सीएम ने घुमा-फिरा कर माना शराबबंदी फेल, राजद ने घेरा

सीएम ने घुमा-फिरा कर माना शराबबंदी फेल, राजद ने घेरा

पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहरीली शराब पर झुंझलाकर कर कहा, शराब पिओगे, तो मरोगे। इसके दो अर्थ हैं। राजद ने सीएम को कहा, गैरजवाबदेह।

बिहार में शराबबंदी को देश में नायाब उदाहरण बतानेवाले मुख्यमंत्री शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब के सवाल पर भड़क गए। कहा, शराबबंदी से बहुत लोग मेरे खिलाफ हो गए हैं। राजनीतिक दलों को प्रचार करना चाहिए कि पिओगे तो मरोगे। पिओगे तो मरोगे कहने का अर्थ है कि मुख्यमंत्री घुमा-फिरा कर स्वीकार कर रहे हैं कि शराबबंदी फेल है। पियोगे तो मरोगे कहने में मुख्यमंत्री की असमर्थता साफ झलक रही है। इस वक्तव्य में यह भी छिपा हुआ है कि लोग मान ही नहीं रहे हैं, तो हम क्या करें।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर राजद ने कड़ा प्रतिवाद किया है। राजद ने मुख्यमंत्री को गैरजिम्मेदार बताया है। पार्टी ने ट्वीट किया-

“शराब पिओगे तो मरोगे! हम कुछ नहीं करेंगे!”

– हर जिम्मेदारी से कोसों दूर CM नीतीश कुमार! मतलब लाख किरकिरी के बाद भी शराब का अवैध व्यापार नहीं रोकेंगे नीतीश कुमार! खूब कमाई करेंगे! पुलिस, शराब माफिया और JDU-BJP की खूब कमाई करवाएंगे! खूब पिलवाएंगे और शराबबंदी का झुनझुना बजाएंगे!

दो दिन पहले राजद के तीन प्रवक्ताओं ने आंकड़ों के साथ कहा था कि शराबबंदी के बावजूद पीनेवालों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। जहरीली शराब से लोग मर रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा था कि शराबबंदी दरअसल सत्तारूढ़ दल की आय का स्रोत बन गया है। आज उसी संदर्भ में जब सवाल पूछा गया, तो मुख्यमंत्री भड़क गए। लेकिन सवाल अपनी जगह बरकरार हैं कि शराबबंदी है, तो इतनी शराब कैसे पकड़ी जा रही है और कितनी शराब नहीं पकड़ में आ रही है। शराबबंदी काला धंधा और काला धन फलफूल रहा है। जिम्मेवारी किसकी है? क्या कल होनेवाली समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री इस बात की जानकारी लेने का प्रयास करेंगे कि शराबबंदी के बावजूद बिहार में कितनी शराब अवैध तरीके से आ रही है?

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