बांग्लादेशी मुहाजिर मूल के बिप्लब ने संभाली त्रिपुरा सीएम की कुर्सी,सोशल मीडिया में छिड़ी बहस, मामा हुए खुश

त्रिपुरा में भाजपा के युवा नेता बिप्लब कुमार देब मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं. 48 वर्षीय देब की चर्चा आम जन के अलाव सोशल मीडिया पर भी हो रही है. मीडिया में यह बहस छिड़ी है कि उनका परिवार बांग्लादेशी मुहाजिर है.
नौकरशाही मीडिया
  
देब ने इससे पहले किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त नहीं की थी. उनके मां-बाप पाकिस्तान के विभाजन के बाद भारत आ गये और वहीं बस गये. बांग्लादेश के अखाबर ढाका ट्रिब्यून इस नेता के इतिहास औऱ उनकी पृष्ठभूमि पर खूब चर्चा कर रहा है. अखबार यहां तक बता रहे हैं कि उनके सगे चाचा अब भी बांग्लादेश में ही रहते हैं.
 
ढ़ाका ट्रिब्यून ने बांग्लादेश में बिप्लब के सगे मामा प्रंधन देब से संपर्क किया, जो कुछुआ उपजिला के हिंदू-क्रिश्च्यन-बुद्धुस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष हैं. विपल्ब के मामा ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारा भांजा भारत के एक प्रांत के सबसे बड़े पद पर पहुंचा है. उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में ऐसी उपलब्धि आसान नहीं है.
खास बात यह है कि पिछले वर्ष बंगलादेश अवामी लीग की मीटिंग में बिप्लब देव अपनी पत्नी निति रानी के साथ वहां गये थे. इस दौरान उन्होंने अपने पैतृक घर भी गये थे.
बिप्लब कुमार देवब का जन्म काकराबन, उदयपुर में हुआ जो आज गोमती जिला है. हालांकि उनके माता-पिता का संबंध में बांग्लादेश के चांदपुर के कचुया उपजिला से रहा है. वे अपने प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. एक भारतीय राज्य के उनके मुख्यमंत्री बनने के सफर बांग्लादेश के अखबार ढाका ट्रिब्यून ने उन पर स्टोरी लिखी है कि उनका रिश्ता किस तरह बांग्लादेश से रहा है. ढाका ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, उनके पिता हिरूधन देव और मां मीना रानी देव 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के दौरान बांग्लादेश से विस्थापित होकर भारत चले गये थे. उनका नाता बांग्लादेश के मेघडेर गांव से रहा है.
 
बिप्लव कुमार देब शुरू से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उन्होंने सतना के भाजपा सांसद गणेश सिंह के निजी सचिव के रूप में करीब 10 सालों तक काम किया. वे संघ परिवार के विचारक रहे गोविंदाचार्य से भी जुड़े रहे हैं और उनकी प्रेरणा से संगठन के लिए काम करते रहे हैं. बिल्पव कुमार देब को एक नेता के रूप में स्थापित करने में त्रिपुरा के भाजपा प्रभारी सुनील देवधर का बड़ा योगदान है. देवघर ही त्रिपुरा जीत के मुख्य रणनीतिकार थे. देवधर लगातार ट्विटर पर विपल्ब की प्रशंसा में पोस्ट कर रहे हैं.
 
बंग्लादेशी घुसपैठिये के नाम पर दोहरी राजनीति करने वाली भाजपा के लिए अब इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियाों के लिए आक्रमण का मुद्दा मिल गया है.
 
विप्लव कुमार देव ने त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की है और फिर मास्टर डिग्री के लिए दिल्ली चले गये. उन्होंने पश्चिमी त्रिपुरा की बनमालीपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और तृणमूल कांग्रेस के कुहेली दास को चुनाव हराया. 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 43 सीटें मिली.

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