Bihar में स्वास्थ्य व्यवस्था ख़ासता हाल, Doctors भी बहुत कम!

Covid-19 काल में अगर सबसे अधिक किसी की ज़रूरत है तो वो है स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्थ होने के साथ ही डॉक्टरों की। BBC ने State Health Society, Bihar के आँकडों का हवाला देकर ख़बर छापी है। जिसके अनुसार बिहार में 534 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं मगर एक भी चालू हालत में नहीं है।

रेफ़रल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 466 है,  जिसमें कार्यरत सिर्फ़ 67 हैं। ऐसा ही हाल अनुमंडल अस्पतालों और सदर अथवा ज़िला अस्पतालों का भी है। सूबे के 13 मेडिकल कॉलेजों में से केवल 10 ही फंक्शनल हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ़ की 60 फ़ीसद से भी अधिक कमी है।

बिहार में न सिर्फ़ डॉक्टर बल्कि मेडिकल स्टाफ़ और नर्सों की भी भारी कमी है। जहां स्टाफ़ नर्स ग्रेड के कुल स्वीकृत पद 14198 हैं,  वहीं कार्यरत महज़ 5068 हैं। एनएनएम नर्स की भी क़रीब 10 हज़ार से अधिक पोस्ट ख़ाली है।

बिहार में डॉक्टर और मरीज़ का रेशियो देखा जाए तो ये है 28 हज़ार 391 लोगों पर सिर्फ़ एक डॉक्टर। जबकि WHO के हिसाब से प्रति एक हज़ार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। Indian Mediacal Association (IMA) भी 1681 लोगों पर एक डॉक्टर होने की बात कहता है।

कोरोना डेडिकेटेड NMCH की बात करें तो BBC में छपि ख़बर के अनुसार, इसके एनेस्थेशिया विभाग में कोई भी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर नहीं है, जबकि सृजित पद 25 हैं। वहीं PMCH में 40 फ़ीसद और Darbhanga Medical College(DMCH) में भी 50 फ़ीसदी डॉक्टरों की कमी है।

बीबीसी की माने तो कोरोना मामले में बिहार एक ऐसा राज्य है, जहां कोरोना से डॉक्टरों की मौत का प्रतिशत दूसरे राज्यों से अधिक है। साथ ही बिहार में सबसे अधिक डॉक्टर संक्रमति हो रहे हैं।

ख़बर के अनुसार  “बिहार में कोरोना वायरस की चपेट में आकर डॉक्टरों की मौत का प्रतिशत 4.42 है। जबकि राष्ट्रीय औसत 0.5 फ़ीसद है। सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में डॉक्टरों की मौत का प्रतिशत 0.15 है, जबकि दिल्ली में 0.3 फ़ीसद, कर्नाटक में 0.6 फ़ीसद,  आंध्र प्रदेश में 0.7 प्रतिशत और तामिलनाडु में 0.1 फ़ीसद ही है.”

बिहार में Registered Doctors की कुल संख्या 20 हज़ार के क़रीब है. इनमें से लगभग चार हज़ार डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में कार्यरत हैं. बाक़ी या तो निजी अस्पतालों में काम कर रहे हैं या फिर संविदा पर हैं। जबकि राज्य को 1 लाख से अधिक डॉक्टरों की दरकार है।

हालत कितनी गंभीर है बिहार के स्वास्थ्य विभाग की ये तो समझ आ रहा है, वैसे बिहार सरकार ने प्रत्यय अमृत को विभाग का दायित्व सौंपा है और कोरोना जांच और इलाज व्यवस्था सुधारने का टारगेट दिया है। जांच में तो बहुत तेज़ी आई है, देखना है कितनी सुधरती है इलाज व्यवस्था।

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