OTHER’S VOICE

पाकिस्तानी अखबार: भारत ने दी धमकी

भारत-पाक के तल्ख होते रिश्तों की गूंज पाकिस्तानी अखबारों में भी छाई है.भारत के दो जवानों का सर कलम करने के बाद वहां के अखबारों ने लिखा है कि अगर दोनों देश खुद मिलकर गलतफहमी दूर नहीं कर सकते तो उन्हें संयुक्त राष्ट्र के दूत पर भरोसा करना चाहिए. वहीं पाकिस्तान के सबसे बड़े मीडिया ग्रूप के अखबार जंग ने ...

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2013-छह बातें जिन पर नौकरशाहों का रहेगा जोर

नौकरशाही डॉट इन के सम्पादक इर्शादुल हक उन छह बिंदुओं की तलाश कर रहे हैं जिन पर देश की नौकरशाही वर्ष 2013 में अपना ध्यान सबसे ज्यादा केंद्रित कर सकती है- वर्ष 2013 नौकरशाहों,उनके करियर और कुछ हद तक देश की राजनीतिक दशा के लिए कई मामले में महत्वपूर्ण होंगा.यह वर्ष नौकरशाहों का अगले पांच सालों का भविष्य भी तय ...

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इब्राहीम का आईबी प्रमुख बनना एक साकारात्मक बदलाव है

/निस्तुला हेब्बर/ अपनी स्थापना के 150 वर्ष बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो( आईबी) को पहला मुस्लिम प्रमुख मिला है.1977 बैच के आईपीएस अधिकारी सैयद आसिफ इब्राहीम दुनिया की इस सबसे पुरानी जांच एजेंसी के हाल ही में निदेशक बनाये गये हैं. आसिफ इब्राहीम सबसे पहले 1980 में तब सुर्खियों में आये थे जब उन्होंने बतौर आईपीएस खतरनाक डाकू गिरोह और उसके सरगना ...

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मेरे जैसे बन जाओगे

–संजीव कुमार सिंह– अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद बांका के दो आइएएस अधिकारी दीपक आनंद व मिथिलेश मिश्र कई माह से प्रतिभाओं को कुंद होने से बचाने के अभियान पर निकल पड़े हैं. लगातार मेहनत के बाद उन्होंने सैकड़ों छात्रों में से 12 होनहार छात्र तलाशे हैं.ये छात्र आईएएस बनने की राह पर चल पड़े हैं. अब तक इन दो ...

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पाकिस्तानी अखबार: दिसम्बर में भारत दौरे से आर्थिक वीरानी दूर होगी

पाकिस्तानी अखबार जंग ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के भारत दौरे को सुखद खबर बताते हुए उम्मीद जाहिर की है कि अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का आर्थिक संकट दूर होगा और पाकिस्तान के स्टेडियम्ज की वीरानी लौट सकेगी. 2008 के बाद दोनों देशों के खेल रिश्तों में पनपे खटास के बाद अब पाक क्रिकेट टीम 22 दिसम्ब को दिल्ली रवाना होगी ...

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Is Indian bureaucracy the worst?

By: Srivatsa Krishna   IAS Officer   Bureaucracy bashing is India’s favourite national vocation. And for good reason. Our bureaucracy has its good share of crooks, criminals and cheats who need to be put away – with or without a Lokpal. The simple counter-question is, does the bureaucracy have a disproportionately larger share of crooks than in other professions in ...

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