खुला-मंच

इस रिटायर्ड आईपीएस का कहना है बलात्कार की असल जिम्मेदार तो पुलिस और न्यायपालिका हैं

दिल्ली सामुहिक बल्त्कार कांड से व्यथित तो सारा देश है.पर बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ध्रुव गुप्ता की व्यथा कुछ अलग किस्म की है.उनका मानना है कि देश में बलात्कार के असल जिम्मेदार भारतीय पुलिस और न्यायपालिका हैं. एक पुलिस अधिकारी रहे गुप्ता की यह टिप्पणी पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है. ध्रव गुप्ता यहीं नहीं ...

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“अलविदा पापा… मैं जा रही हूं”

अरुण कुमार मयंक सोनिया की खुदकुशी के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं जो यह सबित करती है कि कभी-कभी उच्चशिक्षा व हाईप्रोफाइल जॉब कुछ लड़कियों के लिए कैसे अवसाद का कारण बन जाते हैं. नामसोनिया.उम्र 26 वर्ष.आकर्षक चेहरा.कुशल व्यवहार.क्लिनिकल साइकोलॉजी में गोल्ड मेडलिस्ट.बिहारशरीफ समाहरणालय में प्रतिनियुक्त.बाल विकास परियोजना की हाई प्रोफाइल महिला पर्यवेक्षिका.उन्होंने 3 दिसम्बर की अहले सुबह ख़ुदकुशी ...

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विकलांगता: असमर्थता नहीं

एम.एल.हबीबुल्लाह विकलांगजन देश के लिए मूल्य वान संसाधन हैं.उनके लिए ऐसा वातावरण बनाने की ज़रूरत है जिसमें उन्हेंर समान अवसर मिल सके, उनके अधिकारों की रक्षा हो सके तथा समाज में पूरी सहभागिता सुनिश्चित की जा सके. 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीसय विकलांगजन दिवस मनाया जाता है.इसकी शुरूआत 1981 में हुई थी. इस दिवस का उद्देश्या विकलांग लोगों से जुड़े मुद्दों ...

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क्या पूर्वनियोजित था फैजाबाद का दंगा?

फैजाबाद में हुए दंगों की जांच के लिए रिहाई मंच के एक जांच दल ने 28 अक्टूबर को फैजाबाद के कर्फ्यूग्रस्त इलाकों का दौरा किया. जांच दल ने पाया कि दंगा पूर्वनियोजित था, अब तक मिले तथ्यों के आधार पर राजीव यादव बता रहे हैं कि कैसे कुछ लोगों ने शहर को दंगें की आग में झोंक दिया. 21-22 सितंबर ...

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मंत्रियों पर चार्जशीट दाखिल करने वाले लापता एसपी का सुराग मिला

पीडीएस घोटाले की जांच करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकार एमएस चौहान जो अचानक लापता हो गये थे,उनके दिल्ली में होने की खबर मिली है. चौहान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले से गायब हो गये थे. 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी चौहान ने करोड़ों रुपये के पीडीएस घोटाले की जांच के दौरान दौरान पूर्व मुख्यमंत्री गेगांग अपांग समेत 56 लोगों ...

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पीली बत्तीवाले बच्चे

नौकरशाही पर यूं तो बहुत कुछ लिखा और बोला जाता है.पर शायर संजय कुमार कुंदन ने अपनी नज्म में नौकरशाहों को जिस अंदाज में महसूस किया है वह निराला है. शायर ने नौकरशाहों के रोब,ठाठ और आन-बान की सच्ची तस्वीर कैसे पेश की है, आप भी महसूस करें. कुंदन की इस नज्म का शीर्शक तो अब असली आज़ादी आयी है. ...

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