ष के निशाने पर भी सीएम ही रहेंगे। बिहार बंद ने महागठबंधन की एकजुटता को भी मजबूत किया है।

महागठबंधन जनता में यह संदेश ले जाने में सफल रहा है कि नए पुलिस एक्ट में आम नागरिक की स्वतंत्रता खतरे में होगी तथा विधानसभा में पुलिस का प्रवेश एक खतरनाक परंपरा स्थापित करना है। सत्ताधारी दलों के नेता भी कल से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, लेकिन वे तेजस्वी पर व्यक्तिगत छींटाकशी में ज्यादा मशगूल हैं। विधानसभा में विधायकों को लात-घूंसे से मारने को घुमा-फिरा कर सही बता रहे हैं।

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