दिल्ली हाई कोर्ट ने लगायी “नौकरशाही जिहाद” के प्रसारण पर रोक

शाहबाज़ की कवर स्टोरी

विवादस्पद सुदर्शन न्यूज़ टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके “नौकरशाही जिहाद” प्रोग्राम चलाकर बुरे फँस गए है. देश की सिविल सेवा में मुस्लिम उम्मीदवारों के चयन को “नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ बताने वाले दंगाई पत्रकार सुरेश चव्हाणके की कई नौकरशाह घोर निंदा कर रहे हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई “नौकरशाही जिहाद” प्रोग्राम पर रोक

बड़ी खबर आ रही है की दिल्ली हाई कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज़ चैनल पर सिविल सेवाओं में मुसलमानों के चयन पर सवाल उठाने वाले “नौकरशाही जिहाद” कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी है.

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश नवीन चावला ने यह फैसला सुनाया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस प्रोग्राम पर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस कार्यक्रम के प्रसारण के ख़िलाफ़ स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है .

दरअसल सुरेश चव्हाणके अपने चैनल पर हाल ही में आये देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा रिजल्ट में 5 % मुस्लिम उम्मीदवारों के चयन को “नौकरशाही जिहाद” प्रचारित कर रहे थे जिसपर हुए विवाद से सोशल मीडिया पर कोहराम मचा हुए है। कई नामचीन हस्तियों और नौकरशाहों ने उनके ऊपर कानूनी कार्यवाई की मांग उठा रहे है।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एनसी अस्थाना ने कहा, “अखिल भारतीय सेवाओं के लिए अधिकारियों के चयन में यूपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की अखंडता और निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए, वह शासन की संवैधानिक योजना के लिए अप्रभाव फैला रहे हैं।”

छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आरके विज ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं और वीडियो को “घृणित” कहा है। “घृणा फैलाने वाली घृणित कोशिश। धर्म के आधार पर अधिकारियों की साख पर सवाल उठाना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि इसे सख्त कानूनी प्रावधानों से भी निपटा जाना चाहिए”।

इंडियन पुलिस फाउंडेशन (IPF) ने कहा, “IAS / IPS में शामिल होने वाले अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के खिलाफ नोएडा के एक टीवी चैनल पर की गई नफरत भरी कहानी खतरनाक कट्टरता है। हम इसे रीट्वीट करने से बचते हैं क्योंकि यह शुद्ध विष है। हमें उम्मीद है कि समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण, यूपी पुलिस और संबंधित अधिकारी सख्त कार्रवाई करेंगे। ”

“नौकरशाही जिहाद” मामले पर आईपीएस एसोसिएशन ने सुरेश चव्हाणके की दंगाई पत्रकारिता की कड़ी निंदा करते हुए कहा की “सुदर्शन टीवी द्वारा धर्म के आधार पर सिविल सेवाओं में उम्मीदवारों को टारगेट करने वाली एक समाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। हम इस प्रकार के सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना पत्रकारिता की निंदा करते हैं”।

जामिआ यूनिवर्सिटी ने शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है की जामिआ यूनिवर्सिटी की छवि करने के आरोप में सुदर्शन टीवी न्यूज़ के संपादक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ कानूनी कार्यवाई होनी चाहिए। जामिआ की वाईस चांसलर नज्म अख्तर ने कहा की “हम उन्हें बहुत अधिक महत्व नहीं देना चाहते हैं। जहां तक ​​हमारे छात्रों का संबंध है, जामिआ की आवासीय कोचिंग अकादमी के 30 छात्रों को इस बार चुना गया था, जिनमें से 16 मुस्लिम और 14 हिंदू हैं। चूँकि उन सब को जिहादी कहा गया। इसका मतलब यह हुआ की 16 मुस्लिम जिहादी थे और 14 अन्य हिंदू भी । भारत में जिहादियों की नई धर्मनिरपेक्ष परिभाषा दी गई है। ”

इस से पहले जामिआ टीचर्स एसोसिएशन (Jamia Teachers’ Association) तो सुरेश चव्हाणके के ऊपर केस करने का मन बना चुकी है। जामिआ यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के समूह ने यूनिवर्सिटी से अनुरोध किया है की सुरेश चव्हाणके के खिलाफ मानहानि का मुकदमा (Criminal Defamation Suit) दायर करे. जामिआ टीचर्स एसोसिएशन ने साफ़ कहा है की सुरेश चव्हाणके अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किये गए वीडियो में संविधानिक संस्था संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission ) द्वारा चयन प्रक्रिया पर अत्यधिक आपत्तिजनक शब्दों में आरोप लगा रहे है.

