साहित्य सम्मेलन का महाधिवेशन सम्पन्न, हिंदी को राज भाषा बनाने का प्रस्ताव, साहित्याकर-पत्रकार हुए सम्मानित

पटना, 19 मार्च। राष्ट्र-भाषा हिंदी, शीघ्र ही देश की राज-भाषा घोषित हो, जैसा कि, संविधान-सभा ने १४ सितम्बर १९४९ को निर्णय लिया था, और जिसके कारण, पूरा देश इस तिथि को ‘हिंदी-दिवस’ मनाता है, जबकि यह आज तक नही हो सका, भारत सरकार से इस माँग और इस संकल्प के साथ कि, सम्मेलन की स्थापना का शताब्दी-वर्ष भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय ३९वाँ महाधिवेशन आज संपन्नहो गया। समापन समारोह में अनेकों विद्वानों और पत्रकारों को, बिहार की साहित्यिक विभूतियों के नाम से नामित अलंकरणों से सम्मानित किया गया।
 
समापन समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने इस महाधिवेशन को एक बड़ी साहित्यिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि, इससे बिहार प्रांत के साहित्यकारों और हिंदी-प्रेमियों को शक्ति और ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि, शुद्ध विचारों के संरक्षण से हीं भाषा का विकास होता है और अभिव्यक्ति को सामर्थ्य मिलता है। इसका संबंध मन से है और मन से हीं सच्ची अभिव्यक्ति उपजती है।
 
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय रिज़र्व बैंक के बिहार-झारखंड प्रक्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक नेलन प्रकाश तोपनों ने कहा कि, ‘साहित्य’ समाज की सांस्कृतिक धरोहर होता है, जिससे मनुष्य अपनी संस्कृति को अक्षुण रख सकता है। उन्होंने सम्मेलन के इस महाधिवेशन की प्रशंसा करते हुए, इसे अनेक प्रकार से लाभकारी बताया।
 
समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि, यह अधिवेशन साहित्य सम्मेलन के आगामी शताब्दी-वर्ष के आयोजन का पूर्वाभ्यास था। इसकी विशाल सफलता ने यह विशास दिलाया है कि, शताब्दी-वर्ष का आयोजन व्यापक रूप से सफल होगा। उन्होंने बिहार के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए, आग्रह किया कि शताब्दी-वर्ष में प्रत्येक ज़िला में अधिवेशन आयोजित करें। उन्होंने अपने इस संकल्प को भी दुहराया कि, शताब्दी-वर्ष में बिहार के सभी साहित्यकारों का परिचय-ग्रंथ, जो अनेक खंडों में होगा, का प्रकाशंकिया जाएगा। इसलिए साहित्य-सेवी गण अपने एक पृष्ठ के परिचय के साथ अपनी पाँच प्रतिनिधि रचनाएँ यथा शीघ्र सम्मेलन कार्यालय को उपलब्ध कराएँ। दिवंगत रचनाकारों के संबंध में सामग्री उनके परिजन भी उपलब्ध करा सकते हैं।

अनेक साहित्यकार व पत्रकार हुए सम्मानित

 
इस अवसर पर साहित्य सम्मेलन प्रयाग के अध्यक्ष और देश के मूर्द्धन्य विद्वान डा सूर्य प्रसाद दीक्षित, विश्वविद्यालय सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा शशि शेखर तिवारी, मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’, सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्र नाथ गुप्त, डा शंकर प्रसाद समेत बड़ी संख्या में साहित्य सेवी उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के प्रधानमंत्री और ख्याति-लब्ध विद्वान आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव ने तथा संचालन साहित्यमंत्री डा शिववंश पांडेय ने किया।इस अवसर पर सम्मेलन की पत्रिका ‘सम्मेलन साहित्य’ के महाधिवेशन विस्शेषांक का भी लोकार्पण किया गया।
 
भाषा की व्युत्तपत्ति के महान अध्येता और अद्वीतीय विद्वान थे महापंडित राहुल सांकृत्यान: दीक्षित
 
