CBI के हवाले सृजन घोटाला: भ्रम मत पालिये कि यह लालू की हार है, यह तो उनके लिए हथियार है

सृजन घोटाले की जांच सीएम नीतीश कुमार ने सीबीआई के हवाले की तो मीडिया सर्किल से प्रतिक्रिया आई कि नीतीश ने लालू से  मुद्दा छीन लिया. ऐसा सोचने वाले मुगालते में हैं.सच्चाई यह है कि लालू के हाथ एक सदाबहार हथियार मिल गया है. इर्शादुल हक की कलम से.

 

इस सदाबहार हथियार को लालू प्रसाद न सिर्फ अब लगातार चमकाते रहेंगे बल्कि वक्त पड़ने पर हमला भी बोलते रहेंगे. यह हमला मोदी सरकार पर भी होगा और नीतीश सरकार पर भी. इस मुद्दे पर आगे बढ़ने से पहले नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली पर गौर करने की जरूरत है. कोई ड़ेढ़ साल पहले सीवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या हो गयी थी. तब सुशील मोदी विपक्ष के नेता थे. उन्होंने पत्रकार की हत्या के तार को शहाबुद्दीन से जोड़ कर खूब राजनीति की. यहां  तक कहा कि सीवान जेल से( तब शहाबुद्दीन सीवान जेल में थे) हत्या की साजिश रची गयी. मामला तूल पकड़ा. मोदी ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की. नीतीश ने बिना देर किये मामले को सीबीआई को सौंप दिया. तब मोदी के हाथ लगा मुद्दा चिड़िया की तरह उड़ गया.

नीतीश जब भी किसी प्रशासनिक मामले में गंभीर चुनौतियां पाते हैं तो वह अपनी इसी राजनीतिक शैली का इस्तेमाल करते हैं. सृजन मामले में भी राजद लगातार मांग कर रहा था कि इसे सीबीआई को सौंपा जाये. नीतीश ने इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी. उनका मकसद था कि ऐसा करने से उन पर राजद राज्य सरकार को घेर नहीं पायेगा.

लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है. इसे समझने के लिए राजदेव हत्याकांड का फिर उल्लेख जरूरी है. सबीआई इस मामले में कछुआचाल से भी धीमी है. बल्कि हालत यह हो गयी, कि सीबीआई निर्धारित 90 दिन की अवधि में संदिग्धों पर चार्जशीट तक नहीं कर पायी. नतीजा यह हुआ कि तीन आरोपी जमानत लेने में कामयाब रहे.

अब सृजन घोटाला मामला सीबीआई के हाथ में है. लेकिन अब तक की जो खबरें आयी हैं इसमें भाजपा के कई दिग्गजों के नाम आ रहे हैं. किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा पर तो करोड़ों रुपये डकारने के इल्जाम लग ही रहे हैं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, व शाहनवाज हुसैन जैसे नेता भी संदेह के घेरे में हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर ध्यान दें जब उसने सीबीआई को केंद्र सरकार का तोता बताया था. चूंकि सृजन में भाजपा नेताओं पर संदेह है इसलिए यह आशंका जताई जा सकती है कि सीबीआई इस मामले को दबाये रख सकती है. सीबीआई की यही संभावित क्रिया लालू प्रसाद और राजद के लिए आक्रमण का कारण बनेगा.

कैसे है लालू के लिए हथियार

चारा घोटाले में लालू प्रसाद के खिलाफ हर हफ्ते सुनवाई हो रही है. लिहाजा वह अब और आक्रामक मोड में आयेंगे और जनता को बतायेंगे कि देखो सीबीआई मेरे खिलाफ पड़ी है लेकिन वही सीबाई सृजन घोटाले में भाजपा को बचाने में लगी है. वह यह भी कहने से नहीं चूकेंगे कि राज्य में नीतीश और केंद्र में मोदी सरकार मिल कर अपने नेताओं को बचाने में लगे हैं. लालू प्रसाद वैसे भी यह जानते थे कि सृजन घोटाले के आकार जितना बड़ा है, उस लिहाज से अंत में उसे सीबीआई को सौंपा ही जायेगा. ऐसे में जो लोग यह सोच रहे हैं कि नीतीश कुमार ने मामले को सीबीआई को सौंप कर लालू से मुद्दा छीन लिया है, वह मुगालते में हैं. इसकी एक महत्वपूर्ण वजह यह है कि लालू की राजनीति के लिए नीतीश कुमार को कटघरे में खड़ा करने ज्यादा फलदायी नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा करना है. काला धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे ने ही मोदी को दिल्ली की सत्ता सौंपी थी. ऐसे में इसी मुद्दे पर वह 2019 में मोदी को घेरने की अब तैयारी करेंगे. अगर मोदी सरकार इस मामले की तेज जांच करवाती है तो भी लालू फायदा लेंगे, क्योंकि इस मामले में सबसे ज्यादा भाजपा के ही कद्दावर नेताओं के फंसने की संभावना है.

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