क्या भाजपा ने चिराग को इस्तेमाल किया – अब आएंगे लोजपा-राजद एक साथ ?

क्या भाजपा ने चिराग को इस्तेमाल किया – अब आएंगे लोजपा-राजद एक साथ ?

शाहबाज़ कि इनसाइड पोलिटिकल स्टोरी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बी टीम बताये जाने वाले लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के करीब होती दिख रही है. भाजपा ने पहले जदयू के बराबर सीटें हासिल करने के लिए चिराग पासवान का इस्तेमाल किया अब बयानों के ज़रिये उनसे पीछा छुड़ाने की रणनीति पर अमल किया जा रहा है.

महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मेदवार तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने समाचार एजेंसी ANI से लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का समर्थन करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के साथ अन्याय किया है. तेजस्वी ने कहा कि चिराग पासवान को अपने पिता की जरूरत पहले से ज्यादा इस समय है। रामविलास पासवान जी हमारे बीच नहीं हैं और हम इससे दुखी हैं। नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के साथ अन्याय किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने हाल ही में साफ़ कह दिया कि लोजपा NDA गठबंधन का हिस्सा नहीं है और नीतीश कुमार ही NDA के CM फेस होंगे चाहे भाजपा को जदयू से कम सीटें क्यूँ न मिले. अमित शाह का बयान भाजपा के डर कि तरफ इशारा कर रही है कि भाजपा के खिलाफ देश भर में बह रही हवा का असर बिहार पर भी हो सकता है इसलिए ऐसी हालत में भाजपा के लिए नीतीश ज़रूरी हैं.

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इस बयान के बाद चिराग पासवान ने ट्विटर पर कई वक्तव जारी किये जिसे गौर से देखने पर पता चलता है कि चिराग भाजपा द्वारा खेले गए खेल से काफी आहात हैं. चिराग ने तो यहाँ तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमारे दिल में बसते हैं. वह अपना गठबंधन धर्म निभाएं वह चाहे तो मेरे खिलाफ भी बोल सकते हैं. चिराग का यह बयान तब आया है जब भाजपा कि तरफ से उन्हें ‘वोटकटवा’ बताया गया.

लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन पर राजद परिवार कि और से गहरी संवेदना प्रकट कि गयी थी. राजद अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने जहाँ ट्विटर पर दुःख व्यक्त किया वहीं उनकी पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी शोक जताया था. राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर अपने वक्तव्य में दिवंगत रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि दी थी. तेजस्वी उनके अंतिम संस्कार के दिन भी मौजूद रहे थे

चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है. अब जबकि चिराग को भाजपा के धोखे का एहसास हो चूका है इसलिए इस बात कि सम्भावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में दोनों एक साथ हो सकते हैं. राजनीतिक स्तंभकार आशंका जताते हैं कि चिराग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कहने पर ही जदयू के खिलाफ मोर्चा खोला था जिसका फायदा भाजपा को जदयू के बराबर सीटें मिलने से हुआ. लेकिन अब भाजपा देशव्यापी आंदोलनों (किसान बिल और दलितों पर अत्याचार) के कारण घटते जनाधार को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहारे ही आगे बढ़ना चाहती है.

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लिहाज़ा अब भाजपा के स्कीम ऑफ़ थिंग्स (Scheme of Things) में लोजपा के लिए कोई गुन्जायिश नहीं है. इसको देखते हुए चिराग पासवान अपनी रणनीति को Recaliberate कर रही है जिसके तहत राजद को एक विश्वासपात्र सहयोगी के तौर पर देखा जा सकता है. राजद ने भी कभी भाजपा और आरएसएस कि नफरत कि राजनीति को हमेशा नकारा है ऐसे में भाजपा के धोखे के शिकार चिराग पासवान का राजद कि तरफ उम्मीद से देखना और तेजस्वी कि Reapproachment Strategy बिना सोंचे समझे नहीं हो सकती है.

चिराग पासवान ने जदयू को भाजपा के कहने पर निशाना बनाकर भाजपा के लिए क़ुरबानी दी. सीटों के बटवारे में भाजपा-जदयू को 121-122 सीटें मिली. क्यूंकि भाजपा ने अंदरूनी रूप से लोजपा को गठबंधन से अलग होना सुनिश्चित करा लिया था. चिराग के अनुसार जब उनके पिता रामविलास पासवान का पार्थिव शरीर पटना लाया गया तब चिराग ने नीतीश के पैर भी छुए लेकिन नीतीश ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी इससे यह सन्देश मिलता है कि नीतीश बिहार में भाजपा को अपने बराबर कि हैसियत दिलाने में चिराग कि अहम् भूमिका मानते हैं.

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