इसके पूर्व महाधिवेशन के द्वितीय वैचारिक-सत्र का उद्घाटन करते हुए, साहित्य सम्मेलन प्रयाग के विद्वान अध्यक्ष डा सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि, भाषा की व्युत्पत्ति के अद्वीतीय विद्वान थे, महापंडित राहुल सांकृत्यान। उन्होंने अपनी यात्राओं से ‘यात्रा-साहित्य’ को समृद्ध किया। साहित्य में यात्रा-साहित्य’ के वे जनक थे। उन्हें ३६ भाषाओं का ज्ञान था और उन सब में वे अधिकार पूर्वक लिख सकते थे। उनके १५० प्रकाशित ग्रंथ है। उनके प्रकाशित ग्रंथों के कुल पृष्ठों की संख्या १५हज़ार से अधिक है। वे सिद्ध-साहित्य के महान खोजी थे, जिन्होंने सिद्ध किया किया कि, हिंदी का इतिहास १२वीं सदी से नहीं बल्कि ६ठी सदी से है, जब ‘सराहापा’ संत साहित्य प्रकाश में आया। उन्होंने सिद्ध-संतों के ४७ संत-कवियों के साहित्य की खोज की थी। वे साहित्य-संसार के अद्भुत व्यक्तित्व थे।
 
महापंडित राहुल सांकृत्यान और यात्रा-साहित्य विषयक इस वैचारिक सत्र के मुख्य-वक़्ता और सुप्रतिष्ठ विद्वान प्रो अमरनाथ सिन्हा ने कहा कि, राहुल जी ने अपने जीवन के हरेक पहलू की यात्रा की। वे केवल भूमि-नापने वाले यात्री नहीं थे। उन्होंने अनेक नामों से जाने जाने के कारण ‘नाम’ की भी यात्रा की। विभिन्न विचारों से प्रभावित रहे, और इस प्रकार ‘विचारों की यात्रा’ की। भाषा और साहित्य की की गई उनकी यात्रा साहित्य-संसार की थाती है।
 
सत्र के मुख्य अतिथि पऔर पटना विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो रास बिहारी प्रसाद सिंह, विद्वान साहित्यकार डा शिवदास पांडेय, डा विनोद कुमार मंगलम तथा सम्मेलन के उपाध्यक्ष पं शिवदत मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र की अध्यक्षता विद्वान साहित्यकार और विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो शशि शेखर तिवारी ने की। मंच का विदवतापूर्ण संचालन सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा ने किया।
 
 
हिंदी देश की ‘राजा-भाषा’ घोषित हो
 
महाधिवेशन के आज के इस प्रथम वैचारिक सत्र के बाद ‘मुक्त-सत्र आहूत हुआ, जिसमें विद्वानों ने एक सवार में हिंदी को अविलंब भारत के शासन की भाषा ‘राज-भाषा’ घोषित करने की मांग की। विद्वानों ने कहा कि, १४ सितंबर१९४९ को सविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित तो कर दिया कि, ‘हिंदी’ देश की ‘राज-भाषा’
 
होगी, किंतु अंग्रेज़ी थोप कर इस प्रस्ताव को मृत कर दिया। ‘राज-भाषा’ घोषित होकर भी हिंदी अबतक ‘राज-भाषा नही हो पाई।
 
इस सत्र में यह भी विचार आया कि, भारत की न्यायपालिका और विज्ञान और तकनीक में भी यथा शीघ हिंदी का प्रयोग आरंभ हो। इन संस्थाओं में अंग्रेज़ी के प्रभाव से लगता हीं नहीं है कि, हम स्वतंत्र हुए हैं। यहाँ अब भी अंग्रेज़ों और अंग्रेज़ीयत का शासन है। इन प्रस्तावों के साथ हिंदी के सामने आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा हुई तथा उन्हें दूर करने के उपायों पर भी विचार हुए।
 
सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्र नाथ गुप्त की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में,विद्वान साहित्यकार डा शिवदास पांडेय, दूरदर्शन, दिल्ली की कार्यक्रम अधिशासी अर्चना श्रीवास्तव, आकाशवाणी दिल्ली के वरीय कार्यक्रम प्रबंधक दिलीप कुमार झा, मुंबई की प्रतिष्ठित लेखिका डा तारा सिंह, डा अरुण सज्जन, डा जे बी पांडेय, प्रो श्यामा, घमंडी राम, श्वेता नवीन, डा विनय कुमार विष्णुपुरी, संजय मुखर्जी तथा डा शैलेंद्र कुमार सिंह समेत दर्जनों विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए, अतिथियों का स्वागत डा कल्याणी कुसुम सिंह ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन अंबरीष कांत ने किया। मंच संचालन किया आचार्य आनंद किशोर शास्त्री ने।
 
 
डा सूर्य प्रसाद दीक्षित को ‘आचार्य शिव पूजन सहाय’ सम्मान
 
सम्मानित होने वाले विद्वानों की सूचि
 
 
क्रम संख्या एवं नाम : अलंकरण का नाम
 
डा सूर्य प्रसाद दीक्षित : आचार्य शिव पूजन सहाय सम्मान
 
प्रो शशि शेखर तिवारी : महापंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान
 
डा सोम ठाकुर : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ सम्मान
 
डा सुरेश अवस्थी : गोपाल सिंह ‘नेपाली’ सम्मान
 
मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’ : संत कवि गुरु गोविंद सिंह महाराज साहित्य-साधना सम्मान
 
डा कमल मुसद्दी : चतुर्वेदी प्रतिभा मिश्र साहित्य साधना सम्मान
 
डा अरुण सज्जन : रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान
 
डा शंभु प्रसाद सिंह , दूरदर्शन : राम गोपाल शर्मा ‘रूद्र’ सम्मान
 
श्री महेश कुमार बजाज : महाकवि आरसी प्रसाद सिंह सम्मान
 
श्री राजेंद्र उपाध्याय : राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह सम्मान
 
श्री दीनानाथ साहनी : फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ सम्मान
 
डा पद्मलता ठाकुर : पं राज कुमार शुक्ल-स्मृति सम्मान
 
डा तारा सिंह : प्रकाशवती नारायण सम्मान
 
श्री चितरंजन कनक : रामधारी प्रसाद विशारद सम्मान
 
डा कलानाथ मिश्र : आचार्य नलिन विलोचन शर्मा सम्मान
 
डा रमेश चौधरी ‘रमन’ : कलक्टर सिंह केसरी सम्मान
 
डा नंद किशोर तिवारी : लक्ष्मी नारायण सिंह ‘सुधांशु’ सम्मान
 
डा मंगला रानी : बच्चन देवी हिंदी सेवी सम्मान
 
श्री सुनील कुमार दूबे : पं जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ सम्मान
 
डा विजय प्रकाश : केदार नाथ मिश्र ‘प्रभात’ सम्मान ९३३४१६६९०९
 
श्री विश्वनाथ ठाकुर विद्यार्थी : पं छविनाथ पांडेय सम्मान
 
डा प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’ : आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा सम्मान
 
डा आरती कुमारी,मुज़फ़्फ़रपुर : उर्मिला क़ौल साहित्य साधना सम्मान
 
डा गौरी गुप्ता : अंबालिका देवी सारस्वत-साधना सम्मान
 
श्री राम उचित पासवान ‘पासवां’ : कामता प्रसाद सिंह ‘काम’ सम्मान
 
डा परमानंद प्रभाकर : पं मोहन लाल महतो ‘वियोगी’ सम्मान
 
डा बबीता कुमारी : कुमारी राधा स्मृति सम्मान
 
प्रो अमरेन्द्र कुमार : डा कुमार विमल सम्मान
 
श्री रामदेव शर्मा ‘प्रभंजन’ : अनूप लाल मंडल सम्मान
 
डा सत्य नारायण श्रीवास्तव : पं राम दयाल पांडेय सम्मान
 
डा विश्वनाथ वर्मा : हास्य रसावतार पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी सम्मान
 
