#BPSCEPaperLeak तह तक पहुंची जांच,दस दिन में होगा खुलासा

#BPSCEPaperLeak तह तक पहुंची जांच,दस दिन में होगा खुलासा

#BPSCEPaperLeak मामले में मीडिया के एक हिस्से में खबर है कि जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. लेकिन नौकरशाही डॉट कॉम को मिली जानकारी बताती है कि जांच पिन प्वाइंट तक पहुंच चुकी है.

BPSCPaperLeak की जांच EUP कर रही है

इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

इस मामले में अगले आठ से दस दिनों में खुलासा हो सकता है. आर्थिक अपराध इकाई ( Economic Offence Unit EOU) का जांच दल पेपर लीक मामले के सरगना तक बहुत जदल्द पहुंचने वाला है.

सूत्र का कहना है कि #BPSCEPaperLeak को बड़ी ही सुनियोजित और से प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया गया है. इस अपराध को जिस तरह से अंजाम दिया गया है उससे कुछ वर्ष पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षा में फर्जीवाड़े की याद ताजा कर दी है.

आठ मई को आयोजित हुई 67वीं BPSC संयुक्त परीक्षा में पेपर लीक हुआ. आरा के वीर कुअंर सिंह कॉलेज के सेंटर पर समय से करीब आधा घंटा पहले सी सेट का क्वेश्चन पेपर बांट दिया गया. जिस कमरे में यह परीक्षा शुरू हुई उसमें कोई 25 परीक्षार्थी थे जबकि बाकी तमाम परीक्षार्थियों को नर्धारित समय से आधा घंटा बाद में प्रश्नपत्र दिया गया. ईओयू का विशेष जांच दल इसी महत्वपूर्ण बिंदु के इर्द-गिर्रद अपनी जांच को केंद्रित किया हुआ है. एक तरफ उन 25 परीक्षार्थियों को गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है वहीं उनमें से अनेक से पूछताछ की जा चुकी है. ईओयू की जांच मुख्य रूप से दो ऐंगल पर केंद्रित है; एक उक्त परीक्षा केंद्र के उस कमरे में जहां एक खास ग्रूप के परीक्षार्थियों को समय से पहले एक ही सेट यानी सी सेट का प्रश्नपत्र दिया गया. दूसरा, परीक्षा केंद्र के अधिकारी. इनमें प्रिंसिपल, परीक्षा सुपरिनटेंडेंट और मजिस्ट्रेट ,बड़हड़ा के प्रखंड विकास अधिकारी जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है.

BPSC पेपर लीक : भोजपुर के बीडीओ सहित चार गिरफ्तार

आर्थिक अपराध इकाई को पक्का भरोसा हो चुका है कि पेपर लीक का एक सिरा भले ही कहीं और हो, लेकिन दूसरा और अंतिम सिरा वीर कुंअर सिंह कालेज का परीक्षा केंद्र ही है. ऐसे में एसआईटी की टीम दूसरे सिरे से पहले सिरे की तरफ अपनी जांच का दायरा केंद्रित रख रही है. ऐसे में जांच का दायरा बढ़ा कर वह अपना समय और ऊर्जा बेवजह खर्च नहीं करना चाहती. सूत्र का कहना है कि जांच के क्रम में भले ही कुछ नये तथ्य और नये ऐंगल सामने आ जायें लेकिन जांच की दिशा बेवजह बदलने की जरूरत नहीं है.

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