नफरत की राजनीति को बिहार ने नाकारा, बीजेपी की रैली में खाली कुर्सियां तेजस्वी में जनसैलाब

नफरत की राजनीति को बिहार ने नाकारा, बीजेपी की रैली में खाली कुर्सियां तेजस्वी में जनसैलाब

शाहबाज़ की रिपोर्ट

बिहार में चुनाव प्रचार एवं जनसम्पर्क में जहाँ महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव को अपार समर्थन मिल रहा हैं वही इस बार एनडीए में राजद की मुख्य विरोधी पार्टी भाजपा की चुनावी रैलियां ठंढी ठंढी जा रही है, भाजपा की चुनावी सभा में खाली कुर्सियां वाली तस्वीरों को राजद वोटरों द्वारा नफरत की राजनीति को नकार दिया जाना बता रही है.

बिहार की राजनीति में भाजपा की घटती हैसियत का अंदाजा महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव की रैलियों में अपार भीड़ को देखते हुए भी लगाया जा सकता है. तेजस्वी कल मुंगेर के तारापुर में तेजस्वी यादव ने वहां से राजद उम्मीदवार दिव्या प्रकाश के लिए स्टार प्रचारक बने. चुनावी सभा में पैर रखने की जगह नहीं थी. वही भाजपा के भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस की सभा में कुर्सियां खाली थी. मुश्किल से 1000 की भीड़ इकठ्ठा कर पायी। जदयू सांसद ललन सिंह भी वहां मौजूद थे.

दरअसल 2015 की तरह 2020 के बिहार चुनाव के पूर्व भी बिहार की जनता ने नफरत की राजनीति को नकार दिया है. बिहार की राजनीति में भाजपा की नफरत का प्रभाव नहीं पड़ा है, भाजपा की विवादस्पद बयानों वाली प्रवृति भी 2015 में नाकाम रही थी. उस समय के तात्कालिक गृह मंत्री अमित शाह ने एक चुनावी सभा में विवादित बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि अगर बिहार में महागठबंधन की जीत होगी तो पाकिस्तान में पटाखे फोड़े जायेंगे”. 2020 में बिहार की राजनीति में कश्मीर और आतंकवाद की एंट्री हुई. इस बार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा अगर राजद इस बार जीती है तो जिस आतंकवाद के खिलाफ हम कश्मीर में लड़ रहे हैं वही आकर बिहार में शरण लेंगे। इसपर राजद ने जवाबी पलटवार का कहा था कि बेरोज़गारी,पलायन और गरीबी के आतंक पर क्या कहेंगे ?

नित्यानंद राय खुद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं इस बयान के बाद उनके ऊपर ही सवाल उठने लगे हैं. राजद ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री जो खुद आतंकवाद रोकने के लिए ज़िम्मेदार हैं. उनके द्वारा यह कहा जाना की राजद जीत गयी तो बिहार आतंकवादियों को शरणस्थली बन जायेगा बेहद शर्मनाक है. राजद नेता सईद फैसल अली ने पूछा कि नित्यानंद राय खुद गृह मंत्रालय में है इसलिए उनसे पूछा जाना चाहिए कि वह क्या कर रहे थे.

एक और भाजपा के मंत्री गिरिराज सिंह ने भी एक कांग्रेस उम्मीदवार को जिन्ना प्रेमी बताकर फिर से बिहार चुनाव में पाकिस्तान के बहाने बिहार में चुनावी धुर्वीकरण की रणनीति पर चल रहे हैं. हालांकि भाजपा चुनावी सभाओं में कोरोना के कारण भीड़ कम है यह कम ही लोग मानते है. क्यूंकि तेजस्वी की सभाओं में जनसैलाब रहता है हालांकि सभा में मौजूद लोग सोशल डिस्टन्सिंग का पलायन नहीं कर रहे हैं.

बाएं में भाजपा की रैली में खाली कुर्सियां और दाएं तेजस्वी की रैली में लोग छतों पर चढ़कर देख रहे हैं. क्रेडिट : नवभारत टाइम्स

तेजस्वी तारापुर की सभा के बाद ट्वीट कर के कहते हैं बिहार में बेरोजगारी का हाहाकार है। युवा निकम्मी सरकार बदलने को बेकरार है। तारापुर में उमड़ा बेरोजगारों का सैलाब”।

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