सम्पाद्कीय

पीसीआई रिपोर्ट: खतरे में है बिहार की पत्रकारिता

भारतीय प्रेस परिषद की जांच टीम ने बिहार में पत्रकारिता की आजादी पर अपनी जांच रिपोर्ट दे दी है.रिपोर्ट में नीतीश सरकार की तुलना इमर्जेंसी से की गई है और कहा गया है कि बिहार में निष्पक्षक पत्रकारिता करना असंभव है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञापन के लोभ में मीडिया संस्थानों को राज्य सरकार ने बुरी तरह अपने ...

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“बंदूक उठाओ, गोली चालओ”

अगर आपको कोई कहे कि अपनी बंदूक उठाइए और चौक चौराहे पर महिलाओं को छेड़ने वाले पर इसका इस्तेमाल कीजिए, तो आप ऐसा करेंगे? यह मश्वरा कोई मुहल्ले के ताऊ का नहीं है, बल्कि दिल्ली के उपराज्यपाल तजेंद्र खन्ना का है. सवाल है कि इतने बड़े पद वाला व्यक्ति इस तरह का मश्वरा दे तो इसे क्या कहेंगे? पर तेजेंद्र ...

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“थाना प्रभारी व एसपी को ही जानता हूं,आईजी, डीआईजी तो कागजी हैं”

झारखंड के डीजीपी कहते हैं कि एडीजी,आईजी और डीआईजी जैसे पद कागजी हैं तो भले ही पुलिस अधिकारियों को ये अपमानजनक लगे पर डीजीपी ने मैनुअल का हवाला देकर हड़कंप मचा दिया है. झारखंड के डीजीपी जीएस रथ ने पिछले दिनों ये बातें आईजी और डीआईजी की बैठक में कही थी. इतना सुनना था कि इन पदाधिकारियों को अपने पद ...

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मधुबनी कांड नौकरशाही की चूक का नतीजा

दो नौकरशाहों के कारण मधुबनी धू धू कर जलती रही और अपने बॉस के हुक्म की तामील करने के चक्कर में एसपी ने छात्रों पर गोलियां चलवाई और लाशें गिरीं. इधर मुख्यमंत्री ने भी इस मामले को प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा है कि अंत भला तो सब भला. प्रशांत की हत्या की बात सामने आई थी. . मधुबनी के ...

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मधुबनी जल उठा कौन है जिम्मेदार- जनता या नौकरशाही?

इर्शादुल हक मां ने पैर, नाखुन कपड़े से बेटे को पहचान लिया पर मधुबनी पुलिस ने मां के ममतत्व को झुठला दिया वह भी एक अधीकारी को बचाने के लिए फिर मधुबनी जल उठा. कौन है जिम्मेदार- जनता या नौकरशाही? वह दुनिया की कौन मां होगी जो अपने जिगर के टुकरे को नहीं पहचान सके. माना की प्रशांत का सर ...

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यहां कुछ नौकरशाहों का सूरज कभी अस्त ही नहीं होता

बिहार के सेवानृत्त हो चुके या होने की बाट जोह रहे नौकरशाहों ने इससे अच्छे दिन पहले कभी नहीं देखे थे. नीतीश सरकार अपने नौकरशाहों पर कुछ इस तरह मेहरबान रहती है कि उसके क्या कहने. अजय कुमार ऐसे ही नौकरशाहों की गिनती कर रहे हैं जिन्होंने सेवा से हटते ही नई पारी शुरू कर दी. कभी कभी तो बिहार ...

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हमारे जवानों को यातनागाहों से निलकालिए, ये घुट-घुट के जी रहे हैं

69 रेजीमेंट के मुथू की तरह हज़ारों जवान हैं जो अधिकारियों की यातना के शिकार हैं. घुट-घुट के जी रहे एक सैनिक की कहानी जो हमारे रोंगटे खड़े कर देती है- एक सैनकि ने नौकरशाही डॉट इन से सम्पर्क कर बताया है कि कैसे आर्मी के अधिकारी अपने मातहत जवानों को शारीरिक और मानसिक यातना देते हैं. और तो और ...

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दाढ़ी और टोपी की मुस्लिम पहचान से बाज आइए वरना अनर्थ हो जायेगा

एक पांच-सात साल के शहरी मध्य वर्ग के गैर मुस्लिम बच्चे से पूछिए, वह पूरी मासूमियत से तुतलाती जुबान में हर टोपी-दाढ़ी वाले के बारे में कहेगा- यह एक “आतंतवादी” है۔ मीडिया, राजनेता और हमारा समाज मुसलमानों की यही पहचान अपने नौनिहालों के मासूम मस्तिष्क में ठूस चुके हैं.देश एक नये खतरे की तरफ बढ़ रहा है. चेतिए नहीं तो ...

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बिहार का प्रशास्निक तंत्र पैसे खर्च करने में कंजूस नहीं, नाकारा है

इर्शादुल हक— कोई पैसे के अभाव में गरीब होता है. कोई पैसा होते हुए भी संसाधनहीन होता है. दोनों स्थितियां खतरनाक हैं. पर इन दोनों में खतरनाक है दूसरी स्थिति. बिहार के प्रशासनक तंत्र का यही हाल है. यह वही बात हुई जैसे हमारे पास पैसे तो हैं पर रोटी और दीगर संसाधनों के लिए तड़पते रहें.पिछले कई सालों से ...

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सिर्फ नौकरशाह ही ‘बदतमीज’ नहीं हैं मंत्री जी

—इर्शादुल हक— ‘चुप बैठिए बदतीमज कहीं के’, यही शब्द थे उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान के एक नौकरशाह के खिलाफ. मंगलवार को आजम खान ने अपने महकमे की एक बैठक बुलाई थी. इसमें उस महकमे के प्रधान सचिव प्रवीर कुमार नहीं शामिल हुए. क्योंकि मुख्यसचिव जावेद उस्मानी ने अचानाक प्रवीर को किसी जरूरी काम से(या फिर बहाने ...

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