किसानों के राजभवन मार्च पर क्यों हिंसक हुई बिहार पुलिस?

किसानों के राजभवन मार्च पर क्यों हिंसक हुई बिहार पुलिस?

किसान कानूनों के खिलाफ पटना में किसान संगठनों के राजभवन मार्च को नाकाम करने के लिए पुलिस ने लाठियों का सहारा लिया और आंदोलनकारियों को खदेड़ के पीटा.

आज पटना के गांधी मैादन से लेफ्ट और किसान संगठनों के राजभवन मार्च को महज एक किलो मीटर के बाद डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेड लगा कर रोक दिया. राजभवन मार्च पर डटे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसा दी. न सिर्फ युवा आंदोलनकारियों को बल्कि बुजुर्गों को भी खेदड़ कर पीटा गया.

सरकार की मंशा पर पहले से ही किसान संगठनों को संदेह था क्योंकि राजभवन मार्च के लिए पुलिस बंदोबस्त तो सख्त थी है, अप्रत्याशित रूप से पुलिस बल की संख्या बहुत ज्यादा थी.

किसान संगठन से जुड़े एक कार्यकर्ता ने बताया कि पुलिस हमारे आंदोलन को दमन और पुलिसिया हिंसा से कुचलना चाहती है.

किसान आंदोलन पर नजर रखने वाले सत्य नारायण मद ने कहा है कि बिहार सरकार को यह डर है कि दिल्ली के सिंधु बॉर्डर, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में चल रहे किसान आंदोलन की जद में बिहार भी न आ जाये इसलिए बाहर सरकार इस आंदोलन को कुचलना चाहती है.

इस राजभवन मार्च को राजद और कांग्रेस ने भी अपना समर्थन दिया था. इस बीच राजद प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने पुलिस लाठी चार्ज पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा किसान आंदोलन के समर्थन में पटना में राजभवन मार्च कर रहे लेफ्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं पर नीतीश-BJP सरकार के इशारे पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया. उसकी घोर निंदा करता हूँ। सरकार लाठी-गोली के दम पर किसानों की आवाज को दफनाना चाहती है। जोकि अलोकतांत्रिक

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