चैत्र नववर्ष को हिंदू नववर्ष कहना संकीर्णता : आचार्य चंद्रभूषण

चैत्र नववर्ष को हिंदू नववर्ष कहना संकीर्णता : आचार्य चंद्रभूषण

पहले चैत्र नववर्ष की शुभकामना दी जाती थी। इस बार सोशल मीडिया पर हिंदू नववर्ष की बधाइंयों की भरमार थी। इस परिवर्तन पर आचार्य चंद्रभूषण मिश्र ने कही बड़ी बात।

कुमार अनिल

पहले हिंदुओं के सारे देवी-देवता सबके कल्याण का आशीर्वाद देने की मुद्रा में रहते थे। श्रीराम दरबार सबको आशीर्वाद देने की मुद्रा में ही चित्रित है। फिर पहले श्रीराम के उग्र रूप के कैलेंडर आए। उसके बाद उग्र हनुमान और अब उग्र रूप में शिव भी दिखने लगे हैं। एक-एक करके सारे देवता युद्धरत भाव में दिखने लगे हैं। अब एक और परिवर्तन दिखा।

वर्ष 2021 में पहली बार चैत्र नववर्ष को हिंदू नववर्ष कहते हुए बधाई के संदेश वाट्सएप पर देखकर चौंका। मन में कई सवाल उठे। उत्तर के लिए श्रीमद्भागवत कथा के मर्मज्ञ आचार्य चंद्रभूषण मिश्र को फोन किया, तो उन्होंने बड़ी बात कही।

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आचार्य चंद्रभूषण मिश्र ने कहा कि चैत्र का अर्थ होता है सबका कल्याण। पहले नववर्ष को चैत्र नववर्ष ही कहा जाता था। अब इसे हिंदू नववर्ष कहना एक तरह से संकीर्णता है। जैसे ही हम इसे हिंदू नववर्ष कहेंगे, तो इसका अर्थ है कि यह एक खास धर्म का नववर्ष हो गया, जबकि पहले चैत्र नववर्ष कहने से विश्व कल्याण का बोध होता था। अंग्रेजी नववर्ष को ईसाई नववर्ष तो नहीं कहते। इसीलिए उसे धीरे-धीरे सबने स्वीकार किया। अगर उसे भी ईसाई नववर्ष कहा जाता, तो आज वह दुनिया में हर धर्म-हर देश के लिए स्वीकार्य नहीं होता।

एक दूसरे आचार्य ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर नौकरशाही डॉट कॉम को बताया कि चैत्र नववर्ष को हिंदू नववर्ष कहने के पीछे राजनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि ये राजनीति उपनिषदों सहित हमारे शास्त्रों की उदारता को नकारना है। हमारे शास्त्र किसी एक धर्म या पंथ के कल्याण की बात नहीं करते, बल्कि वे विश्व कल्याण की बात करते हैं।

उधर, कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ ने आज पहले पन्ने की लीड खबर इसी हिंदू नववर्ष पर प्रकाशित की है। अखबार ने लिखा है कि आजतक बांग्ला नववर्ष को किसी ने किसी धर्म से नहीं जोड़ा था। बंगाल में इसे पोइला बैशाख भी कहते हैं। इस अवसर पर पहली बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने हिंदू नववर्ष की बधाई कहकर फेसबुक और सोशल मीडिया पर संदेश दिया।

बंगाल में पोइला बैशाख सभी धर्मों और जातियों का शुभ दिन रहा है। इसे हर धर्म के लोग मनाते रहे हैं। यह परंपरा पिछले 500 वर्षों से रही है।

भाजपा नेता मंगलवार से ही पोइला बैसाख को हिंदू पर्व के रूप में प्रचारित करने लगे। इसे लेकर वहां राजनीति भी गरमा गई। तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष सौगत राय ने पोइला बैशाख को धर्म से जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि बंगाल में सदियों से यह सारे धर्म के लोगों के लिए उत्सव का दिन रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ चुनाव में धर्वीकरण करने के लिए ऐसा कर रही है, जिससे बांग्ला परंपरा को धक्का लगा है। पोइला बैशाख (बांग्ला नववर्ष) आमतौर से हर वर्ष 14 या 15 अप्रैल को मनाया जाता है।

अधिकतर लोग हिंदू नववर्ष के संदेश को वाट्सएप पर फारवर्ड करते रहे, फिर भी अनेक लोग इस संकीर्णता को समझने से नहीं चूके। राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने संकीर्णता का जवाब देते हुए सबके कल्याण की बात की। उन्होंने ट्विट किया- जिस प्रकार सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती देती है, पुष्प सदैव महकता है, उसी तरह यह नूतन वर्ष विक्रम संवत 2078 आपके लिए मंगलमय हो।

चितरंजन गगन ने नववर्ष के लिए सूर्य, फूल, संवेदना, करुणा को प्रतीक बनाया है, जो किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि धर्मों से परे सृष्टि के प्रतीकों में हैं।

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