भाजपा की दबाव की राजनीति का सामना करके मजबूत हुए तेजस्वी

भाजपा की दबाव की राजनीति का सामना करके मजबूत हुए तेजस्वी

आज की नई पीढ़ी के नेताओं में तेजस्वी यादव का कद काफी बढ़ गया है। दरअसल उन्होंने दबाव की राजनीति या साजिश जो कहें, उसका सामने से मुकाबला किया।

कुमार अनिल

देश के कई बड़े पत्रकार कल से कहने लगे हैं कि तेजस्वी यादव परिपक्व नेता की तरह दिख रहे हैं। दरअसल यह अचानक नहीं हुआ। पिछले पांच वर्षों में तेजस्वी यादव ने बहुत तरह के दबाव झेले। भाजपा के आरोप, सीबीआई के छापे, ईडी की कार्रवाई सबका सामना किया। यही नहीं अपने परिवार और पार्टी को भी एकजुट रखा। क्रिकेट में बल्लेबाजों को दबाव के आगे संयम के साथ खेलना सिखाया जाता है। जरूर उन्होंने क्रिकेट की सीख और पिता के धैर्य से सीखा होगा।

जो भी हो, पर इन दबावों ने तेजस्वी यादव को निखार दिया। कल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पद से इस्तीफा देकर राबड़ी आवास पहुंचे, तो पत्रकारों ने ताबड़तोड़ सवाल किए। मुश्किल से डेढ़ मिनट में तेजस्वी यादव ने जिस तरह बिहार और देश की राजनीति और राजनीतिक चुनौतियों को समेट दिया, उसे राजनीतिक विश्लेषकों ने तेजस्वी की परिपक्वता के रूप में देखा।

मई में 18 साल पुराने मामले में राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई का छापा पड़ा। यह वह समय था, जब चह चर्चा आम थी कि तेजस्वी और नीतीश कुमार मिलकर सरकार बना सकते हैं। कुछ दिनों बाद लालू प्रसाद के सबसे करीबी भोला यादव के यहां छापा पड़ा। तेजस्वी यादव ने इन छापों का राजनीतिक जवाब दिया। जातीय जनगणना पर उन्होंने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया। नीतीश कुमार पर भी दबाव बनाए रखा। नीतीश भी चाहते ही थे और तेजस्वी के भाजपा पर दबाव ने उन्हें जातीय जनगणना को कैबिनेट से पास कराने में मदद दी।

इससे पहले 2020 के विधानसभा चुनाव में अकेले दम उन्होंने जिस तरह अभियान चलाया, वह न सिर्फ उनकी स्टेमिना दिखाता है, बल्कि जिन मुद्दों पर जोर दिया, वह भी खास था। थोड़ी सीटों से पिछड़ गए, लेकिन हिम्मत न हारी।

तेजस्वी ने उदारता भी दिखाई। एक बड़े पत्रकार ने अखिलेश यादव के बारे में ट्वीट किया कि वे तेजस्वी से सीखें। उन्होंने कांग्रेस से तालमेल नहीं किया, जबकि तेजस्वी ने सारे विरोधी दलों को जोड़ा।

तेजस्वी यादव पर जब-जब दबाव बनाने की कोशिश की गई, वे जनता के बीच गए। जन मुद्दों को उठाया। यही नहीं, उन्होंने इस दबाव का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय राजनीति में भी शिरकत की। बंगाल से तमिलनाडु तक गए और सियासी संबंध बनाए।

इधर, राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा-लालू प्रसाद ने अडवाणी के रथ को रोककर विभाजनकारी शक्तियों को रोकने का काम किया था।‌ तेजस्वी यादव ने भाजपा के रथ को रोककर उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया है। गगन ने यह भी कहा कि महागठबंधन की सरकार को राज्य के चौदह करोड़ लोगों का आशीर्वाद प्राप्त है। और यह‌ सरकार जनता के विश्वास पर खड़ी उतरेगी। बिहार की इस‌ पहल से देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था रखने वाले लोगों को एक नयी उर्जा मिलेगी ।‌ बिहार से भाजपा के पतन का सिलसिला जो शुरू हुआ है इसका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर पड़ेगा।

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