CMIE : मुख्यमंत्री का पीछा नहीं छोड़ रहा रोजगार का सवाल

CMIE : मुख्यमंत्री का पीछा नहीं छोड़ रहा रोजगार का सवाल

मुख्यमंत्री कभी जल-जीवन-हरियाली की बात करते हैं, कभी राजगीर में टूरिज्म की, लेकिन रोजगार का सवाल उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। CMIE की रिपोर्ट से फिर हंगामा।

CMIE (सेंटर फॉर मानीटरिंग इंडियन इकॉनोमी) की रिपोर्ट ने एक बार फिर जदयू-भाजपा सरकार पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी, 2021 तक बिहार में बेरोजगारी की दर 11.5 फीसदी थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा शिक्षित बेरोजगार बिहार में ही हैं।

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विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने CMIE की रिपोर्ट को आधार बनाकर नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला। बिहार को युवा प्रदेश कहा जाता है, लेकिन युवा ऊर्जा निर्माण में लगने के बजाय बेरोजगार बैठी है। 20 से 24 वर्ष के पढ़े-लिखे युवा सबसे ज्यादा बेरोजगार हैं। इस श्रेणी में लगभग साठ प्रतिशत युवाओं के पास काम नहीं हैं।

सरकार कहती है कि उसने महिलाओं के लिए बहुत काम किया। उन्हीं के कहने पर शराबबंदी लागू की। अब वे रोजगार मांग रही हैं, लेकिन सरकार दे नहीं रही। बिहार में महिला शक्ति सबसे ज्यादा बेरोजगार है। तेजस्वी ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के सवाल पर हफ्ते भर पहले उन्होंने प्रदर्शन किया, तो उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। तेजस्वी ने युवकों को ललकारते हुए कहा- सोचो, जागो।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि सरकार की उदासीनता, अकर्मण्यता और गलत नीतियों के कारण बेरोजगारी बिहार के लिए अभिशाप बन गई है। उन्होंने लाखों रिक्तियों के बावजूद नौकरी नहीं देने पर सरकार की कड़ी आलोचना की।

तेजस्वी ने जैसे ही बेरोजगारी का सवाल फिर उठाया, एक बार फिर बेरोजगार सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ गुस्से का इजहार कर रहे हैं। डॉ. प्रभात कुमार सिन्हा ने कहा-व्यूरेक्रेटिक व्यवस्था के मारे हुए बिहार के 28 नवअंगीभूत कॉलेजों के 300 शिक्षाकर्मी 12 वर्षों से भुगतान से वंचित हैं।

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