सीएम रैंकिंग में सर्वाधिक 62 स्थान नीचे क्यों गिरे नीतीश

सीएम रैंकिंग में सर्वाधिक 62 स्थान नीचे क्यों गिरे नीतीश

इंडियन एक्सप्रेस ने सौ शक्तिशाली लोगों की सूची जारी की। चौंकानेवाली बात है कि मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा गिरावट नीतीश की हुई है। इसकी दो वजहें हैं।

कुमार अनिल

आज इंडियन एक्सप्रेस ने देश के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची जारी की। इसमें सभी मुख्यमंत्रियों की भी रौंकिंग की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो स्थान नीचे गिरे हैं। इसबार वे 13 वें स्थान पर हैं। ममता बनर्जी एक स्थान गिरी हैं। वह इस बार 22 वें स्थान पर हैं। जिन मुख्यमंत्रियों की रैंकिंग गिरी हैं उनमें जगनमोहन रेड्डी, शिवराज चौहान, नवीन पटनायक, येदुरप्पा, मनोहर लाल खट्टर,पलनीस्वामी शामिल हैं। पर सबसे ज्यादा रैंकिंग में गिरावट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में हुई है। वे 18 वें स्थान से लुढ़ककर 80 वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

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कई मुख्यमंत्रियों की रैंकिंग में काफी सुधार भी हुआ है, इनमें छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, केरल के सीएम विजयन 75 वें स्थान से ऊपर उठकर इसबार 24 वें स्थान पर हैं। केजरीवाल, अशोक गहलोत की भी रैंकिंग सुधरी हैं।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 62 स्थान नीचे जाने की दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह है, उनकी पार्टी को भाजपा से कम सीट मिलने के बावजूद उनका सीएम बनना। माना जा रहा है कि अब पहले की तरह वे भाजपा से अपनी स्वतंत्रता कायम रखने में असमर्थ हैं। तीन कृषि कानूनों से लेकर अन्य मुद्दों पर वे जिस तरह भाजपा के साथ खड़े दिखे हैं, उससे उनकी छवि कमजोर मुख्यमंत्री की बनी है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंडियन एक्सप्रेस ने सप्ताह भर पहले विधानसभा में जो कुछ हुआ, उसे रैंकिंग तय करते समय मापदंड बनाया है या नहीं। इस घटना की खुद इंडियन एक्सप्रेस ने आलोचना की थी और नए पुलिस बिल को विविदास्पद बताया था।

नीतीश कुमार कभी देश के श्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों में एक माने जाते थे। उनकी रैंकिंग गिरने की दूसरी वजह है राज्य की समस्याओं से बचने की कोशिश। शराबबंदी मामले में भी सवाल उठे हैं। राज्य के एक मंत्री का नाम जिस प्रकार उछला, उस मामले में भी मुख्यमंत्री कार्रवाई करने से बचते रहे।

राज्य में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़े सवाल हैं। रोजगार के लिए तो कई संगठन महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन समस्याओं पर बात करने के बजाय जल-जीवन-हरियाली पर बात कर रहे हैं। वे मुख्य सवालों से लड़ते हुए नहीं दिख रहे हैं, बल्कि बचते हुए दिख रहे हैं।

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