चमत्कार से कम नहीं, थर्ड डिविजन से मैट्रिक पास, फिर भी बने IAS

चमत्कार से कम नहीं, थर्ड डिविजन से मैट्रिक पास, फिर भी बने IAS

हर मां-बाप चाहता है कि बेटा फर्स्ट ही आए। कोई थर्ड डिविजन से पास हो, तो लोग मान बैठते हैं कि लड़का कुछ नहीं करगा। IAS अवनीश ने पेश की मिसाल।

अगर कोई स्टूडेंट मैट्रिक में थर्ड डिविजन से पास हो, तो लोग मान बैठते हैं कि बच्चा जीवन में कुछ नहीं करेगा। मां-बाप हमेशा चाहते हैं कि उनका बच्चा फर्स्ट ही आए। अगर नहीं आया, तो जैसे लगता है कि समाज में उनकी नाक कट गई। पता नहीं, इस सोच ने कितने छात्रों में निराशा भरी।

बिहार के समस्तीपुर के रहनेवाले हैं आईएएस अवनीश शरण। मैट्रिक में वे थर्ड डिविजन से पास होनेवाले छात्र थे। लेकिन उन्होंने समाज की इस धारणा को गलत साबित कर दिया कि थर्ड डिविजन से पास होने वाले जीवन में सफल नहीं हो सकते। उन्होंने पढ़ाई में ध्यान केंद्रित किया और वह बन कर दिखाया, जो किसी के लिए भी सपना होता है। वे आईएएस अधिकारी बने।

आईएएस अवनीश शरण 2009 बैच के आईएएस हैं। वे छत्तीसगढ़ कैडर से हैं। उन्होंने खुद ही अपने मैट्रिक की मार्क्स शीट सोशल मीडिया में शेयर की। उन्होंने शेयर करके न जाने कितने छात्र-छात्राओं में हिम्मत भर दी है। उन्होंने 1996 में बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड, पटना से मैट्रिक पास किया। तब वे आरएचएस, दलसिंहसराय के छात्र थे। उन्हें मैट्रिक में सिर्फ 314 नंबर आए थे। उन्हें अगर 315 नंबर आया होता, तो वे सेकेंड डिविजन से पास हुए होते। तब फर्स्ट डिविजन से पास होने के लिए 420 नंबर चाहिए थे।

आईएएस अवनीश शरण को फिजिक्स थ्योरी में 16 तथा प्रैक्टिकल में पांच नंबर आए थे। 50 में कुल 21 नंबर मिले थे। इसी तरह केमेस्ट्री में भी उन्हें सिर्फ 18 नंबर मिले थे। बायलोजी थोड़ी बेहतर थी। इसमें 26 नंबर मिले थे। मैथ में 31 नंबर थे।

इसके बावजूद उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। आज के छात्र उनसे सीख ले सकते हैं कि थर्ड डिविजन आए, तो कभी निराश न होना। संकल्प के साथ आगे बढ़ जाना। आपके सपने भी पूरे होंगे।

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