कार्डियक अरेस्ट होने पर छाती को बीचोबीच दबाएं-डॉ. अमरनाथ

कार्डियक अरेस्ट होने पर छाती को बीचोबीच दबाएं-डॉ. अमरनाथ

एडवांटेज केयर मिशन हेल्थ की पहल में इस बार डॉ. अमरनाथ साव दे रहे हैं हार्ट की पूरी जानकारी। साथ ही किसी को हार्ट या कार्डियक अरेस्ट होने पर क्या करें?

डॉ. अमरनाथ साव, रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल, पटना

परिचयः डॉ. अमरनाथ साव पटना के प्रतिष्ठित रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में कार्डियक सर्जन हैं। अबतक ये हृदय, फेफड़ा और वेस्कुलर के 2000 ऑपरेशन कर चुके हैं। सिर्फ रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में भी 1300 ऑपरेशन किए हैं। इन्होंने कोलकाता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस, एमएस और एमसीएच(सीटीवीएस) की पढ़ाई की। 2015 में पढ़ाई खत्म करने के बाद दरभंगा स्थित पारस अस्पताल ज्वाइन किया। वहां उत्तर बिहार का पहला हार्ट ऑपरेशन किया। बाद में पटना के पारस अस्पताल में ज्वाइन किया। पिछले तीन वर्ष से रूबन मेमोरियल अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। इनकी स्कूली शिक्षा कोलकाता में ही हुई है। वैसे मूल निवासी बिहार के हैं।

प्रश्नः हृदय शरीर में क्या काम करता है?

उत्तरः दिल और दिमाग शरीर को नियंत्रित करता है। हृदय खून को पंप कर के उसे शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचाता है।

प्रश्नः हृदय की बनावट कैसी होती है?

उत्तरः हृदय में चार चेंबर होते हैं। हार्ट के दोनो तरफ दो-दो चेंबर रहते हैं। दोनों ओर से एक-एक वेसेल निकलता है। बाएं भाग वाला वेसेल पूरे शरीर और मस्तिष्क को खून पहुंचाता है। वहीं दाएं भाग वाला वेसेल फेफड़ा को खून पहुंचाता है। दाएं और बाएं ओर का वेसेल फेफड़ा से जुड़ा होता है। दाईं ओर से डिऑक्सीजनेटेड खून निकल कर फेफड़ा में जाता है। वहां इसका शुद्धिकरण होता है। फिर वो हृदय के बाएं हिस्से के चेंबर में आता है। बाएं वेंट्रिकल से जुड़े नस से ऑक्सीजनेटेड खून पूरे शरीर में फैलता है।

प्रश्नः हर्ट अटैक या हृदयाघात क्या होता है?

उत्तरः हृदय पर तीन बड़ी नसें होती हैं। इसमें बाधा या ब्लॉकेज होता है तो हृदय को रक्त प्रवाह सही से नहीं मिल पाता है। ऐसे में व्यक्ति थकेगा। लोगों को लगेगा एसिडिटी हो रहा है और वो एसिडिटी का दवा लेगा। छाती, कंधा, गर्दन, पीठ आदि में दर्द होगा। इस स्टेज को लोग नजरअंदाज करते हैं। यदि इसी स्टेज में लोग इलाज लें तो समस्या ठीक हो सकती हे। लेकिन दर्द निवारक दवा खाकर लोग ठीक कर लेते हैं। एक समय ऐसा आता है कि दर्द नियंत्रण से बाहर हो जाता है। तबतक ब्लॉकेज काफी बढ़ चुका होता है। इसे हृदय सह नहीं पाता है। फिर काफी दर्द होता है, पसीना आता है, उल्टी होती है, धड़कन अनियंत्रित हो जाती हैय इसी का हृदयाघात या हर्ट अटैक कहते हैं।

प्रश्नः हृदय में ब्लॉकेज क्या होता है?

