Brain Death से पूर्व हार्ट व लीवर दान कर बिहार के सौरभ ने रचा इतिहास,दो लोगों को दी जिंदगी

Brain Death से पूर्व हार्ट व लीवर दान कर बिहार के सौरभ ने रचा इतिहास,दो लोगों को दी जिंदगी

बिहार का पहला ब्रेनडेथ घोषित नालंदा के हिलसा निवासी सौरभ प्रतीक (19 वर्ष) के अंगों का दान कर उनके परिजनों ने एक नया इतिहास रच दिया है। सौरभ के अंगों से 7 लोगां को नई जिन्दगी मिलेगी। उसके हार्ट को सफलतापूर्वक निकाल कर प्रत्यारोपण के लिए आरएनटी, कोलकाता तथा लिवर को आईएलबीएस,नई दिल्ली भेज दिया गया है। किडनी और कॉर्निया का प्रत्यारोपण आईजीआईएमएस,पटना में ही होगा.

यह मामला बिहार के लिए अपने आप में पहला उदाहरण है जब ब्रेनडेथ घोषित होने के बाद किसी व्यक्ति के हार्ट और लीवर को निकाल कर तत्काल कोलकाता और दिल्ली के दो अलग-अलग मरीजों की जान बचाने के लिए भेज दिया गया.

इस अवसर पर बजाब्ता एक  ‘ब्रेनडेथ ऑर्गन डोनेशन’  गोष्ठी का आयोजन किया गया था. इस अवसर बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी मौजूद थे. आईजीआईएमएस में ‘ब्रेनडेथ ऑर्गन डोनेशन’ पर आयोजित संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि आज ही पहली बार ब्रेन डेथ घोषित मरीज सौरभ प्रतिक के दो अंगों से दो लोगों की जिंदगी बचाई गयी.

 

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श्री मोदी ने कहा कि ब्रेनडेथ घोषित किसी मरीज के अंगों को परिजनों की सहमति से दान करने की इस पहली घटना से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। आईजीआईएमएस की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यहां अब तक 40 किडनी और करीब 250 कॉर्निया का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया जा चुका है।

तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में किसी मरीज का ब्रेनडेथ होता है तो उसे ब्रेनडेथ घोषित करना अनिवार्य है। देह और अंगदान करना परिजनों की सहमति पर निर्भर करता है। 2008 में ही वहां के 3 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ब्रेनडेथ घोषित करना अनिवार्य कर दिया गया था। तमिलनाडु की तर्ज पर पटना के आईजीआईएमएस, पीएमसीएच और एनएमसीएच को अनिवार्य रूप से ब्रेनडेथ घोषित करने के लिए नामित किया जा सकता है।

आईजीआईएमएस के बाद पीएमसीएच में आई बैंक खोला जा चुका है तथा राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी शीघ्र इसकी स्थापना हो जायेगी। मगर अंगदान, नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक करने जरूरत है। चिकित्सक समुदाय को अंगदान, नेत्रदान के लिए आगे आना चाहिए।
अंगदान के लिए राज्यस्तर पर एक निष्ठावान टीम बनाने, कुछ डॉक्टरों को तमिलनाडु व कर्नाटक भेज कर अंगदान का अध्ययन कराने व मानक प्रक्रिया अपनाने का उन्होंने सुझाव दिया।

कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, आईजीआईएमएस के निदेशक डा. एन आर बिस्वास ने भी सम्बोधित किया। बैठक में आईजीआईएमएस के अलावा मेडिकल कॉलेज दरभंगा, गया, मुजफ्फरपुर और एम्स पटना की ब्रेनडेथ कमिटी के सदस्य चिकित्सकों ने भाग लिया।

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