बिहार चुनाव: कोरोना वैक्सीन के राजनीतिकरण पर विपक्ष ने उठाये सवाल

बिहार चुनाव: कोरोना वैक्सीन के राजनीतिकरण पर विपक्ष ने उठाये सवाल

इमेज क्रेडिट – अमरउजाला.कॉम

शाहबाज़ की विशेष रिपोर्ट

बिहार चुनाव से कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में बिहार की जनता को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया. विपक्ष ने भाजपा पर कोरोना के टीके का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का चुनावी घोषणा-पत्र जारी किये जिसमे भाजपा ने राज्य में NDA सरकार बनने पर बिहार की जनता को मुफ्त कोरोना वैक्सीन और 19 लाख लोगों को रोज़गार देने समेत अनेक वादे किये हैं.

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भाजपा पर कोरोना वैक्सीन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया. राजद ने ट्वीट किया “कोरोना का टीका देश का है, भाजपा का नहीं. टीका का राजनीतिक इस्तेमाल दिखाता है कि इनके पास बीमारी और मौत का भय बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है! बिहारी स्वाभिमानी हैं, चंद पैसों में अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेचते”.

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समाचार एजेंसी ANI ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को यह कहते बताया “जैसे ही #COVID19 वैक्सीन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपलब्ध होगा, बिहार के प्रत्येक व्यक्ति को मुफ्त टीकाकरण मिलेगा। यह हमारे चुनाव घोषणापत्र में उल्लिखित पहला वादा है”.

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दरअसल निर्मला सीतारमण ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से कहा “बिहार में एनडीए सरकार ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक उदाहरण पेश किया है। यह हमारा वादा है कि जब कोरोना का वैक्सीन उपलब्ध होगा तब आईसीएमआर से मंजूरी के बाद बिहार के प्रत्येक निवासी को मुफ्त टीकाकरण दिया जाएगा”.

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी भाजपा द्वारा बिहारियों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने के वादे पर भाजपा को घेरा है. राहुल गाँधी ने ट्वीट किया “भारत सरकार ने कोविड वैक्सीन वितरण की घोषणा कर दी है। ये जानने के लिए कि वैक्सीन और झूठे वादे आपको कब मिलेंगे, कृपया अपने राज्य के चुनाव की तारीख़ देखें”.

बिहार के विपक्षी दल के नेता कहते हैं कि भाजपा ने बिहार कि जनता से ऐसा वादा किया है जो कब पूरा होगा किसी को पता नहीं है. अभी तक कोरोना वैक्सीन बन भी नहीं पाया है और भाजपा उसे भुनाने में लगी हुई है.

वही आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन का राजनीतिकरण गलत है. यह तो सरकार का फ़र्ज़ है. ज़ाहिर है देश के हर हिस्से के नागरिक को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में दिया जाना चाहिए. तो फिर बिहार में चुनाव के समय ऐसा वादा करना कितना सही है कि बिहार के लोगों को कोरोना वैक्सीन मुफ्त में दी जाएगी.

आलोचक मुफ्त कोरोना वैक्सीन के वादे को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानते हैं. वहीं चुनाव योग से जुड़े कुछ वरिष्ठ लोगों का कहना है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

मुख्य चुनाव आयुक्त रहे ओपी रावत ने बीबीसीहिंदी को बताया “नियम बस इतना कहते हैं कि अगर इस तरह फ़्री बाँटने की कोई घोषणा की जाती है, तो ऐसा करने के लिए संसाधन पार्टी के पास है या नहीं और बजट में प्रावधान किया जा सकता है या नहीं, ये दो सवाल पूछे जाते हैं. अगर इन दोनों सवालों के जवाब हाँ है, तो चुनाव आयोग इसमें कोई एक्शन नहीं ले सकता. फ़्री घोषणाओं के लिए मौजूदा प्रावधानों में संसाधन ना होने पर उसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है, ऐसा सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहता है.”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने #वैक्सीनइलेक्शनिज़्म पर ट्वीट कर कहा कि बिहार के लिए जो घोषणा की गई है, उससे लगता है कि बाक़ी राज्यों के लिए वैक्सीन फ़्री नहीं होगी.

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