नीतीश सरकार का चौराहे पर ‘चिरहरण’ किया बीपीएससी ने

BPSC के ताजा रिजल्ट में पिछड़े वर्ग का अभ्यर्थियों का कटआफ सामान्य वर्ग से अधिक होना इस संस्थान की जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है.

अभी हाल ही में बिहार लोकसेवा आयोग के एक सदस्य ने इंटरव्यू में पास कराने के लिए 25 लाख मांगने के विवाद के बाद इस्तीफा दिया था। इससे बीपीएससी के साथ सत्तारूढ जदयू और भाजपा दोनों को शर्मसार होना पड़ा था। क्योंकि वह सदस्य इन्हीं दोनों पार्टियों की ‘गंगा’ में डूबकी लगाकर बीपीएससी के सदस्य बने थे। सामान्य सी बात है कि डूबकी का ‘पुण्य’ वे अकेले नहीं डकारे होंगे।

वीरेंद्र यादव


लेकिन इससे भी बड़ा कारनामा बीपीएससी ने 63वीं परीक्षा के फाइनल परिणाम में कर दिया। राज्य में बीपीएससी की परीक्षा में सवर्णों के लिए कोई आरक्षण नहीं है, लेकिन बीपीएससी ने सवर्णों को 50 फीसदी आरक्षण दे दिया। बीपीएससी की वेबसाइट पर जारी परीक्षा परिणाम में सवर्णों के आरक्षण का पूरा ब्यौरा दिया गया है।

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सामान्य भाषा में सवर्ण जाति का कटऑफ मार्क्स पिछड़ी जातियों से अधिक होता है। आरक्षित श्रेणी का व्यक्ति भी यदि सामान्य श्रेणी के बराबर नंबर लाता है तो उसकी गिनती आरक्षित श्रेणी में होती है। लेकिन बीपीएससी की सामान्य श्रेणी से अधिक पिछड़ा वर्ग का कटआफ मार्क्स है। इस परीक्षा में अनारक्षित श्रेणी के लिए कट ऑफ मार्क 588 है, जबकि पिछड़ा वर्ग के लिए कटआफ मार्क 595 है। पिछड़ा वर्ग महिला और सवर्णों का कटआफ मार्क दोनों बराबर है।

दरअसल बिहार लोक सभा आयोग ने कुर्मी जाति के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बनिया जाति के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को एक साथ आईना दिखाने का काम किया है। बीपीएससी दिखाया है कि कुर्मी-बनिया मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर एक ‘25 लखा’ मेंबर भारी है। परीक्षा परिणाम भी यही बताता है। सवर्णों से ज्यादा कटऑफ पिछड़ी जाति का है और मैरिट लिस्ट के शुरू के 19 अभ्यर्थी सवर्ण जाति के हैं। इसका अर्थ यह भी है कि ‘25 लखा’ का खेल सिर्फ ड्रामा नहीं था।

करप्शन में डूबा बीपीएससी

बीपीएससी की 63वीं संयुक्त परीक्षा की मेधा सूची बनाने में भी आयोग ने ‘25 लखा’ खेल खेला है। मेधा सूची को अंतिम रूप देने में सवर्ण जातियों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। पिछड़ों का कटआफ मार्क सवर्णों से 7 अंक ज्यादा है। लेकिन टॉपर करने वाले शुरू के 19 छात्र सवर्ण हैं। इसमें एकमात्र मुस्लिम सवर्ण हैं, जबकि 18 हिंदू सवर्ण यानी भूराबाल हैं। आखिर बीपीएससी के पास प्रतिभा नापने की कौन सी मशीन है, जिसमें ज्यादा अंक पिछड़ों को आता है और टॉपर बनते हैं सवर्ण।

बीपीएससी की बेशर्मी

बीपीएससी ने गुंडागर्दी घोषित रूप से की है। उसने जारी परीक्षा परिणाम में लिखा है कि क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र इंटरव्यू के समय उपलब्ध नहीं कराने वाले कुछ परीक्षार्थियों का परिणाम रद कर दिया गया है। जबकि बिहार सरकार में क्रीमीलेयर आरक्षण का कोई आधार नहीं है। बिहार सरकार की नौकरियों में आरक्षण के दावे के लिए जाति प्रमाण पत्र देना पड़ा है, क्रीमीलेयर नहीं। क्रीमीलेयर सिर्फ केंद्र सरकार की सेवाओं के लिए मान्य है। क्रीमीलेयर ओबीसी के लिए बनता है। बीसी 1 और बीसी 2 के लिए जाति प्रमाणपत्र बनता है।

बीपीएससी के इंटरव्यू में 824 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 355 का अंतिम रूप से चयन हुआ। आयोग ने समग्र रूप से यह नहीं बताया है कि किस श्रेणी के कितने अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। आरक्षित श्रेणी के कितने लोग अनारक्षित पदों के लिए चुने गये हैं।

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