कोरोना गाइडलाइन की धज्जी उड़ा कर चल रहे हैं कोचिंग संस्थान

कोविड-19 गाइडलाइन का उल्लंघन कर नालंदा में चल रहे हैं कोचिंग संस्थान

बिहार सरकार का फरमान, 4 जनवरी से खुलेंगी कोचिंग एवं स्कूल ,परंतु नालंदा में कई महीनों से चल रहे हैं कोचिंग संस्थान

नालंदा से संजय कुमार की रिपोर्ट

बिहार सरकार ने कोरोना काल के दौरान बंद पङे कोचिंग एवं स्कूल तथा महाविद्यालय खोलने हेतु 4 जनवरी से आदेश दिया है ।सभी संस्थानों को कोविंङ- 19 गाइडलाइन का सख्ती से पालन करना होगा। सूबे के मुख्यमंत्री हैं नीतीश कुमार ।इनका गृह जिला मुख्यालय हैं बिहारशरीफ । बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते नीतीश कुमार आम जनों की सुरक्षा एवं विकास हेतु कई दिशा निर्देश देते हैं, जिसका पालन पूरे बिहार में होता है।

परंतु ,लगता है कि नालंदा जिले में इनके आदेशों का पालन नहीं होता है. या यह कहें कि इनके आदेशों को यहां के पदाधिकारी सख्ती से पालन करवाने में परहेज बरते हैं।

कोरोना के दौरान पूरे देश सहित बिहार के शैक्षणिक संस्थान बंद थे ।इस दौरान छात्र छात्राओं को ऑनलाइन क्लास सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शुरू करने की इजाजत मिली थी।परंतु जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में धीरे धीरे कोचिंग संस्थान खुलना शुरू हो गया ।

करीब दो माह के अंदर कई नामी-गिरामी कोचिंग संस्थानों ने कोरोना काल के पूर्व जैसे ही व्यवस्था में क्लास लेना शुरू कर दिया है। कोचिंग संस्थान खुलेआम बिहारशरीफ में चल रहे हैं, छात्र-छात्राएं आ जा रहे हैं, परंतु इन्हें देखने सुनने वाला कोई नहीं है।

बिहार सरकार ने 4 जनवरी से नवमी कक्षा से लेकर ऊपरी तथा उच्च कक्षाओं के लिए सरकारी एवं निजी विद्यालय, महाविद्यालय आदि खोलने का आदेश दिया है ।इस दौरान कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है ।बिना मास्क पहने तथा दूरी बनाकर छात्रों को बैठाना है ।कक्षाएं को प्रतिदिन सेंटेराईज करना है। एक बार में कक्षा मे 50 परसेंट छात्रों की उपस्थिति होनी चाहिए तथा शेष 50 परसेंट अगले दिन।

बताया जाता है कि शहर में कई बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इन संस्थानों में एक बार में 500 से अधिक छात्रों को बैठा कर पढ़ाई की जा रही है। मास्क की जरूरत भी नहीं महसूस की जाती हैं। ना ही सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखा जाता है। कई छात्रों ने इस संवाददाता को बताया कि करीब 2 माह से बिहारशरीफ में कोचिंग संस्थान चल रहे हैं ।कई संस्थानों ने को छात्रों से एडमिशन के नाम पर मोटी रकम भी वसूली है ।अब कोर्स पूरा कराने के नाम पर 3 से लेकर 5 हजार तक रुपए बसूला जा रहा है।

बिहारशरीफ में नवमी से नीचे की भी स्कूल की कक्षाएं चल रही है ।इन्हें कोई देखने वाला नहीं है। जब इस संबंध में इस संवाददाता ने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा कोचिंग खोलने का किसी प्रकार आदेश नहीं दिया गया है।

क्या नालंदा में अलग ही कानून है । कोचिंग संस्थानों पर रोक नहीं लगाए जाने पर कई तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही है ।कई लोगों का कहना है कि कोचिंग संस्थान में इतनी आमदनी होती है की नीचे से लेकर ऊपर तक पैसे के बल पर मुंह बंद करवा दिया जाता हैं ।

सवाल यहां यह है कि आम बच्चों को कोरोना से बचाने के उद्देश्य कोचिंग संस्थान को बंद किया गया था। वह पूरा नहीं होता दिख रहा है ।जबकि कोरोना का संकट अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है।

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