Exclussive:मृत्यु पूर्व IAS अभिमन्यु सिंह के चैट से खुली सिसटम की कलई

Exclussive:मृत्यु पूर्व IAS अभिमन्यु सिंह के चैट से खुली सिसटम की कलई

अपने दौर के बड़े रुत्बे के IAS अफसर थे अभिमन्यु सिंह. लेकिन महामारी में न उनका रुत्बा काम ना. नौकरशाही डॉट कॉम को उनका निजी व्हाट्सैप मैसेज मिला है जिसमें मौत से पहले उन्होंने अपनी बेबसी बयान की है.

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Irshadul Haque, Editor naukarshahi.com

अभिमन्यु सिंह की आज पटना के कदम कुआ में मृत्यु हो गयी. वह 1964 बैच के आईएएस अफसर थे. नौकरशाही से ले कर राजनीति और प्रशासन में उस दौर में उनकी ऐसी तूती बोलती थी कि मुख्यमंत्री हों या राज्यपाल उनको हद से ज्यादा महत्व दिया करते थे. यह उनके रुत्बे का ही असर था कि सन 2000 में रिटायर होने के बाद कुछ महीने बाद उन्हें मगध विश्वविद्यालय का वायस चॉंस्लर बना दिया गया था.

अभिमन्यु सिंह अपने दौर में चाहे जितने बड़े रुत्बे के मालिक रहे हों पर उनकी मौत से चंद दिन पहले जो वाट्सऐप चैट उन्होंने अपने सहकर्मी पूर्व आईएएस अफसर से की है उससे साफ हो जाता है कि उन्हें कोरोना के संक्रमण से ज्यादा नौकरशाही की व्यस्था ने मार डाला.

अभिमन्य सिंह एक पूर्व आईएएस अफसर के साथ नियमित चैटिंग किया करते थे. इस दौरान उन्होंने लिखा है कि वह कदम कुआं के अपने आवास में एक अटेंडेंट व ड्राइवर के साथ अकेले रहते थे. उन्होंने वैक्सीन का दूसरा डोज 13 अप्रैल को लिया था. लेकिन उसके कुछ दिनों बाद उनकी हालत नाजुक होती चली गयी. तब उन्हें कोरोना का संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी लेकिन पहले बुखार आया फिर आक्सीजन लेवल अचानक कम होने लगा. उन्होंने चैटिंग में लिखा है कि 80 साल से ज्यादा उम्र अपने आप में एक समस्या है. उस पर से अस्पतालों ने एडमिट करने से मना कर दिया क्योंकि मेरे पास कोविड जांच की रिपोर्ट नहीं थी.

उस चैटिंग के अनुसार अभिमन्यु सिंह ने अपने अंतिम घड़ी में सिस्टम की बेरुखी को बुरी तरह झेला. जब उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं लिया गया तो उन्होंने घर पर ही ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की सोची. लेकिन यह भी आसान नहीं था. अभिमन्यु सिंह ने इस व्हाट्सऐप चैट में बिहार के वर्तमान मुख्यसचिव व स्वास्थ्य सचिव का जिक्र किया है और कहा है कि उन्हें इस गंभीर इश्यु पर सोचना होगा कि आम लोगों को की परेशानियों को कैसे न्यूनतम किया जाये.

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हालांकि अभिमन्यु सिंह ने उस चैटिंग में यह बताया है कि उन्हें घर पर आक्सीजन की व्यवस्था हो गयी थी लेकिन उसके बाद उनकी किन परिस्थितियों में मौत हुई और उस समय में उनके परिवार या उनके सेवकों ने क्या भूमिका निभाई यह पता नहीं चल सका है.

अभिमन्यु सिंह का परिवार काफी प्रतिष्ठित परिवार रहा है. उनके परिवार में अनेक ब्यूरोक्रेट्स थे. उनकी तीन बेटियां हैं जिनमें से एक दिल्ली युनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं जबकि दो बेटियां अपने पतियों के संग कनाडा में रहती हैं.

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