उत्तरः अनियंत्रित खानपान और शारीरिक श्रम नहीं करने से हृदय को खून आपूर्ति करनेवाले नस कोरोनरी आरट्री में लेयर जमने लगता है। यह वसा होता है। एक समय ऐसा आता है जब यह नस काफी संकरा हो जाता है। इसी को ब्लॉकेज कहते हैं। जब इससे खून की आर्पूित बंद हो जाती है तो हृदयाघात होता है।

प्रश्नः हृदयाघात के लक्षण होने पर क्या करें?

उत्तरः तत्काल डॉक्टर खासकर हृदय के डॉक्टर से मिलना चाहिए। गैस की दवा खाकर नहीं छोड़ना चाहिए। हृदयाघात उनलोगों के देखने को मिलता है, जिनके खून के रिश्ते में ऐसे केस रहे हों। उच्च रक्तचाप और मधुमेह होने पर भी हृदयाघात का डर रहता है।

प्रश्नः हृदयाघात होने पर कितनी देर तक आदमी जिंदा रह सकता है?

उत्तरः गोल्डेन ऑवर(अति महत्वपूर्ण समयावधि) एक घंटा का होता है। इतने देर में जहां एंजियोप्लास्टी होता है वहां पहुंचना चाहिए। इस अवधि में इलाज हो जाने पर रिजल्ट काफी अच्छा रहता है। एक तरह का तार हृदय के नस को खोला जाता है। कई बार ऐसा एंजियोग्राफी जांच होने पर एंजियोप्लास्टी संभव नहीं दिखता तब बाईपास सर्जरी करनी पड़ती है।

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प्रश्नः बाईपास सर्जरी क्या होता है?

उत्तरः नस हृदय के ऊपर चिपका होता है। यदि कोई नस ब्लॉक हो गया है। लेकिन उसे हटाया नहीं जा सकता है। ऐसे में हृदय के उस भाग को खून की आपूर्ति देने के लिए नस लगाया जाता है। यह नस हाथ-पैर से निकाला जाता है।

प्रश्नः एंजियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी करने में कितना वक्त लगता है?

उत्तरः एंजियोप्लास्टी में लगनेवाला समय ब्लॉकेज पर निर्भर करता है। 15 मिनट से दो घंटा तक का वक्त लग सकता है। इस विधि में नस में स्टेंट लगाया जाता है। बाईपास सर्जरी में चार से पांच घंटा का वक्त लगता है।

प्रश्नः कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

उत्तरः हृदय की धड़कन किसी कारणवश अचानक बिल्कुल रूक जाता है तो उसे ही कार्डियक अरेस्ट कहते हैं।

प्रश्नः कार्डियक अरेस्ट का कारण क्या होता है?

उत्तरः हृदयाघात की वजह से कार्डियक चैंबर में कोई गड़बड़ी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या कारडक्शन बंडल पाथवे एबनॉरमल्टी होने पर कार्डियक अरेस्ट होता है।

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प्रश्नः कार्डियक अरेस्ट को खतरनाक बोला जाता है। जान चली जाती है। कैसे जान बचाई जा सकती है?

उत्तरः कार्डियक अरेस्ट होने पर सीपीआर (छाती के बीच लगातार तेजी से पुश करना) देना होता है तब बच सकते हैं। सीपीआर से मस्तिष्क को खून मिलने लगता है। सीपीआर तब तक जारी रखना है जब तक हाॅस्पिटल ना पहुंचे। मस्तिष्क को कुछ मिनट खून नहीं मिलेगा तो वह मृत हो जाएगा।

प्रश्नः फेफड़ा और हृदय में क्या अंतर है?

उत्तरः फेफड़ा खून का शुद्धिकरण करता है जबकि हृदय उस खून को पूरे शरीर में पहुंचाता हे। दोनों एक साथ काम करता है।

प्रश्नः आपकी हॉबी क्या है?

उत्तरः पेंटिंग, संगीत सुनना, साइकलिंग और जूडो-कराटा खेलना।

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