कांग्रेस आलाकमान ने थाम ली बिहार चुनाव की लगाम. क्या कांग्रेस का जनाधार लौटेगा ?

कांग्रेस आलाकमान ने थाम ली बिहार चुनाव की लगाम. क्या कांग्रेस का जनाधार लौटेगा ?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पार्टी की आलाकमान ने बिहार चुनाव कि कमान अपने हाथों में ले लिया है. पार्टी के पास कोई समर्थ प्रादेशिक लीडर नहीं है और पिछले कुछ समय से बिहार कांग्रेस के ऊपर टिकेट बेचने और अधिकतर सवर्ण जाति के प्रत्याशियों को टिकट देने के आरोप लग रहे थे.

शाहबाज़ कि रिपोर्ट

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को दरकिनार करते हुए बिहार चुनाव का पूरा कण्ट्रोल अपने हाथों में ले लिया है। चुनाव कि तैयारी, नीति निर्माण और मीडिया प्रबंधन अब दिल्ली से निर्देशित हो रहे हैं और फैसले लिए जा रहे हैं।

संभवत: पहली बार हुआ है जब पार्टी की केंद्रीय इकाई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने किसी राज्य के चुनाव के दौरान चुनाव प्रबंधन और तैयारियों का पूरा प्रभार अपने हाथों में ले लिया है।

हाल ही में कांग्रेस की बिहार राज्य इकाई पर टिकेट बेचने और अधिकतर सवर्ण जाति (हिन्दू और मुस्लिम) के प्रत्याशियों को टिकेट देने के आरोप लगे थे. ऐसे में कांग्रेस पार्टी आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा और कांग्रेस की केंद्रीय टीम ने बिहार चुनाव कि देखरेख एवं निति निर्माण अपने हाथों में लेने का फैसला कर लिया.

बीबीसीहिंदी में मणिकांत ठाकुर ने लेख में कांग्रेस के ऊपर सवाल उठाया कि कांग्रेस को महागठबंधन का घटक दल होने के नाते 70 सीटें तो मिल गयी हैं लेकिन पार्टी इसे संभल पाने में अक्षम है. “मुख्य कारण हैं – साफ़ दिख रही लचर/बीमार सांगठनिक स्थिति, जन समर्थन जुटाने लायक समर्थ प्रादेशिक नेता का आभाव और जिताऊ सामर्थ्य के बिना भी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने कि खोखली जिद”.

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बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने हिंदुस्तान अख़बार से कहा, “प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) और राज्य के नेताओं ने बैक सीट ले लिया है और एआईसीसी के पदाधिकारी अभियान और मीडिया रणनीति के अलावा चुनाव तैयारियों का प्रबंधन कर रहे हैं।”

हलाकि इस बार कांग्रेस पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बिहार चुनाव को लेकर बहुत संजीदा दिख रही है. पार्टी ने 2015 के बिहार चुनाव में 41 में से 27 सीटों पर जीत दर्ज किया था. अब इससे बड़ी जीत दर्ज करने कि योजना बन रही है. इसके लिए कांग्रेस पार्टी ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला करते हुए “का किये हो” कैंपेन लांच किया है. इस कैंपेन के माध्यम से कांग्रेस ने नीतीश के तमाम दावों पर सवाल उठाये गए. कांग्रेस ने बेरोज़गारी, पलायन, अपराध और शिक्षा पर घेरा जिसे कांग्रेस का नीतीश सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.

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बिहार में 90 के दशक में लालू के उदय और भागलपुर दंगों के बाद के कांग्रेस का जनाधार सिमटा. मुसलमान जहाँ राजद के साथ हो गए वहीं उसके बाद के वर्षों में भाजपा ने हिन्दू सवर्णों में गहरी पैठ बना ली. इसके बाद से कांग्रेस बिहार में कभी मुख्य भूमिका में नहीं आ सकी है. महागठबंधन में कांग्रेस को 70 सीटें मिलने पर भी सवाल उठे. लेकिन बिहार विधान सभा चुनाव 2020 में कांग्रेस उम्मीद से अधिक सीटें जीतने का विश्वास जाता रही है.

कांग्रेस पार्टी द्वारा यह कदम महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के बिहार दौरे पर आने के बाद लिया गया. सुरजेवाला 17 अक्टूबर को महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में राष्ट्रीय जनता दल नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव के साथ मौजूद रहे थे. उसी समय बिहार के सियासी गलियारों में बिहार कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लग रहे थे. ऐसा मुमकिन है कि सुरजेवाला कि रिपोर्ट पर ही कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार कांग्रेस को दरकिनार कर बिहार चुनाव अभियान अपने हाथों में ले लिया.

बिहार चुनाव से पहले पार्टी के ऊपर गंभीर आरोप लगते ही कांग्रेस आलाकमान हरकत में आ गया और चुनाव प्रबंधन की देखरेख के लिए अपने वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं की एक टीम को तुरंत बिहार भेज दिया।  पार्टी ने सुरजेवाला को बिहार चुनाव कि देखरेख करने वाली समिति के महासचिव होंगे वहीं मोहन प्रकाश चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति के प्रमुख हैं, जबकि प्रवक्ता पवन खेरा मीडिया पैनल के प्रभारी बनाये गए हैं.

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जैसे बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा, कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह को बिहार चुनाव अभियान के संचालन के लिए बनी समिति से बाहर रखा गया है। राज्य इकाई के नेताओं ने इनके खिलाफ पैसे लेकर टिकेट बेचने समेत सवर्णों कि हिमायत करने का आरोप लगाकर विद्रोह किया था.

पार्टी ने पटना में एक वॉर रूम भी स्थापित किया और झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजॉय कुमार को कार्यभार सौंपा है. अजय कुमार पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और उन्होंने 1986 में पटना के पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा दी थी।

कांग्रेस पार्टी के महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हिंदुस्तान से कहा “हम चुनाव प्रबंधन में शामिल हैं, जिसे पूरी तरह से राज्य के नेतृत्व ही संभालते है। मेरी भूमिका असंतुष्टों को मनाने, स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम को देखने के साथ-साथ वॉर रूम और मीडिया प्रबंधन को देखने की भी है।’ बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा के बारे में उन्होंने कहा कि वह 22 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव में व्यस्त है।

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