एसोसिएशन के अनुसार यह भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में मुसलमानों की भर्ती को टारगेट करता है और उनके लिए “जिहादी” शब्द का इस्तेमाल किया है। जामिया की आवासीय कोचिंग अकादमी को खराब रोशनी में खींचते हुए, सुरेश चव्हाणके ने जामिया से चुने गए भारतीय अधिकारियों को “जामिया के जिहादी” कहा। सुदर्शन न्यूज के उक्त सीएमडी द्वारा कई अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जो खुले तौर पर उकसाते हैं, साथी नागरिकों के खिलाफ जहर उगल रहे है और भारत के लोगों को विभाजित करने की कोशिश कर रहे है।

टीवी शो होस्ट तहसीन पूनावाला (Tehseen Poonawalla) ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में सुरेश चव्हाणके के खिलाफ कानूनी कार्यवाई की मांग उठाते हुए कहा है की यह “धार्मिक हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया है”.

याद दिला दें मेनस्ट्रीम मीडिया के न्यूज़ चैनेलो ने मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन में धार्मिक सभा के लिए देश विदेश से आये तब्लीगी जमात को लोगो पर “कोरोना जिहाद” , कोरोना फैलाने का इलज़ाम लगाकर उन्हें देशद्रोही करार दे दिया था। एक बीजेपी के नेता ने तो उन्हें गोली मार देने योग्य बात कह दी थी। लेकिन इसपर हाल ही में आये बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले ने इन दंगाई पत्रकारों के चेहरे को काला कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने न सिर्फ मरकज़ के लोगो पर कोरोना फैलाने के आरोप को गलत बताया बल्कि फैसले में यहाँ तक कह दिया की तब्लीगी जमात के लोगो को बलि का बकरा बनाया गया है।
याद दिला दें मेनस्ट्रीम मीडिया के न्यूज़ चैनेलो ने मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन में धार्मिक सभा के लिए देश विदेश से आये तब्लीगी जमात को लोगो पर “कोरोना जिहाद” , कोरोना फैलाने का इलज़ाम लगाकर उन्हें देशद्रोही करार दे दिया था। एक बीजेपी के नेता ने तो उन्हें गोली मार देने योग्य बात कह दी थी। लेकिन इसपर हाल ही में आये बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले ने इन दंगाई पत्रकारों के चेहरे को काला कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने न सिर्फ मरकज़ के लोगो पर कोरोना फैलाने के आरोप को गलत बताया बल्कि फैसले में यहाँ तक कह दिया की तब्लीगी जमात के लोगो को बलि का बकरा बनाया गया है।

“नौकरशाही जिहाद” मामले पर कोहराम मचते ही सुरेश चव्हाणके ने सफाई देनी शरू कर दी। उसने ट्वीट किया की “हम वर्तमान में कार्यरत IAS /IPS अधिकारियों के विरुद्ध नहीं बोल रहे हैं.. हम नियुक्ति प्रक्रिया में भेदभाव और षड्यंत्र पर प्रश्न उठा रहे हैं”.

दंगाई सुदर्शन न्यूज़ ने ऐसा क्या ज़हर उगला की हुआ बवाल

भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की नूर रहमान शेख ने कहा की
मैंने तीन बार UPSC पास किया है; 1997 में NDA, 2003- आईआरएस; 2004- IFS। यह सबसे पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला संस्थान है। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवार का धर्म नहीं बल्कि उसकी योग्यता और अखंडता भूमिका निभाता है। UPSC पर शक करने वालों के खिलाफ कार्यवाई होनी चाहिए।

याद दिला दें विवाद की असली वजह सिविल सेवा परीक्षा के रिजल्ट में कुल सफल उम्मदवारो में से 5% मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए जो पिछले साल की तुलना में 1% ज़्यादा है. जानकार इसे मुस्लिम समाज के शिक्षा की तरफ बढ़ते झुकाव का नतीजा मानते है। “लेकिन सुरेश चव्हाणके जैसे पत्रकार इसे “नौकरशाही जिहाद” बताकर देश में मुसलमानो के खिलाफ नफरत फैला रहे है”।

बता हैं की हाल ही में जारी किये गए सिविल सेवा परिणामो में कुल 829 उम्मीदवारों ने इस प्रितिष्ठित परीक्षा को पास किया की है जिनमें से 42 मुस्लिम हैं। जो कुल सफल उम्मदवारो का 5% है। पिछले साल चुने गए मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 28 थी यह भर्ती किए गए 759 उम्मीदवारों में का 4 प्रतिशत था ।
2020 सिविल सेवा परिणाम में सफना नाज़ुद्दीन मुस्लिम उम्मदवारो में अव्वल रही है उन्हें 45 वा स्थान मिला है। जो पिछले वर्ष 28 चयनों से बढ़ी हैं। 2016 के बैच में कुल 50 मुस्लिम उम्मदवारो ने अंतिम सूचि में जगह बनायीं थी।

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