प्रो दिलीप कुमार : डा राम प्रसाद सिंह लोक-साहित्य-साधना सम्मान
 
डा किशोर कुमार सिन्हा : पं प्रफुल्ल चंद्र ओझा ‘मुक्त’ सम्मान
 
श्रीमती शकुंतला मिश्र : डा मिथिलेश कुमारी मिश्र साहित्य साधना सम्मान
 
मो परवेज़ आलम : पीर मुहम्मद मूनिस सम्मान
 
डा संजय पंकज ,मुज़फ़्फ़रपुर : आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री सम्मान
 
श्री कृष्ण मोहन प्रसाद मोहन : बाबा नागार्जुन सम्मान
 
श्री विजय शंकर मिश्र : पं हंस कुमार तिवारी सम्मान
 
श्री सत्य नारायण लाल,चित्रकार : श्री उपेन्द्र महारथी कला-साधना सम्मान
 
डा तैय्यब हुसैन ‘पीड़ित’ : डा मुरलीधर श्रीवास्तव ‘शेखर’ सम्मान
 
श्री समीर परिमल : कविवर पोद्दार रामावतार अरुण सम्मान
 
डा महम्मद हारुन ‘शैलेंद्र’ : पं रामचंद्र भारद्वाज सम्मान
 
श्री अमियनाथ चटर्जी : रामेश्वर सिंह काश्यप सम्मान
 
श्री राज किशोर सिंह ‘उन्मुक्त’ : रघुवीर नारायण सम्मान
 
श्री सुमन कुमार : भिखारी ठाकुर नाट्य साधना सम्मान
 
श्री सुभाष चंद्र झा , भा प्र से : पं राम नारायण शास्त्री सम्मान
 
श्री गोविंद राकेश : बलभद्र कल्याण हिंदी सेवी सम्मान
 
श्री पल्लवी विश्वास : डा नगेंद्र प्रसाद मोहिनी नृत्य साधना सम्मान
 
श्री राजीव रंजन चौबे : महँथ धनराज पुरी सम्मान
 
श्री देवेंद्र कुमार : साहित्य सम्मेलन हिंदी सेवी सम्मान
 
श्रीकांत व्यास : साहित्य सम्मेलन हिंदी सेवी सम्मान
 
श्री केशव प्रसाद वर्मा : साहित्य सम्मेलन हिंदी सेवी सम्मान
 
डा नागेन्द्र मणि : साहित्य सम्मेलन काव्य-साधना सम्मान
 
श्रीमती शमा कौसर : साहित्य सम्मेलन काव्य-साधना सम्मान
 
श्री कुंदन आनंद : साहित्य सम्मेलन काव्य-साधना सम्मान
 
श्री कमल नयन श्रीवास्तव : साहित्य सम्मेलन हिंदी-सेवा सम्मान
 
सुश्री आयुषी मिश्र : साहित्य सम्मेलन हिंदी-सेवा सम्मान
 
श्री शैलेंद्र कुमार सिंह : साहित्य सम्मेलन हिंदी-सेवा सम्मान
 
श्री मुनींद्र कुमार मिश्र ‘मेघ’ : साहित्य सम्मेलन हिंदी-सेवा सम्मान
 
श्री इंद्र देव तिवारी ‘द्विजदेव’ : साहित्य सम्मेलन हिंदी-सेवा सम्मान
 
 
साहित्य सम्मेलन पत्रकारिता सम्मान :
 
 
श्री दीपक दक्ष : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान
 
श्री सुजीत कुमार : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान
 
श्री साकिब इक़बाल खान : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान
 
श्री हृदय नारायण झा : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान
 
श्री प्रभात रंजन : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान
 
श्री राजू श्रीवास्तव : साहित्य सम्मेलन हिंदी-पत्रकारिता सम्मान
 
श्री आदित्य कुमार झा : साहित्य सम्मेलन हिंदी पत्रकारिता सम्मान

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