बिहार अल्पसंख्यक वित्त निगम ने तोड़ा 35 साल का रिकॉर्ड

बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम के प्रबंध निदेशक मोइज़ुद्दीन ने नौकरशाही डॉटकाम के एडीटर इर्शादुल हक़ को दिये खास साक्षात्कार में खुलासा किया कि निगम ने 35 वर्षों में कर्ज वितरण का नया रिकार्ड बनाया है.

बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम ( Bihar State Minorities Financial Corporation (BSMFC), जिसकी स्थापना बिहार सरकार ने 23 मार्च 1984 में की थी। इसके अंतर्गत बिहार सरकार की दो योजनाएं चल रही हैं, इसमें एक है मुख्यमंत्री रोज़गार ऋण योजना जिसके तहत बिहार के अल्पसंख्यक बेरोज़गार लोगों को 5 लाख रुपए तक की राशि क़र्ज़ के तौर पर दी जाती है। वहीं दूसरी योजना मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना, जिसके तहत सूबे के अल्पसंख्यक युवाओं को स्किल डेवेलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है।

मोहम्मद मोईज़ुद्दीन (Md Moeezuddin, Managing Director BSMFC ) ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोज़गार देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इन योजनाओं को चलाया है।

किसी जमाने में हाथी का दांत रहे बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम ने इतिहास रच दिया है. उसने अल्पसंख्यक बेरोजगारों को ऋण देने के 35 वर्षों के सारे रिकार्ड को तोड़ दिये हैं. इस उपलब्धि पर निगम के प्रबंध निदेशक मोहम्मद मोइजुद्दीन की खूब सराहना हो रही है.

मोहम्मद मोईज़ुद्दीन ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम के प्रबंध निदेशक का पद पिछले 8 महीने पहले संभाला था. और इस 8 महीने में निगम ने मुख्यमंत्री रोज़गार ऋण योजना के तहत क़रीब साढ़े तीन हज़ार लगों को इस ऋण का लाभ पहुंचाया है. इसके तहत क़रीब साठ करोड़ पैंसठ लाख रुपए इन लोगों को अपने रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए दिए हैं।

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इस वित्तीय वर्ष में दी गई ये राशि 1984 से लेकर अबतक की क़रीब 35 वर्षों में बांटी गई सबसे बड़ी राशि है, जिसका लाभ युवाओं को अपना रोज़गार बढ़ाने में मिलेगा साथ ही वह अपने क्षेत्र में रोजगार सृजन कर लोगों को रोज़गार भी दे सकेंगे।

बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम, हज भवन पटना

किसे मिलता है कर्ज

इसका लाभ उन लोगों को मिलता है जो अपने ज़िला कार्यालय में इसके लिए आवेदन करते हैं या फिर बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम की वेबसाइट पर भी ऑनलाईन आवेदन किया जा सकता है। प्रतिभागियों का चयन ज़िले की चयन समिति के द्वारा होता है जिसका अध्यक्ष डीडीसी होता है। इस ऋण के लिए आवेदन वही कर सकते हैं जिनकी सालाना आमदनी चार लाख रुपए से कम हो।

लॉकडाउन में बांटे गये सात सौ लोगों को कर्ज

मोहम्मद मोईज़ुद्दीन ने बताया की लॉकडाउन के दौरान भी, निगम की दफ़्तर में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए एवं कोरोना बचाव के सारे निर्देशों के पालन के साथ भी काम किया गया और इस दौरान भी लगभग सात सौ लोगों को इस ऋण का लाभ दिया गया। सरकार की इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समाज में फैली बेरोज़गारी को दूर करना है।

एक सवाल के जवाब में मोहम्मद मोईज़ुद्दीन ने बताया कि मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना पर सरकार ने लगभग 53 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं। इस योजना के तहत अबतक लगभग 2582 लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिसके बाद इन युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होती है.

इस योजना के तहत वैसे इंजीनियर को भी कई तरह के स्किल सिखाए जाते हैं जिन्हें इंजीनियरिंग के बाद भी नौकरी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि इस स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम में ट्रेनिंग लेने के बाद एक इंजीनियरिंग की छात्रा को बेंगलोर में किसी प्रइवेट कंपनी में नौकरी हुई और उसे लगभग 14 लाख रुपए का सालाना पैकेज ऑफ़र हुआ।

उन्होंने कहा कि सरकार इस ओर काफ़ी ध्यान दे रही है और अल्पसंख्यक युवाओं में फैली बेरोज़गारी दूर करना हमारा मक़सद है जिससे न सिर्फ़ अल्पसंख्यक समाज बल्कि पूरे बिहार के युवा अत्मनिर्भर हो सकें।

गौरतलब है कि अल्पसंख्यक वित्त निगम बेरोजगार युवाओं को न्यूनतम ब्याज पर कर्ज मुहैया करता है.

Equbal Major, Leader JDU

बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम की इस उपलब्धि पर जदयू के वरिष्ठ नेता व नवादा जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष मेजर इकबाल हैदर खान( Major Equbal Haidar Khan) ने प्रबंध निदेशक मोहम्मद मोइजुद्दीन की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से लॉकडाउन में भी बेरोजगारों को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना यह दर्शाता है कि निगम अपने कर्तव्य के मामले में किनात संजीदा है. इकबाल मेजर ने कहा कि आदर्णीय नीतीश जी की सरकार में अल्पसंख्यकों के विकास के लिए हर मोर्चे पर काम हो रहा है.

इकबाल हैदर खान ने अल्पसंख्यक समुदाय के बेरोजगार युवाों से अपील की कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में आवेदन करें ताकि उन्हें लाभ मिल सके.

वहीं जदयू अल्पसंख्यक सेल के महासचिव अब्दुल बाकी ने निगम की इस उपलब्धि पर निगम के अफसरों व कर्मियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के न्याय के साथ विकास को धरातल पर उतारने में अधिकारियों की अहम भूमिका होती है जिसे मोइजुद्दीन साहब के नेतृत्व में काफी निष्ठा से पूरा किया जा रहा है.

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